Wednesday, 28 December 2011

अब तक 21 मंत्रियों पर गिरी गाज


यूपी की मुख्यमंत्री मायावती अब तक भ्रष्टाचार और दूसरे  आरोपों की शिकायतें मिलने के बाद 21 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। सूबे के लघु उद्योग मंत्री चंद्रदेव राम यादव को हटाए जाने की सिफारिश के साथ ही लोकायुक्त न्यायमूर्ति (रि.) एनके मेहरोत्रा ने अब तक 12 मंत्रियों की बर्खास्तगी की सिफारिश की है। इसमें से मुख्यमंत्री मायावती ने 11 को बाहर का रास्ता दिखा दिया। वहीं अभी तक मायावती ने दस और मंत्रियों को अलग अलग आरोपों में मंत्रिमंडल से बाहर कर चुकी है।

चंद्रदेव यादव के खिलाफ मंत्री पद पर रहते हुए अपने गृह जिले आजमगढ़ के एक स्कूल से प्रधानाध्यापक की तनख्वाह लेने का भी आरोप है। मंत्री ने दो दिन पहले लोकायुक्त समक्ष पेश होकर अपनी गलती स्वीकारी थी। इसके बाद बुधवार देर शाम न्यायमूर्ति ने इन्हें हटाने की सिफारिश मुख्यमंत्री से कर दी। इनके ऊपर भ्रष्टाचार से जुडे़ कई अन्य आरोप भी हैं।

लोकायुक्त की सिफारिश पर अब तक बर्खास्त किए गए मंत्रियों में धर्मार्थ कार्य मंत्री राजेश त्रिपाठी,  दुग्ध विकास मंत्री अवधपाल सिंह यादव,  श्रम मंत्री बादशाह सिंह, माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र,  अम्बेडकर ग्राम विकास मंत्री रतन अहिरवार, कृषि शिक्षा मंत्री राजपाल त्यागी,  उच्च शिक्षा मंत्री राकेशधर त्रिपाठी,  डॉ. यशपाल सिंह,  अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री अकबर हुसैन,  पिछला कल्याण मंत्री अवधेश वर्मा और प्रांतीय रक्षादल मंत्री डॉ. हरिओम शामिल है।

मायावती ने दस और मंत्रियों को विभिन्न आरोपों में मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया। इनमें मुख्य रूप से परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा,  खाद्य प्रसंस्करण मंत्री आनंदसेन यादव,  मत्स्य मंत्री जमुना निषाद और अशोक दोहरे शामिल हैं।

इतना ही नहीं राज्य के लोक निर्माण और सिंचाई मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, परिवहन मंत्री रामअचल राजभर, राजस्व मंत्री फागू चौहान समेत करीब 12 मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें लोकायुक्त को मिली हैं। इनमें कुछ के खिलाफ जांच जारी है।
जो मंत्री बाहर हुए
चंद्रदेव राम यादव लघु उद्योग मंत्री ( लोकायुक्त ने की हटाने की सिफारिश )
डॉ. यशपाल सिंह  विज्ञान एंव प्रोद्योगिकी मंत्री  (27 दिसंबर )
अकबर हुसैन - अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री- (27 दिसंबर)
राजेश त्रिपाठी - धर्मार्थ कार्य मंत्री
अवधपाल सिंह यादव - दुग्ध विकास मंत्री
बादशाह सिंह - श्रम मंत्री
रंगनाथ मिश्र - माध्यमिक शिक्षा मंत्री
रतन लाल अहिरवार - अम्बेडकर ग्राम विकास मंत्री
राजपाल त्यागी ­ - कृषि शिक्षा मंत्री
राकेशधर त्रिपाठी - उच्च शिक्षा मंत्री
अवधेश वर्मा - पिछला कल्याण मंत्री
डॉ. हरिओम - प्रांतीय रक्षादल मंत्री
बाबू सिंह कुशवाहा - परिवार कल्याण मंत्री
अनंत मिश्रा - स्वास्थ्य मंत्री
आनंदसेन यादव - खाद्य प्रसंस्करण मंत्री
जमुना निषाद - मत्स्य मंत्री
अशोक दोहरे  जल संसाधन मंत्री ( 19 जनवरी 2011 )

Monday, 26 December 2011

सुरेश वाडेकर के गीतों की एक यादगार शाम


मालवीय जयंती पर कमानी आडोटोरियम में गीत पेश करते सुरेश वाडेकर। 

दिसंबर की एक सर्द शाम। कमानी आडोटिरयम। मालवीय जंयती पर बीएचयू के पूर्व छात्रों का जमावड़ा। महामना की 150वीं जयंती के मौके पर हर साल की तरह दिल्ली में पूर्व छात्रों का जुटान हुआ। युवा और बुजुर्ग सभी एक साथ। इस शाम को सुरमई बनाया बालीवुड के जाने माने पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर ने। सुरेश वाडेकर ने मंच पर आते ही सीने में जलन सी क्यूं है...आंखों में तूफान सा क्यूं है गाना शुरू किया तो हर उम्र के लोग संजीदा हो गए। इस सिलसिले में सुरेश वाडेकर ने अपना एक और लोकप्रिय गीत ए जिदंगी गले लगा ले पेश किया। इस गीत में उनका साथ दिया उनकी पत्नी रत्ना ने। लेकिन राजकपूर जैसे निर्माता के विशेष पसंद सुरेश वाडेकर ने श्रोताओं की विशेष मांग पर प्रेमरोग फिल्म का गीत - मैं हूं प्रेम रोगी भी पेश किया। इस पर पर सार हॉल झूम उठा। इसके बाद राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप धोते धोते....हुश्न पहाड़ों का क्या कहना की बारहों महीने यहां मौसम जाड़ों का...., मैं देर करता नहीं देर हो जाती है....( फिल्म हीना ) पेश किया। ये सभी गीत राजकपूर की फिल्मों से थे। एक बार फिर घड़ी थी संजीदा होने की...लगी आज सावन की फिर वो घड़ी है....( फिल्म- चांदनी ) के गीत के साथ। लेकिन सुरेश वाडेकर और इस दिल में क्या रखा है....बस तेरा ही प्यार छुपा रखा है...मेघा रे मेघा रे मत परदेश जा रे जैसे गीत पेश किए। युगल गीतों में सुरेश वाडेकर का साथ दिया उनकी पत्नी रत्ना ने। सुरेश वाडेकर के गीतों पर संगीत की धुन में साथ दे रहे थे दिल्ली के जाने माने सुर साधक पंडित ज्वाला प्रसाद जी को बांसुरी पर थे अजय प्रसन्ना।
 कुल मिलाकर एक ऐसी शाम रही जो श्रोताओं को लंबे समय तक याद रहेगी। अपने गीतों के दौरान सुरेश वाडेकर आज के दौर में लिखे जा रहे डिंका चीका टाइप के गानों से काफी खफा दीखे। बकौल सुरेश वे ऐसे गीतों में खुद को फीट नहीं पाते।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य
-          

Sunday, 25 December 2011

साल 2011 ने जिन्हे हमसे छीन लिया..

.सबसे पहले बात बालीवुड की -
 1. देवानंद – तीन दिसंबर को लंदन में बालीवुड के सदाबहार अभिनेता देवानंद ने 88 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। 
2. भूपेन हजारिका – ( पांच नंवबर ) बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वे असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे
जानकार भी रहे थे। वे भारत के ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्हें दक्षिण एशिया के
श्रेष्ठतम जीवित सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता है। उन्होंने
कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया। भूपेन हजारिका के गीतों ने लाखों दिलों को छुआ। हजारिका की असरदार आवाज में जिस किसी ने उनके गीत "दिल हूम हूम करे" और "ओ गंगा तू बहती है क्यों" सुना वह इससे इनकार नहीं कर सकता कि उसके दिल पर भूपेन दा का जादू नहीं चला।

3. जगजीत सिंह – 10 अक्टूबर को गजल की मखमली आवाज नहीं रही। देश भर में लाखों फैन उनके जाने से निराश हैं। 
4. शम्मी कपूर – 14 अगस्त। फिल्म जंगली का गीत याहू काफी लोकप्रिय हुआ। हर उम्र के लोगों के पसंदीदा एक्टर रहे। 
5. नवीन निश्चल – 19 मार्च को टीवी और फिल्मों के जाने माने कलाकार नवीन निश्चल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 65 साल के थे।  निश्चल अपने करीबी मित्र रंधीर कपूर के साथ पुणे रवाना हुए थे। वह
अभी मध्य मुंबई ही पहुंचे थे कि निश्चल को दिल का दौरा पड़ा। उन्हें पास
के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। 
6. जगमोहन मूंदड़ा – ( 5 सितंबर 2011 ) फिल्मकार जगमोहन मूंदड़ा का निधन हो गया। वह 62 वर्ष के थे। मूंदड़ा ने 'बवंडर' एवं 'प्रोवोक्ड' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया था।
7. मणि कौल – 6 जुलाई 2011 फिल्म निर्माता और लेखक

8. बालेश्वर यादव - भोजपुरी गायक - 9 जनवरी 2011, बालेश्वर के गीत बड़े लोकप्रिय हुए और भोजपुरी जन मानस पर व्यापक प्रभावकारी रहे। एलपी रिकार्ड के जमाने में बालेश्वर के रिकार्ड खूब बिकते और बजते थे।
9. मंसूर अली खान पटौदी- महान क्रिकेटर और टीम इंडिया के कैप्टन रहे
मंसूर अली खान पटौदी अक्टूबर में हमे छोडकर चले गए। उन्होने बालीवुड की अपने समय की सबसे खूबसूरत हीरोइन शर्मिला टैगोर से शादी की थी। पटौदी के बेटे सैफ अली खान और सोहा अली भी फिल्मों में हैं।


10.सत्यदेव दूबे ( 25 दिसंबर ) - मशहूर रंगमंच निर्देशक, अभिनेता और पटकथा लेखक सत्यदेव दुबे का रविवार को मुंबई में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सत्यदेव दूबे का जन्म हुआ था।  
11. मकबूल फिदा हुसैन  ( 9 जून ) को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1973 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। महाराष्ट्र के पंढ़रपुर में 17 सितंबर 1915 को जन्मे हुसैन का 9 जून 2011 को लंदन में निधन हुआ.
साहित्य पत्रकारिता
1. जानकी वल्लभ शास्त्री ( मुजफ्फरपुर , बिहार ) हिंदी संस्कृत के
प्रकांड विद्वान जानकी वल्लभ शास्त्री 8 अप्रैल 2011 को नहीं रहे।
उन्होने लंबा और स्वस्थ जीवन जीया।
2. डा. फजलुर रहमान हाशमी - 21जुलाई साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भवानंदपुर निवासी डा. फजलुर रहमान हाशमी का निधन। साल 2002 में हाशमी को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।

3. अतुल सवानी - गुजराती लेखक - नहीं रहे - 10 नवंबर को मशहूर प्रगतिशील गुजराती लेखक और समाजसेवी अतुल सवानी का रूस की राजधानी मास्को के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे।
4. श्री लाल शुक्ल ( 28 अक्टूबर ) साहित्यकार – राग  दरबारी से चर्चित।
श्रीलाल शुक्ल का जन्म उत्तर प्रदेश में सन् 1925 में हुआ था तथा उनकी
प्रारम्भिक और उच्च शिक्षा भी उत्तर प्रदेश में ही हुई। उनका पहला
प्रकाशित उपन्यास 'सूनी घाटी का सूरज' (1957) तथा पहला प्रकाशित व्यंग 'अंगद का पाँव' (1958) है। स्वतंत्रता के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत दर परत उघाड़ने वाले उपन्यास 'राग दरबारी' (1968) के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके इस उपन्यास पर एक दूरदर्शन-धारावाहिक का निर्माण भी हुआ। श्री शुक्ल को भारत सरकार ने 2008 मे पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया ।

 5. डाक्टर कुमार विमल – ( 26 नवंबर ) पटना में हिंदी के जाने माने आलोचक का निधन
6. इंदिरा गोस्वामी ( गुवाहाटी 29 नवंबर)  - असमिया की साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता।
7. अतुल माहेश्वरी – (3 जनवरी, पत्रकार)  अतुल जी 55 साल के थे। बावजूद इसके उनका 37 वर्षों का मीडिया का गहरा अनुभव उन्हें एक अलग ही श्रेणी में लाकर खड़ा करता है।  राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट अतुल माहेश्वरी ने अमर उजाला को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री के गुर अपने पिता और अमर उजाला के संस्थापक स्वर्गीय श्री मुरारीलाल माहेश्वरी से बरेली में सीखा। इसके बाद वे 1986 में मेरठ संस्करण स्थापित करने के लिए मेरठ चले गए। उन्होंने अमर उजाला पब्लिकेशन का चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में भी विस्तार किया। श्री अतुल माहेश्वरी मीडिया इंडस्ट्री से संबद्ध अन्य संस्थानों से भी जुड़े थे और साथ ही वैश्विक मीडिया इंडस्ट्री पर गहरी पकड़ रखते थे।

8. घनश्याम पंकज, ( 24 जनवरी ) – पत्रकार। दिनमान टाइम्स, स्वतंत्र भारत समेत कई अखबारों के संपादक रहे। बड़ी संख्या में नए पत्रकारों को ब्रेक दिया था। बेटे कबीर कौशिक फिल्म निर्माता हैं।
9. राम दयाल मुंडा - 1 अक्टूबर को रांची में निधन।  पद्म श्री से
सम्मानित और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य तथा झारखंड के संस्कृति वाहक डा. रामदयाल मुंडा का आज लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया।
10. मारियो मिरांडा – ( 12 दिसंबर, कार्टूनिस्ट ) जिंदगी के विभिन्न
रंगों को अपने कैनवास पर जीवंतता के साथ उकरने वाले चर्चित कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा अपनी जिंदगी के कैनवास से ओझल हो गए। लम्बी बीमारी के बाद मिरांडा कागोवा के लौटोलिम स्थित 300 वर्ष पुराने उनके पैतृक  घर में निधन हो गया।

10. सत्य साईं बाबा - 24 अप्रैल - पुट्टपर्थी के सत्य साईं
बाबा के का निधन। साईं बाबा के देश विदेश में करोड़ो भक्त हैं।
11. महेंद्र सिंह टिकैत-  के किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत का निधन - 15 मई 2011...किसी जमाने में यूपी की राजनीति में टिकैत की तूती बोलती थी।
12. 25 नवंबर 2011 - किशनजी ( कोटेश्रर राव ) माओवादी नेता को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया।

13. एस बंगारप्पा  ( 26 दिसंबर ) कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा का सोमवार तड़के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे । उनके पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। 79 वर्षीय बंगारप्पा के परिवार में उनकी पत्नी दो बेटे तथा तीन बेटियां हैं । गुर्दे संबंधी बीमारी और मधुमेह से पीड़ित बंगारप्पा का सात दिसंबर से इलाज चल रहा था। 
विदेश
1. ओसामा बिन लादेन – लादेन को पाकिस्तान में अमेरिका सेना ने मार
गिराया। अमेरिका के लिए बड़ी सफलता।

2. कर्नल मुअम्मर गद्दाफी- लीबीया के तानाशाह - कर्नल मुअम्मर गद्दाफी को विद्रोहियो ने मार डाला। गद्दाफी ने लंबे समय तक शासन किया।
 3. किम जोंग इल – उत्तर कोरिया के तानाशाह शासनाध्यक्ष का निधन 20 दिसंबर को 69 साल की उम्र में हो गया। लादेन, गद्दाफी, और किम की मौत अमेरिका के लिए बहुत फायदेमंद रही। क्योंकि तीनों ही अमेरिका के लिए खतरा थे।
4 स्टीव जॉब्स  ( 5 अक्टूबर ) एप्पल के संस्थापक। एक ऐसा सख्श जिसका दुनिया को बदलने में बड़ा योगादन रहा। - स्टीवन पॉल "स्टीव" जाब्स एक अमेरिकी बिजनेस टाईकून और आविष्कारक थे। वे एप्पल इंक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। अगस्त २०११ में उन्होने इस पद से त्यागपत्र दे दिया। जाब्स पिक्सर एनीमेशन स्टूडियोज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहे। सन 2006 में वह दी वाल्ट डिज्नी कम्पनी के निदेशक मंडल के सदस्य भी रहे, जिसके बाद डिज्नी ने पिक्सर का अधिग्रहण कर लिया था। 1995 में आई फिल्म टॉय स्टोरी में उन्होंने बतौर कार्यकारी निर्माता काम किया।


5. नुसरत भुट्टो - 24 अक्टूबर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जुल्फिकार
अली भुट्टो की पत्नी एवं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की मां नुसरत
भुट्टो का लंबी बीमारी के बाद दुबई में निधन ।

6. हरगोविंद खुरानाभारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक, हालांकि कि खुराना विदेश में रहते थे। भारत की नागरिकता छोड़ दी थी लेकिन उनका विज्ञान जगत को योगदान हमेश याद किया जाएगा।
7. श्वेतलाना – स्टालिन की बेटी। नवंबर की एक सुबह गुमनाम मौत। भारत में कलाकांकर के राजा ब्रजेश सिंह से किया था तीसरा विवाह। पति की मौत के बाद भारत आई थीं लेकिन भारत सरकार ने शरण नहीं दी थी। तब समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने ये मुद्दा संसद में उठाया था। उन्होंने श्वेतलाना को भारत की बेटी कहते हुए उसे भारत में शरण देने की मांग की थी। लेकिन तब रूस के नाराज होने के कूटनीतिक कारणों से भारत सरकार ने श्वेतलाना को पनाह नहीं दी थी। अब 2011 की एक सुबह श्वेतलाना ने 85 साल की उम्र में चुपके से दुनिया को अलविदा कह दिया।

- जाते हुए साल को अलविदा...

Wednesday, 21 December 2011

अब फांट की समस्या हुई खत्म



अब आप हिंदी के इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड से ही चाणक्या और कृतिदेव जैसे फांटमें टाइप कर सकते हैं। इसके लिए आपको पुराना और मुश्किल कीबोर्ड ले आउट सीखने की जरूरत नहीं है। इसे आसान कर दिखाया है हिंदी के युवा और क्रांतिकारी साफ्टवेयर  डेवलपर श्रीश जी ने। आप इस लिंक पर जाएं। वहां आईएमई ( इनपुट मेथड एडिटर ) डाउनलोड करें। साथ ही आपको हर समस्या का समाधान भी मिलेगा। इस पुनीत कार्य के लिए श्रीश जी को धन्यवाद और आर्थिक सहायता ( डोनेशन ) भी दे सकते हैं क्योंकि यमुनानगर में शिक्षक श्रीश ये कार्य बिल्कुल निशुल्क कर रहे हैं। हिंदी के लोगों को उनका उत्साह वर्धन करना चाहिए।


http://epandit.shrish.in/labs/ePanditIME/


- विद्युत प्रकाश मौर्य 

विंडो एक्सपी में हिंदी इंस्टाल करना



विंडो एक्सपी में हिंदी इंस्टाल करना
बिना सीडी के, कभी भी कहीं भी....
डाउनलोड के लिए सीधा इस लिंक को खोलें वहां दो विकल्प हैं उन्हें डाउनलोड करें....

इण्डिक ऍक्सपी विण्डोज़ में स्वचालित रुप से हिन्दी/इण्डिक समर्थन सक्षम करने हेतु औजार है। विण्डोज़ २००० या ऍक्सपी वाले कम्प्यूटर में हिन्दी (अथवा अन्य भारतीय भाषाओं) में काम करने के लिये पहला काम हमें ये करना पड़ता है कि कण्ट्रोल पैनल में जाकर कॉम्प्लैक्स स्क्रिप्ट के लिये सपोर्ट (जिसे प्रचलित भाषा में इण्डिक सपोर्ट कहते हैं) इंस्टाल करना पड़ता है। इसमें कई मुश्किलें हैं, यह प्रक्रिया थोड़ी लम्बी है, कई विण्डो से होकर गुजरना पड़ता है। नये तथा गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि वाले प्रयोक्ता को यह मुश्किल भी मालूम पड़ती है तथा चरण याद नहीं रहते। इसके अतिरिक्त इस कार्य के लिये विण्डोज़ सीडी की आवश्यकता पड़ती है, कई बार सीडी न होने पर आप असहाय हो जाते हैं खासकर किसी दूसरे कम्प्यूटर पर कार्य करते समय।
ज्यादा जानकारी के लिए  इस लिंक पर जाएं...

इण्डिक ऍक्सपी इस प्रक्रिया को आसान बनाता है। बिना सीडी की जरुरत के केवल दो क्लिक द्वारा इण्डिक समर्थन सक्षम किया जा सकता है। इसके अलावा यह विण्डोज़ की लैंग्वेज हॉटकी को CTRL+SHIFT पर शिफ्ट कर देता है जो कि डिफॉल्ट संयोजन ALT+SHIFT की तुलना में बेहतर होती है। सब कुछ स्वचालित रुप से होता है, किसी लम्बी मैनुअल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं। इंस्टालेशन के बाद बस एक बार कम्प्यूटर रीस्टार्ट करना पड़ता है।
 ( साभार – इ पंडित ) 

Monday, 19 December 2011

यूनीकोड कनवर्टर

कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग में अक्सर यूनीकोड से टीटीएफ ( कृतिदेव ) या फिर एटीएम ( चाणक्या) कनवर्टर की जरूरत पड़ती है। इसके लिए आप आफ लाइन कनवर्टरों का इस्तेमाल कर सकते हैं। मुख्य रूप से दो तरह के आफलाइन कनवर्टर हैं एक यूनीकोड टू चाणक्या और दूसरा यूनीकोड टू कृतिदेव। जिनसे हिंदी में आपका काम चल सकता है।  



हिंदी कैसे लिखें

हिंदी फांट्स को लेकर कई लोगों को परेशानी आती है। हिंदी फांट्स के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इस साइट पर जाएं। यहां आपको फांट कनवर्टर आदि के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी।

https://sites.google.com/site/technicalhindi/home/fonts



फॉण्ट

देवनागरी के फॉण्ट दो प्रकार के हैं। एक तो पुराने लिगेसी नॉन-यूनिकोड फॉण्ट दूसरे यूनिकोड फॉण्ट।
यूनिकोड फॉण्ट
विण्डोज़ का डिफॉल्ट हिन्दी फॉण्ट मंगल होता है। इसके अलावा विण्डोज़ विस्टा/७  में अपराजिताकोकिला तथा उत्साह नामक फॉण्ट सम्मिलित हैं। इसके अलावा विण्डोज़ के ऍरियल यूनिकोड ऍमऍस नामक फॉण्ट में हिन्दी सहित संसार की सभी यूनिकोडित भाषा लिपियों के वर्ण-चिह्न शामिल हैं।  देवनागरी यूनिकोड के शुद्ध प्रदर्शन हेतु संस्कृत २००३ नामक फॉण्ट सबसे अच्छा है।
नॉन-यूनिकोड फॉण्ट
ये पुराने ८-बिट फॉण्ट हैं जो कि यूनिकोड मानक के प्रचलन से पहले प्रयोग किये जाते थे। वर्तमान में इनका उपयोग मुख्यतः ग्राफिक्स तथा छपायी के कार्यों हेतु ही किया जाता है। नॉन-यूनिकोड फॉण्टों में टाइप करने हेतु ई-पण्डित आइऍमई नामक औजार उपलब्ध है।

कुछ प्रचलित नॉन-यूनिकोड फॉण्ट हैं -
कृतिदेव - यह ग्राफिक्स के कार्यों में बहुधा प्रयोग होता है। इस शृंखला के कई फॉण्ट हैं जिनका कीबोर्ड लेआउट तथा कैरैक्टर मैप समान है। इस शृंखला के दो मुफ्त फॉण्ट कृतिदेव 010 तथा कृतिदेव 011 यहाँ से डाउनलोड करें।
चाणक्य - यह फॉण्ट मुख्यतः समाचार पत्रों के प्रकाशन हेतु प्रयोग होता है। इसके अतिरिक्त पुस्तकों के प्रकाशन हेतु भी इसका उपयोग होता है। दैनिक भास्कर आदि विभिन्न समाचार पत्रों ने इसके आधार पर अपने फॉण्ट तैयार करवाये हैं जिनका कैरैक्टर मैप इसके जैसा ही है।
डाउनलोड करें

वॉकमैन-चाणक्य - यह फॉण्ट दिखने में काफी हद तक चाणक्य जैसा होता है लेकिन कैरैक्टर मैप बिलकुल अलग होता है। यह भी पुस्तकों के प्रकाशन में प्रयुक्त होता है। इसके तीन वैरियेंट हैं - 901, 902 तथा 903
वॉकमैन-चाणक्य (901) यहाँ से डाउनलोड करें।
फॉण्ट परिवर्तक

विण्डोज़ प्रोग्राम
  • ई-पण्डित कन्वर्टर - आसान एवं बहुसुविधा युक्त यूनिकोड <==> लिगेसी परिवर्तक। फिलहाल इसमें केवल चाणक्य फॉण्ट हेतु परिवर्तक उपलब्ध है। अधिक जानकारी यहाँ पढ़ें।
ब्राउजर आधारितये वेब ब्राउजर में चलने वाले प्रोग्राम हैं जिन्हें किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम पर प्रयोग में लाया जा सकता है। इन्हें सेव करके ऑफलाइन भी प्रयोग किया जा सकता है। वाँछित कन्वर्टर को खोजने हेतु Ctrl+F दबाकर खोज बक्से में फॉण्ट का नाम लिखें।
वर्ड मैक्रो
ओपनऑफिस/लिब्रेऑफिस मैक्रो
लिपि परिवर्तक

Tuesday, 13 December 2011

हिंदी लिखना आसान

अगर कोई व्यक्ति रोमन में हिंदी लिखता है तो उसे ये लिंक भेजें। 
इसमें रोमन में लिखी स्क्रिप्ट हिंदी मंगल में बदल जाती है।
इसके विंडो पर सीधे रोमन में हिंदी लिखी भी जा सकती है
 जो साथ साथ हिंदी यूनीकोड फांट में बदलती रहती है। 
ये बड़ा ही मजेदार और उपयोगी है। 
ये उन लोगों को लिए मददगार है जिनके कंप्यूटर में
 यूनीकोड हिंदी फांट सक्रिय नहीं है या फिर वे 
इनस्क्रिप्ट की बोर्ड पर टाइपिंग नहीं जानते। 

विद्युत प्रकाश 

Monday, 12 December 2011

सौ साल का दर्द


भले ही दिल्ली ने राजधानी के रूप में सौ साल पूरे कर लिए हों लेकिन दिल्ली सौ साल के इस सफर में कई तरह के खतरों में जी रही है। दिल्ली देश की राजधानी है कुछ लोग इसे दुनिया की चंद खूबसूरत राजधानियों में शुमार करते हैं लेकिन दिल्ली के तस्वीर का दूसरा पहलू भी है जो कम लोगों को दिखाई देता है। इस पहलू में कई तरह के दर्द समेटे है दिल्ली। सबसे पहला दर्द है दिल्ली की बढ़ती आबादी का। आज दिल्ली की आबादी एक करोड़ 60 लाख के पार कर चुकी है। दिल्ली आबादी में दुनिया के पांच बड़े शहरों में है। लेकिन इस बढ़ती आबादी के लिए दिल्ली में हवा, पानी, धूप, अनाज और सड़कें नहीं हैं। पानी और दाना तो दिल्ली के लोग दूसरे राज्यों से मंगा कर पेट भरते हैं। लेकिन दिल्ली की सड़कें भी बढ़ती आबादी का बोझ सह पाने में सक्षम नहीं है।
जहां दिल्ली में चाणक्यापुरी जैसे खूबसूरत मुहल्ले हैं तो उसी साउथ दिल्ली में संगम विहार जैसा स्लम इलाका भी है। सिर्फ संगम विहार ही क्यों दिल्ली की असली तस्वीर देखनी हो तो लोगों को नांगलोई, बुराड़ी, सादतपुर, भजनपुरा, सीलमपुर, मौजपुर, करावलनगर के मुहल्ले भी देखने चाहिए। साल 2011 की जनगणना में उत्तर पूर्वी दिल्ली को देश का सबसे घनी आबादी वाला इलाका माना गया है। इसमें प्रति वर्ग किलोमीटर सबसे ज्यादा लोग रहते हैं। मतलब साफ है कि दिल्ली की 40 फीसदी आबादी को हवा, धूप, पानी और इंसानों लायक का खाना भी उपलब्ध नहीं है। जाहिर है आधी दिल्ली जानवरों का सा जिंदगी जीने को मजबूर है। ये सब उस दौर में हो रहा है जब दिल्ली में मेट्रो दौड़ रही है और सिविक सेंटर जैसी ऊंची इमारते बन रही हैं। लेकिन तस्वीर के दूसरे रूख में बहुत अंधेरा है। ये अंधेरा दिल्ली के पुराने गांव में भी है। दक्षिण दिल्ली में पिलंजी, कोटला मुबारकपुर, सनलाइट कालोनी, मस्जिद मोठ, मुनिरका, शाहपुर जट जैसे गांव है जहां कई घरों में हवा धूप भी नहीं आती।
आज दिल्ली का जो विस्तार है वह सिर्फ लुटियन दिल्ली तक नहीं है जो सुंदर दिखती है। लेकिन दिल्ली के इस बेतरतीब विकास के लिए जिम्मेवार कौन हैं। जाहिर है सौ साल की दिल्ली के विकास के लिए कभी ठीक से टाउन प्लानिंग नहीं की गई जिसका नतीजा है आबादी की ये विस्फोट। दिल्ली में आरके पुरम, आनंद विहार, विवेक विहार जैसी प्लांड कालोनियां बनी। रोहिणी, द्वारका जैसे उपनगर बने, लेकिन साथ ही साथ बड़ी संख्या में अवैध कालोनियां भी बनती गईं। क्योंकि हमने गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के आवास के लिए तो कभी इमानदारी से सोचा भी नहीं। भला दिल्ली के चाय वाले पान वाले खोमचे वाले, माली, चौकीदार, सफाईवाले कहां रहेंगे। हमने उनके लिए पर्याप्त घर कभी बनाए ही नहीं। लिहाजा ऐसी कालोनियां बनती गईं शहर के लिए समस्या बन गईं।
सौ साल की दिल्ली में आज हमारे पास गर्व करने लायक कुछ चीजें हैं तो उससे ज्यादा ऐसी समस्याएं हैं जो दिल्ली के लिए कभी भी मुश्किल खड़ा कर सकती हैं। अगर भूकंप आया तो तबाह हो जाएगी दिल्ली। आग लगने पर कई इलाकों में फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकती। पर्याप्त हवा, पानी नहीं मिलने और गंदगी के कारण दिल्ली में डेंगू जैसी बीमारियां फैलती हैं। आज आप एक लखनऊ, चंडीगढ़, भोपाल, जयपुर जैसे मध्यमवर्गीय शहर में रहने वाले से बात करें तो वह खुद को दिल्ली से ज्यादा बेहतर सुविधाओं में खुद को पाता है।
अगर दिल्ली सिर्फ राजधानी के रूप में विस्तार पाती तो हमारे पास इतनी समस्याएं नहीं होतीं। दिल्ली के साथ सबसे बड़ी दिक्कत है दिल्ली भारी संख्या में ऐसे उद्योग हैं जो दिल्ली के बजाए किसी दूसरे शहर में होते तो राष्ट्रीय राजधानी पर आबादी का इतना बड़ा बोझ नहीं होता। कभी दिल्ली के सियासतदां ये आरोप लगाते हैं कि बाहर से आए लोग दिल्ली पर बोझ बने हैं लेकिन बाहर के लोगों के बिना दिल्ली काम भी नहीं चल सकता। आज दिल्ली सौ साल की हो गई है। अब एक मौका है कि हम दिल्ली के पुराने गौरव कैसे बनाए और बचाए रख सकें इसके लिए गंभीरता से सोचा जाए। राजधानी के सौंदर्य को बचाए रखने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जाएं। ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या है लेकिन सिर्फ पार्किंग शुल्क महंगा कर देने भर से ट्रैफिक की समस्या खत्म नहीं हो सकेगी। इसका सबसे अच्छा तरीका हो सकता है कि दिल्ली से आबादी को दूसरे शहरों की ओर मोड़ने का। चरणबद्ध तरीके से दिल्ली के उद्योगों को दिल्ली से हटाकर दूसरे शहरों में भेजा जाए। इससे शहर में बढ़ती आबादी पर रोक लग सकेगी। राजधानी के अलावा बहुत सारे केंद्रीय दफ्तरों को भी दूसरे शहरों में शिफ्ट किया जा सकता है। अगर समय रहते शहर को बचाने के लिए जरूरी उपाय नहीं किए गए तो हो सकता है कि हम दिल्ली के डेढ सौ साल या दो सौ साल नहीं मना सकें। वैसे भी दिल्ली का इतिहास कई बार उजड़ने और बसने का रहा है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य