Tuesday, 13 February 2007

एक देश एक रेट

भारत संचार निगम लि. यानी बीएसएनएल लेकर आ रहा है एक देश एक रेट का प्लान। देश की सरकारी टेलकाम कंपनी की इस घोषणा से पहले ही दूसरी अन्य कंपनियों ने एक देश एक रेट के बारे में सोचना आरंभ कर दिया है। इसी क्रम में रिलायंस ने एक देश एक रेट प्लान की घोषणा जनवरी 2006 में ही कर दी। हालांकि उसकी यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है क्योंकि उसने यह योजना मंहगे रेंटल प्लान के साथ आफर की है। पर बीएसएनएल यह योजना सबके लिए लेकर आ रहा है। इसमें दुनिया के कुछ अन्य देशों की तरह ही पूरे देश में एक काल रेट की योजना है। यानी की एसटीडी का बैरियर ही खत्म। कश्मीर से कन्या कुमारी तक सारा देश एक है तो आप एक ही रेट पर फोन भी कर सकेंगे। इस योजना के बाद आपके मोबाइल या लैंडलाइन फोन पर एसटीडी काल का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। अगर आप कोई फोन लेते हैं तो अब अलग से एसटीडी की सेक्यूरिटी जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाएगी। इससे टेलकाम सर्किल के बैरियर खत्म हो जाएंगे।
वास्तव में भारत के टेलीकाम इतिहास में एक नए युग की शुरूआत हो रही है एक देश एक रेट के इस इंडिया वन योजना के साथ। हम 24 रुपए प्रति मिनट से सीधे एक रुपए प्रति मिनट की दर पर आ रहे हैं। यह आम आदमी के लिए अत्यंत लाभकारी योजना है। एक आकलन के अनुसार बीएसएनल को इससे एक साल मे 5000 करोड़ का घाटा उठाना पड़ेगा। पर उम्मीद किया जा सकता है कि कालों की संख्या बढ़ने के साथ इस घाटे की भरपाई हो सकेगी।
एसटीडी कोडों की पुनर्संरचना हो-
एक देश एक रेट के बाद वास्तव में फोन नंबर के साथ एसटीडी कोड का कोई मतलब नहीं रह जाना चाहिए। मोबाइल फोन नंबर की तरह ही देश भर के सभी फोन नंबरों को भी 10 अंको का करके एसटीडी कोड की व्यवस्था ही खत्म की जानी चाहिए। हालांकि पिछले दिनों एक सुझाव आया था जिसमें देश भर के 2700 एसटीडी कोडों की जगह 300 एसटीडी कोड रखने की बात चल रही थी। पर हम मोबाइल फोनों की तरह एसटीडी कोड व्यवस्था खत्म भी कर सकते हैं। आपको कहीं का नंबर भी मिलना हो तो इस व्यवस्था के तहत 10 अंकों इसके साथ ही ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए कि आप कहीं भी जाएं आपका फोन नंबर वही पुराना चलता रहे। यानी शहर बदलने के बाद भी फोन नंबर नहीं बदले। इसके साथ ही पूरे देश में रोम करने वालों को न तो कोई रोमिंग शुल्क देना होगा न ही रोमिंगे दौरान किसी तरह की इनकमिंग काल की शुल्क देनी होगी। यहां तक की रोमिंग के दौरान आउटगोइंग काल करने पर भी लोकल काल जैसा ही शुल्क देना होगा। इतना सब कुछ होने के बाद ही एक देश एक रेट का सपना सही मायने में साकार हो सकेगा।
-माधवी रंजना, madhavi.ranjana@gmail.com