Wednesday, 25 July 2007

आइटम गर्ल और पब्लिसटी

आइटम गर्ल राखी सावंत रातोंरात चर्चा में आ गईं। बवाल उनकी ड्रेस को लेकर था। पुलिस ने एक मामला दर्ज किया कि महाराष्ट्र एक शहर में शो के दौरान उन्होंने जो ड्रेस पहनी थी वह भड़कीली थी। इस मुकदमे का कुछ फैसला हो न हो पर राखी सावंत को इस मामले से खूब प्रचार मिला। वे सभी प्रमुख समाचार चैनलों पर इंटरव्यू देती हुईं नजर आईं, जिसमें वे खुद के बोल्ड और बिंदास होने की सबूत पेश कर रही थीं। समाचार चैनलों को एक बिकाउ मसाला मिल गया था तो राखी सावंत को टीवी स्क्रीन पर लंबी लंबी कवरेज मिल रही थी। दोनों खुश थे। जाहिर है इसका काफी हद तक फायदा राखी को मिला। उनके के आगे के दो शो भी हंगामेदार रहा। लोगों ने उन्हें देखने के लिए महंगी दरों पर टिकटे खरीदीं।



बालीवुड में आईटम गर्ल का कांस्पेट कुछ साल में ही आया है। अक्सर किसी फिल्म में एक तड़क-भड़क वाला गाना रखा जाता है। इस गाने पर आमतौर पर फिल्म की हीरोइन नाचने को तैयार नहीं होती तो किसी अन्य अभिनेत्री को यह काम सौंपा जाता है। यह गाना काफी हद तक कैबरे जैसा होता है। किसी जमाने में फिल्मों में हेलन, मधुमती और कल्पना अय्यर जैसी अभिनेत्रियां यह काम करती थीं। पर आजकल फिल्म इंडस्ट्री में आइटम गर्ल की बहार आई हुई है। राखी सावंत, मेघना नायडु, कश्मीरा शाह, अर्चना मौर्य जैसे कई नाम हैं।
बकौल राखी सावंत उनके अंदर एनीमल इंस्टीक्ट है। उन्हें बोल्ड कपड़े पहनना और खुलकर नाचना अच्छा लगता है। उन्हें जिस्म दिखाने में कोई गुरेज नहीं है। हालांकि वे यह भी बताती हैं कि वे एक परंपरागत मराठी परिवार से आती हैं। राखी के अनुसार ऐश्वर्य राय जैसी अभिनेत्रियों को आइटम सांग नहीं करना चाहिए। उन्होंने किसी फिल्म में ऐसा करके आइटम गर्ल्स के पेट पर लात मार दी है।
दरअसल अब फिल्म इंडस्ट्री में ऐसी अभिनेत्रियों की बड़ी फेहरिस्त आ रही है जो सिर्फ नाचकर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। ऐसी आइटम गर्ल्स के बीच काम पाने की और पब्लिसिटी पाने को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में राखी सावंत पर हुए मुकदमे ने उन्हें प्रचार के क्षेत्र में अचानक काफी माइलेज दिया है। जो लोग आइटम गर्ल्स के बारे में नहीं जानते वे भी जानने लगे हैं। बिना किसी पीआर प्लानिंग के और मीडिया मैनजमेंट के हर टीवी चैनल पर उनका इंटरव्यू प्रसारित किया जा रहा है। हो सकता है कि राखी सावंत के पीआर मैनेजर ने ऐसे मुकदमे जानबूझ कर ही करवाए हों जिससे उन्हें देशव्यापी पब्लिसिटी मिल जाए। ऐसी आइटम बालाएं कैमरे के सामने जानबूझ कर ऐसे संवाद बोलती हैं जिससे उन्हें प्रचार मिले। जैसे राखी का कहना कि मेरे अंदर जानवरों जैसी बात है, ऐश्वर्य ने मेरे पेट पर लात मारी है आदि आदि। मेघना नायडु ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि एक शो के दौरान जब ग्रीन रूम में वे कपड़े बदल रही थीं तो उन्हें लगा कि कोई सुऱाख करके उन्हें देखे की कोशिश कर रहा है। हमें आइटम बालाओं के दिमाग भी दाद देनी चाहिए कि वे अपनी मार्केटिंग किस चतुराई से कर रही हैं।
राखी सावंत ने ऐसी घटनाओं के बाद कथित तौर पर अपनी सामाजिक जिम्मेवारी का एहसास करते हुए कहा कि वे अब साड़ी पहन कर मंच पर कार्यक्रम देंगी। पर क्या साड़ी पहनने के बाद वे उत्तेजक भाव भंगिमाएं नहीं पेश करेंगी। बार बालाएं भी तो साड़ी पहनकर ही नाचती हैं।
-विद्युत प्रकाश vidyutp@gmail.com



Saturday, 14 July 2007

बच्चों के बदलते खिलौने

मैं तो चांद खिलौना लूंगा। अब यह कहावत पुरानी पड़ चुकी है। बच्चे बदलते जमाने के साथ नए ढंग के खिलौने के संग खेलना चाहते हैं। अब उन्हें मिट्टी की गाड़ी देकर बहलाया नहीं जा सकता। आजकल छोटे बच्चों में मोबाइल फोन खिलौने के रूप में काफी लोकप्रिय हो रहा है। गांवों में और खासतौर पर पुराने समय में बच्चों के बीच मिट्टी का खिलौना काफी लोकप्रिय होता था। बच्चों को मिट्टी की बनी हाथी मिट्टी के बने घोड़े आदि खेलने के लिए दिए जाते थे। खिलौने बनाने वाला कुम्हार इन्हें आकर्षक रंगों से रंग भी देता था। ये मिट्टी के खिलौन पटकने पर टूट जाते थे। खिलौने के टूटने पर बच्चा रुठ जाता है। किसी शायर ने लिखा है-
और ले आएंगे बाजार से जो टूट गया, चांदी के खिलौने से मेरा मिट्टी का खिलौना अच्छा।

मिट्टी और लकड़ी का गया दौर - पर अब मिट्टी की जगह प्लास्टिक के बने खिलौनों ने ले ली है। ये खिलौने जल्दी टूटते भी नहीं हैं। बीच में लकड़ी के बने खिलौनों का भी दौर रहा। अभी भी भारत के कुछ शहरों में बच्चों के लिए लकड़ी के बने खिलौने मिलते हैं। खिलौने के इस बदलते स्वरुप के साथ बच्चों की मांग भी बदलती जा रही है। पहले बच्चे मिट्टी के हाथी मांगने की जिद करते थे। हाथी मिल जाए तो मिट्टी का गुल्लक मांगते थे। आसमान में चंदा मामा को देखर बच्चे चांद को खिलौने के रुप में मांगने की जिद पर भी आ जाते थे। मैं चांद खिलौने लेहों यह कहावत बहुत मशहूर हुआ। पर अब यह कहावत नए रुप में कही जानी चाहिए- मैं मोबाइल खिलौना लेहों....अब बड़ों के पास हर जगह हाथों में मोबाइल देखकर बच्चे मोबाइल फोन को ही खिलौने के रुप में मांगते हैं। बाजार चीन के बने हुए मोबाइल खिलौने से पटा पड़ा है। बीस रुपए में मिलने वाले मोबाइल खिलौने में बैटरी भी लगी होती है। इसमें कई तरह के रिंग टोन भी होते हैं। बिल्कुल असली मोबाइल के तरह ही। इसे देखकर बच्चे को अपने पास असली मोबाइल होने का भ्रम होता है। जो बजते बजते बैटरी खत्म हो गई तो बैटरी बजल डालिए। पर छोटा सा बच्चा अपने गले मोबाइल फोन देखकर गर्वान्वित महसूस करता है।

उम्र के अनुरूप दें खिलौने - वैसे बाजार में बच्चों की उम्र के हिसाब से कई तरह के खिलौने मौजूद हैं। कई खिलौना कंपनियां बच्चों की उम्र और उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले दिमाग को ध्यान में रखकर खिलौने बनाती हैं। जैसे नन्हें बच्चों को रंग पहचानने वाले खिलौने दिए जाते हैं। बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो उसे गिनती गिनने वाले खिलौने दिए जाते हैं। बच्चों को जानवरों और फलों की पहचान कराने के लिए उनकी प्रतिकृति खिलौने के रुप में दी जाती है। जब आप बाजार में अपने बच्चे के लिए खिलौने खरीदने जाएं तो उनकी उम्र का ख्याल रखें और उसके अनुरूप ही खिलौने लाकर उन्हें दें। इसके साथ ही बच्चों के साथ बैठकर उन्हें खिलौने के संग खेलना भी सीखाएं।

छोटे बच्चों को बहुत बड़े आकार के खिलौने न दें। कई बार बच्चे इस तरह के खिलौने से डर जाते हैं। बच्चों को ऐसे खिलौने ही दें जिन्हें वे अपना दोस्त समझें न कि उनके मन में किसी तरह का डर बैठ जाए। बच्चे म्यूजिकल खिलौने भी पसंद करते हैं। आप उनकी रुचि को समझकर ऐसा कोई चयन कर सकते हैं। आप अपने बच्चे की पसंद नापसंद का सूक्ष्मता से अध्ययन करें। उसके अनुरूप ही उसके लिए खिलौनों का चयन करें तो बेहतर होगा।
-माधवी रंजना madhavi.ranjana@gmail.com