Saturday, 29 March 2008

मतदाताओं को मिले पेंशन

जरा सोचिए आपको वोट डालने के बदले में पेंशन दिया जाए तो कैसा लगेगा। यह प्रस्ताव है एक राजनैतिक दल का। राष्ट्रीय समानता दल जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष मोतीलाल शास्त्री हैं उनका मानना है कि देश के हर मतदाता को 1750 रुपये मासिक की दर से मतदाता पेंशन मिलना चाहिए। शास्त्री जी का मानना है कि इस तरह के पेंशन से भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकेगा। साथ ही आम जनता की प्रजातंत्र में भागीदारी बेहतर ढंग से हो सकेगी।
मतदाता को पेंशन यह बात सुनने में कुछ अटपटी लगती है, पर है बहुत रूचिकर...राष्ट्रीय समानता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोतीलाल शास्त्री कहते हैं कि दुनिया के कुछ देशों में इस तरह के पेंशन दिए जाने का प्रावधान भी है।

कई योजनाओं में भ्रष्टाचार- शास्त्री जी के अनुसार स्कूलों में मिड डे मील और पोलियो उन्मूलन अभियान जैसी योजनाओं पर सरकार हजारों करोड़ रुपये पानी में बहा रही है। मिड डे मिल तो बच्चों को एक तरह से भीखमंगा बनाने की योजना है। वहीं मिड डे मिल में देश के कोने कोने से भ्रष्टाचार की खबरें भी आती हैं। इसलिए स्कूलों में खैरात में भोजन बांटने के बजाए हर वोट देने वाले नागरिक को पेंशन दिया जाए तो वह अपने बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ा सकेगा। शास्त्री जी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का हवाला देते हैं , उन्होंने एक बार कहा था कि केंद्र सरकार से चले पैसे का सिर्फ 15 फीसदी ही लोगों तक सही रूपमें पहुंच पाता है, बाकी 85 फीसदी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। आजकल मिड डे मिल, काम के बदले अनाज जैसी दर्जनों भ्रष्टाचार क गंगा बहाने वाली योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन सभी योजनाओं को बंद कर मतदाता पेंशन योजना शुरू की जानी चाहिए।

फंड की कोई कमी नहीं- शास्त्री साफ शब्दों में कहते हैं कि देश के सारे वोटरों को मतदाता पेंशन देने के लिए सरकार के पास फंड की कोई कमी नहीं रहेगी। सरकार को बस वैसी कई योजनाएं बंद करनी होगी जो भ्रष्टाचार की गंगा बहा रही हैं।
खरीद फरोख्त पर लगेगी रोक- मतदाता पेंशन दिए जाने से चुनाव के दौरान वोटों की की जाने वाली खरीद फरोख्त को भी रोक लग सकेगा। हर मतदाता गर्वान्वित होकर वोट डाल सकेगा। वह अपने वोट को थोड़े से रुपये के लालच में आकर बेचेगा नहीं। अगर देश के हर वोटर को मासिक तौर पर पेंशन दिया जाए तो गरीब आदमी का स्वाभिमान बेहतर हो सकेगा और वह खुश होकर प्रजातंत्र में अपनी भागीदारी निभाएगा।
राष्ट्रीय समानता दल ने मतदाता पेंशन को अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्रमुखता से रखा है और मोतीलाल शास्त्री जहां कहीं भी चुनावी भाषण देने जाते हैं, इस मुद्दे को प्रमुखता से रखते हैं। फिलहाल यह पार्टी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान में चुनाव लड़ती है।
-विद्युत प्रकाश मौर्य

Friday, 7 March 2008

बाबा आम्टे - सच्चे मामलों में भारत रत्न थे...

बाबा आम्टे, सच्चे मामलों में भारत रत्न थे। पूरी जिंदगी उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा में होम कर दिया। नागपुर के पास चंद्रपुर नामक का एक रेलवे स्टेशन। भारत के नक्शे में चंद्रपुर कोई खास स्थान नहीं रखता है पर यह जगह बहुत खास भी है। यहां से थोड़ी दूर पर है। वरोरा जहां बसा है आनंदवन। जी हैं आनंदवन वही जगह है जिसने हजारों ऐसे लोगों को नया जीवन दिया है जिन्हें समाज के लोग तिरस्कार भरी नजरों से लोग देखते हैं। हां कुष्ठ जैसी बीमारी....इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के आसपास फटकना भी लोग नहीं पसंद करते हैं।

 पर आनंदवन ने ऐसे तमाम लोगों को एक नया जीवन दिया है। जी हां हम मंदिर में मंदिर में जाकर अपनी औकात के मुताबिक लाखों करोड़ो दान दे आते हैं, पांच सितारा होटलों में लाखों उड़ा देते हैं। पर किसी कोढ़ से पीडि़त व्यक्ति को नफरत भरी निगाह से देखकर मुंह फेर लेते हैं। पर ऐसे पीडि़त लोगों को देखकर एक व्यक्ति का दिल पसीज आया और उसने पीड़ित मानवता की जीवन भर सेवा करने की ठानी । उसने कोढ़ से पीडि़त हजारों लोगों को जीवन में आशा किरण भरी। न सिर्फ उन्हें बीमारी से ठीक करके नई जिंदगी दी बल्कि उनके लिए पुनर्वास के लिए उनके रोजगार का इंतजाम भी किया। उस महापुरूष का नाम मुरलीधर देवीदास आम्टे है, जिसे लोग बाबा आम्टे के नाम से जानते हैं।
कुष्ठ रोगियों की सेवा  
हजारों कुष्ठ रोगियों की जिंदगी में नई रोशनी देने वाले बाबा आम्टे ने नौ फरवरी 2008 को 94 साल की उम्र में इस धरती से विदाई तो ले ली पर उनके द्वारा शुरू किया गया प्रकल्प दुनिया भर के लोगों के लिए हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। बाबा आम्टे ने जो प्रकल्प आनंदवन में शुरू किया वह दुनिया भर के ऐसे लोगों के लिए खास तौर पर प्रेरणा देता रहेगा जो दूसरों की किसी भी रूप में सेवा करना चाहते हैं। बाबा द्वारा स्थापित संस्था महारोगी सेवा समिति को उनके बड़े बेटे डा. विकास आम्टे देखते हैं और यहां कुष्ठ रोगियों की सेवा का काम अनवरत चलता ही रहेगा। हम अक्सर तीर्थ यात्राओं पर जाते हैं बड़े बड़े मंदिर और मस्जिद में जाकर मत्ठा टेकते हैं। पर हमें कभी आनंदवन भी जाना चाहिए जो सही मायने में ऐसा मंदिर है जो लोगों को सेवा करने की प्रेरणा देता है।
जाने माने फिल्म स्टार नाना पाटेकर ग्लैमर की चकाचौंध भरी दुनिया के बीच से समय निकालकर आनंदवन जाते रहे हैं और दूसरे लोगों को भी वहां जाने की प्रेरणा देते हैं।

जोड़ो जोड़ो भारत जोड़ो 
बाबा आम्टे ने न सिर्फ जीवन भर कुष्ठ रोगियों की सेवा की बल्कि देश भर के करोड़ो नौजवानों को प्रेरणा देने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाली। उनका नारा जोडो़-जोड़ो भारत जोड़ो..जाति-पाति के बंधन तोड़ो भारत जोड़ो काफी लोकप्रिय हुआ। भारत जोड़ो यात्रा में शामिल कई लोगों ने इस नारे को जीवन में उतारते हुए दूसरे राज्य और दूसरे बिरादरी से अपने लिए जीवन साथी भी चुना। हालांकि बाबा को बाद में स्पाइनल कोर्ड की हड्डी में शिकायत हो गई थी जिससे वे बैठ नहीं सकते थे।

94 साल तक सक्रिय रहे 
बाबा की जीजिविषा जबरदस्त थी 94 साल की उम्र तक वे सक्रिय रहे कभी नर्मदा बचाओ आंदोलन को सपोर्ट किया तो कभी किसी और जन आंदोलन को। बाबा की सेवाओं को महत्व प्रदान करते हुए उन्हें टेंपल्टन अवार्ड दिया गया तो प्राइज मनी की दृष्टि से नोबेल प्राइज से भी बड़ा है। इसके अलावा मैग्सेसे पुरस्कार समेत कई बड़े पुरस्कार भी उनकी झोली में गए। बाबा के जाने के साथ धरती से एक सच्चा मानवतावादी हमसे दूर हो गया है पर बाबा का जीवन हमेशा लाखों करोड़ों लोगों को प्रेरणा देता रहेगा। 
( बाबा आम्टे 26 दिसंबर 1914 - 9 फरवरी 2008) 


बाबा आम्टे द्वारा स्थापित संगठन महारोगी सेवा समिति की वेबसाइट  - http://www.anandwan.in/  लोक बिरादरी प्रकल्प हेमलकशा की वेबसाइट -http://lokbiradariprakalp.org/ देख सकते हैं। अगर आप आनंदवन जाना चाहते हैं तो संस्था की वेबसाइट पर जाकर वहां आवास व्यवस्था की बुकिंग करा सकते हैं। आप चाहें तो न्यूनतम दो माह के लिए वालंटियर के तौर पर अपनी सेवाएं भी दे सकते हैं।

बाबा को मिले पुरस्कार सम्मान
- 1971 में भारत सरकार से पद्मश्री 
- 1984 मैग्सेसे अवार्ड
- 1990 टेंपलटन पुरस्कार
- 1986 में पद्मभूषण मिला।