

किसी के लिए घूमना नशे की तरह है तो किसी के लिए संगीत की तरह...आजकल छोटी-मोटी छुट्टियों का दौर चला है....ऐसे में दिल्ली की भागमभाग भरी जिंदगी से निजात पाने के लिए कुछ दिन छुट्टी मनाने की सोची तो जयपुर जाने का दिल हुआ...जयपुर में अब वैसे तो दिल्ली जैसी भीड़भाड़ हो गई है...पर जयपुर शहर की अलग संस्कृति है और वहां घूमने का भी अपना एक अलग मजा है...सो अपनी पत्नी माधवी और ढाई साल के बेटे वंश के साथ मैं जयपुर के लिए चला गया...दिल्ली से पूजा एक्सप्रेस का तेज सफर...जयपुर मे एक होटल में कमरा लेने के बाद हमलोग निकले चांदपोल गेट की तऱफ....मैं एक बार पहले भी जयपुर घूम चुका था...पत्नी और बेटे के लिए सबकुछ नया था.. गुलाबी शहर में....चांद पोल गेट से जयपुर शहर की कई किलोमीटर सड़कें आप नंगी आंखों से देख सकते हैं....सभी दुकाने गुलाबी रंग कीं....समकोण पर काटते चौराहे...दुनिया के तीन सबसे खूबसूरत शहरों में शुमार जयपुर खासियत है...( बाकी दो शहर हैं फ्रांस का पेरिस और इटली का वेनिस) कई सौ साल पुराना शहर अपने मूल स्वरूप में आज भी दिखाई देता है....अंदर भले मोबाइल और कंप्यूटर की दुकाने खुल गई हों पर बाहर लुक वही पुराना है....सारी दुकानों के साइन बोर्ड एक ही जैसे हैं....हां बाजार में थोडी भीड़ जरूर बढ़ गई है....
हमने तय किया कि गुलाबी शहर को हम बग्घी पर बैठकर देखेंगे...एक बग्घी वाले से मोलजोल की....मेरे राजकुमार यानी ढाई साल के वंश आगे बैठे और मैं और मेरी माधवी पीछे...और घोड़ा सड़क पर टिकटिक टिक टिक दौड़ता रहा....सचमुच धीरे-धीरे चलती घोड़ा गाड़ी पर पुराना जयपुर शहर देखने का मजा कुछ अलग था...वैसे भी अब बहुत कम ही शहरों में घोड़ागाडी दिखाई देती है....थोड़ी देर बाद हमारे घोड़ा गाड़ी वाले ने कहा कि हवा महल आ गया है...
पिछली बार टूरिस्ट बस वाले ने हवा महल को बाहर से ही दिखा दिया था..बस में चलते चलते...पर इस बार हम हवा महल में अंदर गए टिकट खऱीदकर ....रैंप पर चलते हुए हवा महल उपरी सिरे तक जाने का अनुभव बड़ा रोमांचक है...और जगह जगह हवा महल में बने झरोखे से जयपुर शहर का बाजार दिखाई देता है...कभी महारानियां इन्ही झरोखों से बाजार का नजारा करती थीं....आज हमने भी उसका लुत्फ उठाया...हवा महल के उपरी छत से पूरा जयपुर शहर दिखाई देता है....
हवा महल के बाद शहर कई हिस्से घूमते रहे....उसके बाद अपने एक दोस्त को फोन किया जो राजस्थान पत्रिका में काम करते हैं...चंद्रभान ने बताया कि आप बिड़ला मंदिर भी देख लें...बिडला जी ने देश कई शहरों में मंदिर बनवाया है...दिल्ली में बिड़ला मंदिर, हैदराबाद में बिड़ला मंदिर भोपाल में भी बिड़ला मंदिर...खैर जयपुर का बिड़ला मंदिर भी बड़ा खूबसूरत है...मोती डूंगरी फोर्ट के ठीक नीचे....पर बिड़ला मंदिर अगर आप जाएं तो वहीं के निकट चौराहे पर पावभाजी खाना नहीं भूलें...एक साथ कई पावभाजी की दुकाने हैं....पाव भाजी इतनी अच्छी बनाते हैं कि आपका बार बार खाने को दिल करेगा..जयपुर शहर के अलग अलग कोने से पावभाजी खाने आते हैं यहां लोग...हालांकि जयपुर शहर का अपना खाना पानी तो दाल बाटी चूरमा है....राजस्थान का मशहूर कहावत है....दाल बाटी चूरमा...राजस्थानी सूरमा....पर बिड़ला मंदिर के पास पावभाजी खाने का भी अपना अलग आनंद है....
- विद्युत प्रकाश मौर्य
हमने तय किया कि गुलाबी शहर को हम बग्घी पर बैठकर देखेंगे...एक बग्घी वाले से मोलजोल की....मेरे राजकुमार यानी ढाई साल के वंश आगे बैठे और मैं और मेरी माधवी पीछे...और घोड़ा सड़क पर टिकटिक टिक टिक दौड़ता रहा....सचमुच धीरे-धीरे चलती घोड़ा गाड़ी पर पुराना जयपुर शहर देखने का मजा कुछ अलग था...वैसे भी अब बहुत कम ही शहरों में घोड़ागाडी दिखाई देती है....थोड़ी देर बाद हमारे घोड़ा गाड़ी वाले ने कहा कि हवा महल आ गया है...
पिछली बार टूरिस्ट बस वाले ने हवा महल को बाहर से ही दिखा दिया था..बस में चलते चलते...पर इस बार हम हवा महल में अंदर गए टिकट खऱीदकर ....रैंप पर चलते हुए हवा महल उपरी सिरे तक जाने का अनुभव बड़ा रोमांचक है...और जगह जगह हवा महल में बने झरोखे से जयपुर शहर का बाजार दिखाई देता है...कभी महारानियां इन्ही झरोखों से बाजार का नजारा करती थीं....आज हमने भी उसका लुत्फ उठाया...हवा महल के उपरी छत से पूरा जयपुर शहर दिखाई देता है....
हवा महल के बाद शहर कई हिस्से घूमते रहे....उसके बाद अपने एक दोस्त को फोन किया जो राजस्थान पत्रिका में काम करते हैं...चंद्रभान ने बताया कि आप बिड़ला मंदिर भी देख लें...बिडला जी ने देश कई शहरों में मंदिर बनवाया है...दिल्ली में बिड़ला मंदिर, हैदराबाद में बिड़ला मंदिर भोपाल में भी बिड़ला मंदिर...खैर जयपुर का बिड़ला मंदिर भी बड़ा खूबसूरत है...मोती डूंगरी फोर्ट के ठीक नीचे....पर बिड़ला मंदिर अगर आप जाएं तो वहीं के निकट चौराहे पर पावभाजी खाना नहीं भूलें...एक साथ कई पावभाजी की दुकाने हैं....पाव भाजी इतनी अच्छी बनाते हैं कि आपका बार बार खाने को दिल करेगा..जयपुर शहर के अलग अलग कोने से पावभाजी खाने आते हैं यहां लोग...हालांकि जयपुर शहर का अपना खाना पानी तो दाल बाटी चूरमा है....राजस्थान का मशहूर कहावत है....दाल बाटी चूरमा...राजस्थानी सूरमा....पर बिड़ला मंदिर के पास पावभाजी खाने का भी अपना अलग आनंद है....
- विद्युत प्रकाश मौर्य
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