Saturday, 19 April 2008

प्रकाशक चाहे तो मिल सकती है सस्ते में किताबें


पाठकों को हिंदी में अच्छी किताबें सस्ते दाम पर उपलब्ध हो यह काफी हद तक प्रकाशक पर ही निर्भर करता है।

अगर आजकल प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पुस्तकों पर नजर डालें तो वे आमतौर लाइब्रेरी एडीशन ही छपती हैं। वे महज 500 से एक हजार प्रतियां छपती हैं और लाइब्रेरी में शोभा बढ़ाती हैं..दाम अधिक होने के कारण उनका काउंटर सेल बहुत कम होता है....पर हर भाषा की तरह हिंदी में भी तमाम ऐसे दीवाने प्रकाशक हैं जो अपने चहेते लेखक की किताबें सस्ते दाम में छापते हैं। सस्ता साहित्य मंडल का नाम ही इस भावन का परिचायक है।

ऐसा ही एक प्रकाशन है-वाराणसी स्थित हिंदी प्रचारक संस्थान।( पता है- प्रचारक ग्रंथावाली परियोजना, हिंदी प्रचारक संस्थान, पो.बा. 1106 पिशाच मोचन, वाराणसी- 221010)हिंदी प्रचारक संस्थान ने भारतेंन्दु समग्र, देवकीनन्दन खत्री समग्र, शरतचंद्र समग्र, वृंदावन लाल वर्मा समग्र, प्रताप चंद्र समग्र, शेक्सपीयर समग्र जैसे कई समग्र प्रकाशित किए हैं। इन सभी समग्र का संपादन भी जाने माने लोगों ने किया है....सभी समग्र सजिल्द हैं। इनमें 500 से 1000 तक पेज हैं...इनकी कीमत इनका अन्दाजा लगा सकते हैं? कीमतें मात्र पचास से सौ रुपये के बीच हैं.... एक सुधी पाठक का कमेंट है कि इतने में आप अकेले एक दिन में शायद चाय पी जाते होंगे या पान खा के थूक देते होंगे।
अगर इन जाने माने लेखकों का समग्र अगर आप अलग अलग खरीदना चाहें तो दो हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं....पर हिंदी प्रचारक उन्हें महज 200 रुपये में उपलब्ध करा रहा है....
हिंदी प्रचारक संस्थान के दूसरी पीढ़ी के प्रकाशक रहे कृष्ण चंद्र बेरी का सपना था पाठकों को कम कीमत में समग्र उपलब्ध कराने का....जब उन्होंने इस योजना पर काम शुरू किया उनके परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी सफलता पर आशंका हुई...लेकिन बेरी जी ने कहा कि सस्ते में समग्र प्रकाशित कर उन्हें कोई घाटा नहीं हुआ है....यह बेरी जी की इच्छा शक्ति का ही कमाल था कि अनमोल ग्रंथ सस्ते में प्रकाशकों तक मिल सके....अब कृष्ण चंद्र बेरी जी हमारे बीच नहीं हैं...उनके बेटे विजय प्रकाश बेरी इस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं.....


आप समग्र सूची पत्र के लिए हिंदी प्रचारक संस्थान को लिख सकते हैं.....पता है- 

प्रचारक ग्रंथावाली परियोजना, हिंदी प्रचारक संस्थान, पो.बा. 1106 पिशाच मोचन, वाराणसी- 221010 ( उप्र)

3 comments:

maithily said...

इनकी किताबें वाकई बहुत ही सस्ती होतीं है.

Udan Tashtari said...

एक बार अनूप शुक्ला जी ने भी इस बाबत पोस्ट लिखी थी. आपका आभार जानकारी के लिये.

अतुल said...

मैंने भी इनसे किताबें खरीदी है. कोलकाता का रोशनाई प्रकाशन भी सस्ती किताबें छापता है.