Wednesday, 22 October 2008

जो बिहार में हुआ ...

जो मुंबई में हुआ वह ठीक नहीं था लेकिन २२ अक्टूबर को जो बिहार में हुआ क्या वह ठीक था। राज ठाकरे के लोगों ने बेस्ट की बसों को नुकसान पहुंचाया। कल्याण की सड़कों पर जमकर आगजनी की। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। वह सब ठीक नहीं था। महाराष्ट्र सरकार ऐसे लोगों से जुर्माना वसूलने का कानून बनाने जा रही है। निश्चय ही यह अच्छा कानून होगा। पर बिहार में गुस्साई भीड़ ने बाढ़ रेलवे स्टेशन पर जिस तरह एक्सप्रेस ट्रेन की एसी कोच को आग के हवाले कर दिया, उसकी भरपाई कौन करेगा। ट्रेन की एक बोगी कितने की आती है...इसका अंदाजा सबको है। आजकल एक बस ही २० से २५ लाख में आती है। ट्रेन की एक वातानुकूलित बोगी को आग के हवाले करने का मतलब है करोड़ों का नुकसान। कई नौकरियां जिंदगी भर की बचत में भी एक ट्रेन की बोगी नहीं खरीद सकती हैं। फिर ऐसी आगजनी क्यों। विरोध करने के लिए गांधीवादी तरीका ठीक है। धरना प्रदर्शन और नारेबाजी से भी बात कही जा सकती है। जिस रेलवे में नौकरी करना चाहते हो, उसी की प्रोपर्टी को आग के हवाले करते हो। शर्म आनी चाहिए।
जो राज ठाकरे के लोग मुंबई में कर रहे हैं वहीं हम पूरे देश में करना शुरू कर दें, फिर देश का क्या होगा।

3 comments:

संगीता पुरी said...

बार बार एक ही तरह की घटनाएं दोहरायी जाए ,आज वैश्वीकरण के युग में जवान युवकों को मारपीटकर अपने देश से ही खदेड़ा जाए , तीन तीन घर के चिराग बुझ जाएं , तो नाराजगी स्वाभाविक है... पर आपने भी सही लिखा है , देश की संपत्ति का इतना नुकसान नहीं किया जाना चाहिए।

श्रीकांत पाराशर said...

Bilkul sahi kaha aapne. mumbai men jo hua vah katai theek nahin tha parantu vahi to bihar men bhi hua.aandolan ya virodh ke naam par sarkari sampatti ko barbad karna kahan ki buddhimani hai. aag lagata koi hai aur tax ke roop men bharpai hum sab ko karni padti hai. aise logon par kathor karvai honi chahiye, phir chahe vah mumbai ke hon ya bihar ke.

मनुज मेहता said...

गीता-ओ-कुरान जला दो, बाइबल का करो प्रतिवाद,
आओ मिल कर लिखें हम एक महाराष्ट्रवाद.