
अभी हाल में आई श्याम बेनेगल की फिल्म वेलकम टू सज्जनपुर की पूरी शूटिंग रामोजी फिल्म सिटी में हुई है. ....रामोजी फिल्म सिटी एक सपनीली दुनिया है..मुझे यहां ज्यादा समय रहने का मौका नहीं मिल सका...दैनिक भास्कर पानीपत में काम करता था सीनियर सब एडीटर के पद पर..तभी एक दिन फोन आया कि आपका ईटीवी हैदराबाद में इंटरव्यू है...आने जाने का एसी 3 का किराया दिया जाएगा....मैं तैयार हो गया..इंटरव्यू के लिए।दस साल प्रिंट मीडिया में काम करने के बाद इलेक्ट्रानिक मीडिया में जाने के बारे में सोचता भी था...आईआईएमसी से निकला था तो बहुत से दोस्त तुरंत ही इलेक्ट्रानिक मीडिया में चले गए थे..खैर वह जनवरी की बड़ी ही सर्द सुबह थी जब मैं दक्षिण के शहर हैदराबाद के लिए चला...सिकदंराबाद स्टेशन पर रामोजी फिल्म सिटी( आरएफसी) की गाड़ी हमारा इंतजार कर रही थी...आरएफसी में गया तो शांति निकेतन गेस्ट हाउस में ठहराया गया....इंटरव्यू के दौरान ही तीन दिनों तक रामोजी फिल्म सिटी के गेस्ट हाउस में रहा...ईटीवी के एमपी चैनल में मेरा मिड्ल लेवल जर्नलिस्ट के पद पर चयन हो गया...उसके बाद सात महीने मैंने ईटीवी में गुजारे...एमपी चैनल में....हमारे चैनल के इंचार्ज योगेश जोशी और रुपेश श्रोती से सानिध्य में...आठ महीने के अनुभव बड़े अच्छे रहे...यहां आने पर पता चला कि यहां चार सौ हिंदी पत्रकारों की जमात रहती है....इसमें ज्यादातर लोग वनस्थली पुरम में रहते हैं....खैर बात करते हैं रामोजी फिल्म सिटी की जिसे दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म सिटी होने का गौरव प्राप्त है...हैदराबाद शहर से बाहर विजयवाड़ा रोड पर इसका विशाल कैंपस है....हर रोज कई हजार टूरिस्ट इस फिल्म सिटी को देखने आते हैं...यहां दर्जनों हिंदी फिल्मों की भी शूटिंग हुई है...रामोजी फिल्म सिटी में ही ईटीवी समूह के 12 भारतीय भाषाओं के चैनलों के हेड आफिस हैं...इनमें से चार हिंदी के चैनल भी हैं...इसका मतलब की पत्रकारों की एक बड़ी बिरादरी यहां काम करती है...ईटीवी इलेक्ट्रानिक मीडिया की बड़ी नर्सरी बन चुकी है...सभी बड़े चैनलों में भी ईटीवी के लोग पहुंच चुके हैं...हरी भरी पहाड़ियों के बीच रामोजी फिल्म सिटी का नजारा बड़ा सुहावना है....विशाल दफ्तर...लंबी चौड़ी कैंटीन और संपन्न रेफरेंस लाइब्रेरी...ईटीवी की खास बातों में से एक है...ईटीवी में काम करने वाले कई लोग बहुत सी बातों को लेकर कुंठित भी रहते हैं पर मैं यहां उनकी चर्चा नहीं करना चाहूंगा....एक अनुशासन है जिसके बदौलत रामोजी फिल्म सिटी में सारी व्यवस्था चलती है....कई दर्जन बसें रोज कर्मचारियों को लेकर फिल्म सिटी में आती हैं....फिर उन्हें छोड़ने के लिए घर भी जाती हैं....पहाड़ों के बीच जब सूरज की पहली किरण फिल्म सिटी में पड़ती है तो सुबह देखने लायक होती है....विशाल हरे भरे पार्क और एक से बढ़कर एक शूटिंग लोकेशन्स रामोजी फिल्म सिटी की विशेषता है....हमेशा यहां किसी न किसी फिल्म की शूटिंग चलती रहती है....रामोजी फिल्म सिटी के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप उनकी आफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं....http://www.ramojifilmcity.com/
-विद्युत प्रकाश मौर्य
-विद्युत प्रकाश मौर्य
2 comments:
विद्युत भाई, बहुत अच्छा ब्लॉग बनाया है। रामोजी फिल्म सिटी के बारे में कोई टिप्पणी न कर उस बच्ची ने जो कहानी सुनाई औऱ जिस तरह आपने उसका बयान किया, वाकई दिल को छू गई। कुछ उसी तरह की चीजें इस ब्लॉग पर दो। लोग ऐसी ही चीजें पढ़ना चाहते हैं।
विद्युत जी,
मैंने भी काफी समय गुजारा है ईटीवी में और रामोजी फिल्म सिटी में। मेला सा है वहां आने जाने वालों का जैसे। आपकी पोस्ट में वनस्थली पुरम और शांति निकेतन का नाम सुनकर यादें ताजा हो गई। वास्तव में वहां का स्व अनुशासन काबिले तारीफ है। मैं तो सोचती थी कि कभी ये बसें खराब नहीं होती रास्ते में। तो कभी सवैतनिक अवकाश मिल जाता लेकिन नहीं हो सका कभी ऐसा। अब भी वहां की लाइफ मिस करते हैं हम लोग कभी कभी।
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