Friday, 27 March 2009

नीलकंठ महादेव

वैसे तो शिव के मंदिरों में द्वादश ज्योतिर्लिंग की चर्चा की जाती है लेकिन शिव भक्तों के लिए नीलकंठ महादेव का महत्व कुछ अलग ही है। हालांकि नीलंकठ महादेव द्वादश ज्योतिर्लिंगों से अलग है लेकिन इसकी खास महत्ता है क्योंकि नीलकंठ महादेव वह स्थल है जहां शिव समुद्र मंथन का हलाहल पीने के बाद वर्षों तक आराम करते रहे। बाद में देवताओं के आग्रह पर वे कैलाश पर्वत पर वापस गए। वास्तव में समुद्र मंथन का गरल पीने के बाद शिव का कंठ विष से नीला हो गया था। इसलिए उन्हें नीलकंठ भी कहा गया है। कई सालों तक ऋषिकेश की एक चोटी पर आराम करने के बाद शिव अपने गले से विष को दूर कर पाए। विष से शिव का माथा गरम हो चुका था। देवताओं ने शीतलता प्रदान करने के लिए शिव के माथे पर जल अर्पित किया तभी से शिव को जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
कैसे जाएं-
यह तो संक्षेप में नीलकंठ महादेव का वृतांत है। लेकिन आप जानना चाहेंगे कि ये नीलकंठ महादेव का मंदिर है कहां..तो ये मंदिर है उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम ( राम झूला या शिवानंज झूला ) से 23 किलोमीटर दूर। 1675 मीटर की ऊंचाई पर।
नीलकंठ में बड़ा ही मनोरम शिव का मंदिर बना है मंदिर के बाहर नक्कासियों में समुद्र मंथन की कथा उकेरी गई है। खास तौर पर शिवरात्रि और सावन में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है लेकिन बाकी के साल यहां नीलकंठ महादेव के दर्शन अपेक्षाकृत आसानी से किए जा सकते हैं। बाकी जगह के शिव मंदिर की तुलना में यहां आप चांदी के बने शिव लिंग का काफी निकटता से दर्शन कर सकते हैं।


ऋषिकेश और हरिद्वार आने वाले बहुत कम श्रद्धालु नीलकंठ तक जाते है। अगर आप नीलकंठ महादेव जाना चाहते हैं तो ऋषिकेश से यहां जा सकते हैं। लक्षमण झूला के उस पार ( पौड़ी गढ़वाल) और स्वर्गाश्रम के टैक्सी स्टैंड से नीलकंठ के लिए जीप और एंबेस्डर मिलती हैं। 23 किलोमीटर का सफर 45 मिनट का है। जिस टैक्सी से आप जाएंगे वही आपको लक्ष्मण झूला तक वापस भी छोड़ देगी। अगर भीड़ नहीं हो तो नीलकंठ महादेव में पूजा में ज्यादा वक्त नहीं लगता। जो लोग समय की कमी के कारण बद्रीनाथ और केदारनाथ नहीं जा पाते उन्हें नीलकंठ महादेव जरूर जाना चाहिए। यह बद्रीनाथ और केदार नाथ जाने के ट्रेलर की तरह है। नीलंकठ का 23 किलोमीटर का रास्ता पहाड़ों को चीरता हुआ बड़ा ही मनोरम है। साथ साथ दिखाई देती हैं अठखेलियां करती हुई गंगा की धारा।
वैसे नीलकंठ जाने का मार्ग स्वर्गाश्रम से पैदल जाने का भी है। यह मार्ग 11 किलोमीटर का है लेकिन सीधा चढाई वाला है, जो लोग पहाड़ों पर ट्रैकिंग के शौकीन है वे इस मार्ग से भी नीलकंठ जा सकते हैं।
-विद्युत प्रकाश मौर्य

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