Sunday, 21 August 2011

रामलीला मैदान से लाइव


दिल्ली के रामलीला मैदान में पिकनिक जैसा माहौल है। ये देशभक्ति का पिकनिक है। नव यौवनाएं गोरे गालों पर तिरंगा टैटू गुदवा रही हैं। लोग अन्ना की टोपी पहने घूम रहे हैं। लोग हाथों में तिरंगा लिए आ रहे है। बाइक पर तीन लोग सवार होकर बिना हेलमेट पहने अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं के नारे लगा रहे हैं। लोग आ रहे हैं जा रहे हैं। कुछ जत्थे दिल्ली के आसपास के शहरों से भी आ रहे हैं। 21 अगस्त रविवार का दिन अन्ना के अनशन का छठा दिन। रामलीला मैदान में बेतरतीब सी भीड़ है। अन्ना के मंच के पास लोगों की भीड़ जरूर दिखाई देती है लेकिन पीछे पूरा मैदान खाली है। टीवी का कैमरा वहीं फोकस करता है जहां भीड़ दिखाई देती है। यहां बाबा रामदेव के आंदोलन के बराबर लोग भी नहीं है। साइड में काउंटर लगे हैं। सभी लोगों के मिनरल वाटर बांटा जा रहा है। बिस्कुट के पैकेट बांटे जा रहे हैं। भूखे हैं तो लंगर का भी इंतजाम है। बीमार होनेवालों के लिए डाक्टर भी हैं। कई संस्थाएं अन्ना के समर्थन में अपनी संस्था का प्रचार करने पहुंची हैं। अन्ना संत हैं। कई आंदोलन किए हैं। कई बार सरकार हिला दी है। लेकिन दिल्ली के रामलीला मैदान के इस आंदोलन में पांच हजार लोगों की भीड़ बमुश्किल जुट रही है। वह भीड़ भी आते जाते लोग की है। जाहिर है मीडिया के प्रचार से ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। अन्ना के सपोर्ट में पूरा मीडिया है। रामलीला मैदान के बाहर 30 से ज्यादा ओबी वैन लगे हैं। लगातार लाइव फीड जा रही है।  लेकिन जिस तरह ये हल्ला मचाया जा रहा है कि पूरा देश अन्ना के साथ आ चुका है। वैसा बिल्कुल नहीं लगता। 
तमाम राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठनों के लोग एनजीओ के लोग अन्ना के साथ आ रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद कोई व्यापक जन आंदोलन देश में खड़ा हो चुका है, ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। क्या इस आंदोलन की तुलना जेपी के आंदोलन से या राजीव गांधी के खिलाफ कांग्रेस से बाहर हुए वीपी सिंह के आंदोलन से की जा सकती है? भ्रष्टाचार के खिलाफ इस आंदोलन में क्या सचमुच भ्रष्टाचार से आजीज लोग पहुंच रहे हैं?  नहीं बल्कि बड़ी फेहरिस्त उन लोगों की भी है जो भ्रष्ट तरीके से अपना काम तो कराते हैं लेकिन वे चाहते हैं कि दूसरे लोग इमानदार हो जाएं।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य

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