Wednesday, 7 March 2012

छोटे निवेशक बाजार पर रखें नजर....

आप छोटे निवेशक हैं तो भी आपको बाजार पर नजर रखना चाहिए। शेयर बाजार में पैसा लगाना और धन कमाना अच्छी चीज है पर आपके आंख और कान खुले होने चाहिए। आम तौर पर बाजार में दो तरह के निवेशक हैं एक वे जो पैसा लंबे समय के लिए लगाते हैं और एक वे जो पैसा लगाकर तुरंत लाभ कमाना चाहते हैं। जो लोग पैसा लगाकर तुरंत लाभ कमाना चाहते हैं उन्हें और भी सावधान रहना चाहिए। बाजार से तुरंत लाभ कमाना जोखिम भरा है। यह एक तरह का जुआ भी है।

रोज लाभ कमाना जुआ- कुछ लोग शेयर में निवेश करते हैं और रोज लाभ कमाते हैं। सुबह एक लाख रूपया किसी शेयर में निवेश किया और चार घंटे बाद अगर दो रूपये प्रति शेयर का लाभ होता दिखाई दिया तो बेच दिया। इसमें कई बार लाभ होता है तो कई बार घाटा भी हो जाता है। जो लोग पहली बार निवेश करते हैं और उन्हें घाटा हो जाता है तो वे बाजार से बहुत निराश हो जाते हैं। साथ बहुत बड़ी राशि निवेश करने वालों को भी बाजार कई बार बड़ा घाटा देता है। पर ऐसे लोग ये भूल जाते हैं कि इसी बाजार ने उन्हे कई बार बहुत बड़ा फायदा भी कराया है। बाजार के नियमित निवेशकों को बाजार के ऐसे उतार-चढ़ाव के समय संयम बरतना चाहिए। जो लोग बाजार में यह सोच कर आते हैं कि उन्हें अपने धन से तुरंत कोई बड़ा लाभ हो जाएगा तो कई बार उन्हें लाभ हो जाता है पर कई बार उन्हें इसमें बड़ा घाटा भी हो जाता है।

दीर्घकालिक निवेश में फायदा - अगर हम बाजार के लंबे ट्रैक रिकार्ड को देखें तो यह पाएंगे कि जिन लोगों ने अपना धन लंबे समय के लिए निवेश किया है उन्हें बाजार से कोई घाटा नहीं हुआ है। अगर आपका पैसा म्चुअल फंडों में तीन साल या उससे ज्यादा समय के लिए जमा रहा है तो आमतौर पर यह बहुत फायदा देकर गया है। अगर कोई 15 साल से शेयर बाजार में नियमित निवेश करता आ रहा है तो उसे भी बाजार से कोई घाटा नहीं हुआ है। अगर हम बाजार में हर्षद मेहता और केतन पारिख जैसे बड़े घोटालों पर भी नजर डालें तो भी बाजार इन सबसे उबर कर फिर से उठ खड़ा हुआ है और लंबे समय से धन का निवेश करने वालों को कोई घाटा नहीं हुआ है। जनवरी 2008 में एक बार फिर बाजार में तेज गिरावट आई है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियों के घाटे के कारण भारत के शेयर बाजार अचानक 25 से 30 फीसदी तक नीचे गिरा है। पर इसके आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि हमें भारतीय शेयर बाजार से निराश होने की जरूर है। दरअसल बांबे स्टाक एक्सचेंज के सेंसेक्स ने एक साल में 13 हजार से 21 हजार तक का सफर तय कर लिया तो लोगों को लगने के लगा कि बाजार में बढ़त इसी गति से हमेशा जारी रहेगी। पर हमेशा ऐसा नहीं होता। अगर बैंक के फिक्स डिपाजिट या अन्य जमा योजनाओं में आपका रूपया आठ फीसदी की गति से बढ़ता है तो शेयर बाजार में आपका रुपया 20 से 25 फीसदी की गति से भी बढ़े तो इसको बहुत अच्छा रिटर्न मानना चाहिए। पर शेयर और म्यूचुअल फंड कई बार साल में 50 से 100 फीसदी तक रिटर्न दे जाते हैं। पर इसमें जब तेजी से गिरावट आती है तो निवेशकों के दिल की धड़कन तेज होने लगती है। पर शेयर बाजार में निवेश करने वालों को यह बात अच्छी तरह याद रखनी चाहिए कि बाजार में निवेश में जोखिम है। जनवरी फरवरी में बाजार में बड़ी गिरावट आने के बाद भी जिन लोगों ने आठ दस महीने पहले बाजार में पैसा लगाया है उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ है।



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