Tuesday, 24 March 2015

शशि कपूर - बागों में जब जब फूल खिलेंगे....

श्रीनगर के डल झील में शिकारा चलाते हुए ...वे गीत गातें ..बागों में जब जब फूल खिलेंगे तब तब हरजाई मिलेंगे... कपूर खानदान में शशि कपूर वास्तव में सदाबहार अभिनेता हैं जिन्होंने न सिर्फ रोमांटिक बल्कि गंभीर अभिनय में भी अपना लोहा मनवाया। कुछ लोगों को अगर उनकी शान और सुहाग जैसी फिल्में याद हों तो जरा उत्सव और नई दिल्ली टाइम्स जैसी फिल्मों को भी याद किजिए। 

18 मार्च 2015 को अपना 77वां जन्मदिन मनाने वाले शशि कपूर के घर में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के तौर पर एक बार फिर बड़ी खुशी आई। उन्हें 2014 के लिए ये सम्मान दिए जाने का ऐलान किया गया। हालांकि उम्र के इस पड़ाव में आकर वे काफी अस्वस्थ हो गए हैं। चलने फिरने में दिक्कत है। पर शशि कपूर ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन फिल्में दी हैं। खास तौर पर वे रुमानी फिल्मों में अपने सदाबहार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। अमिताभ बच्चन के साथ आई फिल्म दीवारमें उनका डायलॉग  मेरे पास मां है’  हिंदी सिनेमा का कभी न भुलाया जाने वाला संवाद बन गया। कपूर खानदान में इससे पहले उनके पिता पृथ्वीराज कपूर को 1971 में और राज कपूर को 1987 में यह बड़ा पुरस्कार मिल चुका है।

शशि कपूर - जीवन का सफर 
18 मार्च 1938 को कोलकाता में जन्म। असली नाम बलबीर राज कपूर। भाई - शम्मी कपूर और राज कपूर।
1950 में गोडफ्रे कैंडल के थियेटर समूह शेक्सपीयराना में शामिल हुए। इससे पहले पृथ्वी थियेटर्स में भी अभिनय किया।
1951 में आवारा में बाल कलाकार के तौर पर राजकपूर के बचपन की भूमिका निभाई।
1958 में मात्र 20 साल की उम्र में गोडफ्रे की बेटी जेनिफर कैंडल से विवाह किया।
1984 में पत्नी जेनिफर की मृत्यु के बाद शशि कपूर भावनात्मक तौर पर टूट गए। कुणाल कपूर, करण कपूर शशि के बेटे और संजना कपूर बेटी हैं।
116 हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं शशि कपूर जिनमें 61 फिल्मों में एकल हीरो के तौर पर आए। 

मेरे पास मां है.. फिल्म दीवार में शशि कपूर निरुपा राय और अमिताभ बच्चन। 
शशि कपूर की कुछ यादगार भूमिकाएं 

1961 में सांप्रदायिक दंगों पर आधारित धर्मपुत्रमें मुख्य भूमिका निभाई।

1965 में आई जब जब फूल खिलेउनकी लोकप्रिय रोमांटिक फिल्म थी जिसमें वे कश्मीरी शिकारा वाले की भूमिका में थे

1975 में दीवारमें अमिताभ बच्चन के साथ दमदार अभिनय किया

1984 में आई फिल्म उत्सवमें उन्होंने खलनायक भूमिका निभाई

1998 में आई फिल्म जिन्नाउनकी आखिरी फिल्म थी जिसमें वे नजर आए।


शशि ब्रिटिश और हॉलीवुड फिल्मों में

1963 में हाउसहोल्डरनामक अंग्रेजी फिल्म में हीरो के तौर पर आए।
1965 में अंग्रेजी फिल्म शेक्सपीयरवालामें मुख्य भूमिका निभाई
1982 में अपनी पत्नी जेनिफर के साथ अंग्रेजी फिल्म हिट एंड डस्टकी। इसके अलावा बांबे टाकीज (1971), सेमी एंड रोजी गेट लेड (1987), द डेसीवर्स (1988), साइट स्ट्रीट्स (1998) जैसी विदेशी फिल्मों में काम किया।

बेस्ट एक्टर अवार्ड

1985 में आई पीके प्रोडक्शन की फिल्म न्यू दिल्ली टाइम्सके लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस फिल्म में वे एक पत्रकार की भूमिका में थे।

1994 में आई फिल्म मुहाफिजमें अभिनय के लिए नेशनल जूरी अवार्ड मिला।

फिल्म सिलसिला  के दृश्य में अमिताभ बच्चन और  शशि कपूर
प्रमुख हिंदी फिल्में : वक्त (1965) जानवर और इंसान (1972) आ गले लग जा (1973), कभी कभी (1976) सिलसिला (1981), बसेरा (1981), पिघलता आसमान (1985) दूसरा आदमी (1977) रोटी कपड़ा और मकान (1978)

अपनी प्रोडक्शन कंपनी
1978 में अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी फिल्म वाला शुरू की। इस बैनर तले जुनून, कलयुग, 36 चौरंगी लेन, विजेता और उत्सव जैसी उल्लेखनीय फिल्में बनाईं।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
1969 में दादा साहेब फाल्के की जन्म शताब्दी वर्ष के मौके पर भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कार की शुरुआत की गई। पहला सम्मान अभिनेत्री देविका रानी को मिला।
46 सिनेमा हस्तियों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है अब तक।
2013 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार निर्देशक गुलजार को मिला।
2012 में यह सम्मान अभिनेता प्राण को मिला था।

भारतीय सिनेमा के पितामह : दादा साहेब फाल्के
भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले धुंधीराज फाल्के का जन्म नासिक के पास त्रयंबकेश्वर में 1870 में हुआ था। फोटोग्राफर के तौर पर अपना कैरियर शुरू करने वाले फाल्के ने 1909 में जर्मनी जाकर सिनेमा का इल्म सीखा। फाल्के ने पहली हिन्दी फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनाई जिसका पहला प्रदर्शन 1913 में मुंबई में हुआ था।



Sunday, 1 March 2015

बीस साल का हुआ स्मार्टफोन

आईबीएम सिमॉन - आज स्मार्टफोन ने मोबाइल, कंप्यूटर और कैमरा, टीवी  समेत कई सुविधाओं को आपकी हथेली पर समेट दिया है। पर 'आईबीएम सिमॉन'  16 अगस्त 1994 में आया दुनिया का पहला स्मार्टफोन था जिसमें कॉलिंग के अलावा कंप्यूटर जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध थीं। फोन को आईबीएम और अमेरिकी फोन कंपनी बेलसेल्फ ने बनाया था। इसे सिमॉन नाम इसलिए दिया गया, क्योंकि यह बहुत साधारण था और यह उस हर काम के लिए उपयुक्त था, जिसकी अपेक्षा स्मार्टफोन से की जाती है। इससे पूर्व 1992 में आईबीएम ने स्मार्टफोन का प्रोटोटाइप तैयार किया था।


ऐसा था पहला स्मार्टफोन
900 डॉलर कीमत थी पहले स्मार्ट फोन की।
01 घंटे मात्र थी इसकी बैटरी की क्षमता
23 सेंटीमीटर थी फोन की लंबाई
500 ग्राम था फोन का वजन
50,000 हैंडसेटों की बिक्री हुई थी इस पहने मॉडल की।

भारी भरकम फोन
इस फोन का आकार घरों में निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंट के आधा था। फोन का सॉफ्टवेयर लिखने, चित्र बनाने, अपने कैलेंडर और संपर्क को अपडेट करने, फैक्स भेजने और पाने की सुविधा देता था।

हरे रंग की स्क्रीन
इसकी एलसीडी स्क्रीन हरे रंग की थी। यह टच स्क्रीन तकनीक से चलता था। इसमें नीचे स्लॉट भी था, जिससे मानचित्र, स्प्रेडशीट और गेम तक पहुंचा जा सकता था। वास्तव में यह आईफोन की दिशा में पहला कदम था।

अब लंदन के म्यूजियम की शोभा
लंदन के विज्ञान संग्रहालय में अक्टूबर में यह फोन प्रदर्शित किया जाएगा। यह संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के इतिहास पर एक स्थाई प्रदर्शनी का हिस्सा होगा। यहां पिछले 200 सालों में बने 800 संचार उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं।

आगे की प्रगति
1996 में नोकिया ने 9000 मॉडल पामटॉप कंप्यूटर जैसा फोन पेश किया। इसमें क्वार्टी कीबोर्ड मौजूद था।
1999 में क्वालकॉम ने सीडीएमए तकनीक का डिजिटल स्मार्ट फोन पेश किया।
2001 में कोसेरा ने ऐसा फोन पेश किया जिसमें वेब ब्राउजिंग संभव था।
03 प्रमुख प्लेटफार्म पर मौजूद हैं आज स्मार्ट फोन ( एंड्राएड, आईओएस और ब्लैकबेरी)