Friday, 22 February 2019

भारत पाक के बीच पानी के लेकर पुरानी है खींचतान


भारत पाकिस्तान के बीच हालांकि सिंधु जल समझौता है, फिर भी सिंधु नदी घाटी के नदियों के पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच खींचतान चलता रहता है। कश्मीर के उरी में 2016 में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने संकेत दिए थे कि पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने का दबाव बनाने के लिए वह सिंधु जल समझौते का इस्तेमाल कर सकता है।
पाकिस्तान भारत की बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं जिनमें पाकल (1,000 मेगावाट), रातले (850 मेगावाट), किशनगंगा (330 मेगावाट), मियार (120 मेगावाट) और लोअर कलनाई (48 मेगावाट) पर कई बार आपत्ति उठाता रहा है।
पाकिस्तान ने अपनी आपत्तियां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाई। 2017 में वाशिंगटन में हुई वार्ता में विश्व बैंक की मध्यस्थता में संधि के तहत भारत को दो सहायक नदियों के जल का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया, जबकि अन्य तीन नदियों के जल का उपयोग करने का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया। भारत ने कहा कि उसे संधि के तहत अपने क्षेत्र में प्रवाहित नदियों की सहायक नदियों पर जलविद्युत संयंत्र लगाने का अधिकार है जबकि पाकिस्तान को आशंका थी कि इससे उसके क्षेत्र में पानी का प्रवाह कम हो जाएगा।
सिंधु नदी का जल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी है। पाकिस्तान कृषि प्रधान देश है और इसकी खेती का 80 फीसदी हिस्सा सिंचाई के लिए सिंधु के पानी पर निर्भर है।
भारत पहले भी दिखा चुका है कड़ा रुख
दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में पंजाब के बठिंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि एक-एक बूंद पानी रोककर भारत के किसानों तक पहुंचाया जाएगा।  2016 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि पर हुई बैठक के दौरान कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। इस बयान को पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश समझा गया था। 
1948 में रोका था पानी
भारत पाक बंटवारे के साथ ही सिंधु नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। 1948 में भारत ने सिंधु नदी से निकली नहरों का पानी रोक दिया था जिससे पाकिस्तान के पंजाब में सूखा पड़ गया था।
1960 में हुआ सिंधु जल करार
सिंधु जल संधि को दो देशों के बीच जल विवाद पर एक सफल अंतरराष्ट्रीय उदाहरण बताया जाता है। साल 1960 में हुआ था भारत पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता, 19 सितंबर को कराची में दोनों देशों के बीच करार हुआ। इस संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे।
- समझौते के मुताबिक पूर्वी नदियों (सतलज, व्यास और रावी)  का पानी, कुछ अपवादों को छोड़ भारत बिना रोकटोक के इस्तेमाल कर सकता है।
पश्चिमी नदियों झेलम, चेनाब और सिंधु का 80 फीसदी पानी पाकिस्तान के लिए होगा। पर इन नदियों के 20 फीसदी पानी का इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया। जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी का इस्तेमाल ।
भारत को करोड़ों का नुकसान
भारत में एक वर्ग का मानना रहा है कि इस समझौते से भारत को आर्थिक नुकसान हो रहा है। जम्मू कश्मीर सरकार के मुताबिक इस संधि के कारण राज्य को हर साल करोड़ों का आर्थिक नुकसान होता है। संधि पर पुनर्विचार के लिए विधानसभा में 2003 में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था।
संधि तोड़ना आसान नहीं
जब जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता है तब सिंधु जल समझौते को तोड़ने की बात उठती है। पर यह इतना आसान नहीं है।
भारत के पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दूबे कहते हैं- संधि को रद्द करके पाकिस्तान को मिले उसके अधिकार से वंचित करने से बहुत बड़ा मतभेद हो सकता है, बहुत बड़ी घटनाएं हो सकती हैं।
संधि टूटने के खतरे
-   अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा
-   बाढ़ की आशंका
-   दूसरे देशों के साथ जल समझौते में दिक्कत

सिंधु घाटी का दायरा
11.2 लाख किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है सिंधु नदी घाटी का इलाका
47 फीसदी पाकिस्तान में 39 फीसदी भारत में 8 फीसदी चीन और 6 फीसदी अफगानिस्तान सिंधु नदी से प्रभावित इलाका।
30 करोड़ लोग सिंधु नदी के आसपास के इलाकों में रहते हैं।
2880 किलोमीटर है तिब्बत से निकलने वाली सिंधु नदी की लंबाई।


Tuesday, 29 January 2019

जॉर्ज – एक अनथक विद्रोही

भारतीय राजनीति में जॉर्ज फर्नाडिस की छवि एक अनथक विद्रोही की रही। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने आरपार की कई लंबी लड़ाइयां लड़ीं। कर्नाटक के तटीय इलाके के खूबसूरत शहर मंगलुरू में जन्मे जॉर्ज की शुरुआती पहचान एक मजदूर नेता के तौर पर बनी। राजनीति के आसमान में उनका उदय धूमकेतू की तरह हुआ। कुल नौ बार लोकसभा का चुनाव जीता। केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने रेलउद्योग, संचार और रक्षा मंत्री के रूप में काम किया। जॉर्ज अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में अकेले ईसाई मंत्री थे। उनके रक्षा मंत्री रहते हुए भारत ने पोखरण में परमाणु बम का परीक्षण किया।

जन्म - 3 जून 1930मेंगलुरु (कर्नाटक ) -

नहीं बन सके पादरी
जॉर्ज की मां किंग जॉर्ज पंचम की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं, जिनका जन्म भी 3 जून को हुआ था। इस कारण उन्होंने इनका नाम जॉर्ज रखा। वे अपने 6 भाइयों में सबसे बड़े थे। जॉर्ज ने मेंगलुरु के सेंट अल्योंसिस कॉलेज से बारहवीं कक्षा पूरी की। उन्हें 16 साल की उम्र में कैथलिक पादरी बनने के लिए बंगलुरु की सेमिनरी में भेजा गया। यहां वो दो साल तक रहे, पर यहां उन्होंने भेदभाव देखा और मुल्क आजाद होने वाले साल में ही वे भी इस धार्मिक संस्थान से भागकर माया नगरी मुंबई पहुंचे।

काम की तलाश में मुंबई और समाजवादी आंदोलन
जॉर्ज 1949 की ठंड में काम की तलाश में मुंबई पहुंचे। रात को चौपाटी के किनारे किसी बेंच पर सो जाते। कई बार पुलिस वाले भगा देते थे। इसी दौरान 19 साल के उनको एक अखबार में प्रूफ रीडर का काम मिला। बॉम्बे में रहने के दौरान ही वे समाजवादी मजदूर आंदोलन और राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आए। साठ के दशक के अंत तक उन्हें बॉम्बे की टैक्सी यूनियन के सबसे बड़े नेता के रूप में पहचान मिल गई थी। वे 1961 चुनाव जीतकर बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सदस्य बन गए। 



पहली बार संसद में - 'जॉर्ज द जायंट किलर'
साल 1967 के लोकसभा चुनाव में जॉर्ज को संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की ओर से मुंबई दक्षिण की सीट से टिकट मिला। उनका मुकाबला कद्दावर नेता कांग्रेस के सडशिव कानोजी पाटिल से था। जॉर्ज ने उस चुनाव में पाटिल को बड़े अंतर से हरा दिया जिसके कारण उनका नाम 'जॉर्ज द जायंट किलर'  रख दिया गया। पर पाटिल को यह हार बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने राजनीति ही छोड़ दी।

ट्रेड यूनियन लीडर जॉर्ज और 1974 की रेल हड़ताल
आजादी के बाद तीन वेतन आयोग आ चुके थेलेकिन रेल कर्मचारियों के वेतन में कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई थी। जॉर्ज नवंबर 1973 को ऑल इंडिया रेलवे मैन्स फेडरेशन के अध्यक्ष बने। यह तय किया गया कि वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल की जाए। इसके लिए नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी बनी। 8 मई 1974 को बॉम्बे में हड़ताल शुरू हुई। ये जॉर्ज का कमाल था कि टैक्सी ड्राइवरइलेक्ट्रिसिटी यूनियन और ट्रांसपोर्ट यूनियन भी इसमें शामिल हो गईं। मद्रास की कोच फैक्ट्री के दस हजार मजदूर सड़क पर आ गए। गया में रेल कर्मचारियों ने अपने परिवारों के साथ पटरियों पर कब्जा कर लिया। एक बार के लिए पूरा देश रुक गया।

इमरजेंसी में फरारी के दिन
25 जून 1975 को 45 साल के जॉर्ज ओडिशा के गोपालपुर में पत्नी लैला के संग छुट्टियां मना रहे थे तभी देश में इमरजेंसी लगने का एलान हुआ। जॉर्ज ने मछुआरे की तरह एक लुंगी लपेटी और फरार हो गए। वे लगातार फरार रहे और तमाम जांच एजंसियां उन्हें लंबे समय तक नहीं ढूंढ पाईं। जॉर्ज ने दाढ़ी और बाल बढ़ा लिए थे। वे यात्रा के दौरान सिख का वेश बना लेते थे। लोगों को अपना नाम खुशवंत सिंह बताते थे। कभी जोगी के वेश में नजर आते। इस दौरान बंगलुरु में एक होटल में वे चाय पी रहे थेछापा पड़ा वे आराम से आगे निकल गए कोई पहचान नहीं सका।
बड़ौदा डायनामाइट केस और जार्ज
जॉर्ज मानते थे कि अहिंसात्मक तरीके से किया जाना वाला सत्याग्रह ही न्याय के लिए लड़ने काफी नहीं है। आपातकाल के दौरान उन्होंने डायनामाइट लगाकर विध्वंस करने का फैसला किया। इसके लिए ज्यादातर डायनामाइट गुजरात के बड़ौदा से आया। जॉर्ज के निशाने पर खाली सरकारी भवनपुलरेलवे लाइन और इंदिरा गांधी की सभाओं के नजदीक की जगहें थीं। पर जॉर्ज और उनके कुछ साथियों को जून 1976 में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन सहित 25 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया जिसे बड़ौदा डायनामाइट केस के नाम से जाना जाता है। हालांकि उनके कुछ सहयोगी मानते थे यह सब कुछ सिर्फ पब्लिसिटी के लिए था।

हथकड़ी में वो मशहूर तस्वीर
जॉर्ज फर्नांडिस की सबसे मशहूर तस्वीर आपातकाल के दौरान की है। इस तस्वीर में जॉर्ज हथकड़ी में बंद अपने हाथों को उठाए हुए दिखाई देते हैं। यह तस्वीर आज भी आपत्काल के खिलाफ खड़े हुए प्रतिरोध का प्रतीक चिन्ह के तौर पर याद की जाती है। तस्वीर तब की है जब जॉर्ज को बड़ौदा डायनामाइट केस की पेशी के दौरान दिल्ली में तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया।
बिहार ने सिर आंखों पर बिठाया
कन्नड़ मूल के जॉर्ज को बिहार ने सिर आंखों पर बिठाया। 1977 में जब आपतकाल हटा तो जॉर्ज बिहार के उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े। बड़ौदा डायनामाइट केस में बतौर आरोपी वे उस समय जेल में थे। उन्हें चुनाव प्रचार के लिए जमानत नहीं मिली। पर जेल में रहते हुए बंपर मतों से जीत दर्ज की। तब जॉर्ज तीन लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव जीते थे। जनता पार्टी सत्ता में आई तो बड़ौदा डायनामाइट केस को खत्म कर दिया गया। इस सरकार में जॉर्ज उद्योग मंत्री बनाए गए।

कोंकण रेल प्रोजेक्ट और जॉर्ज
साल 1989 मे विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में जॉर्ज रेल मंत्री बने। इसी दौरान उन्होंने मंगलुरु और मुंबई को जोड़ने के लिए कोंकण रेलवे प्रोजेक्ट का काम शुरू कराया। यह प्रोजेक्ट आजाद भारत में रेलवे के विकास में सबसे बड़ी और अनूठी परियोजना थी। जॉर्ज की लोकप्रियता का आलम ये है कि कोंकण रेल के उडुपी रेलवे स्टेशन के बाहर उनके नाम पर एक सड़क का नामकरण उनके जीवन काल में ही हो गया।
रक्षा मंत्री- सियाचिन का 18 बार दौरा 
रक्षामंत्री के रूप में जॉर्ज का कार्यकाल खासा विवादित रहा। उनके कार्यकाल में ताबूत घोटाला हुआ और तहलका खुलासा में नाम आने पर उन्हें इस्तीफा भी देना पड़ा। उनके कार्यकाल के दौरान परिस्थितियां इतनी खराब हो चली थीं कि मिग-29 विमानों को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ कहा जाने लगा था। वहीं दूसरा तथ्य यह भी है जॉर्ज भारत के एकमात्र रक्षामंत्री रहेजिन्होंने 6,600 मीटर ऊंचे सियाचिन ग्लेशियर का अपने कार्यकाल में 18 बार दौरा किया था।

सबके लिए खुले दरवाजे
जॉर्ज मुलाकात के लिहाज से सबके लिए सुलभ राजतनेताओं में से थे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में जॉर्ज फर्नांडिस जब रक्षा मंत्री थेतो उनका आवास तीन कृष्णा मेनन मार्ग हुआ करता था। उस समय उन्होंने अपने आवास का एक फाटक हमेशा के लिए हटवा दिया था। कोई उनसे मिलने आए और दरवाजे पर ही रोक दिया जाएये उन्हें पसंद नहीं था।

लैला कबीर से प्रेम और शादी
1971 में कोलकाता से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का इंतजार करते हुए जॉर्ज फर्नाडिस की मुलाकात लैला कबीर से हुई। वे रेडक्रॉस में अधिकारी थीं। विमान यात्रा के दौरान दोनों की दोस्ती हुई। 22 जुलाई1971 को जार्ज ने लैला शादी कर ली। लैला जाने-माने शिक्षाविद हुमायूं कबीर की बेटी थीं।

जया जेटली से नजदिकियां 
जनता पार्टी सरकार में जॉर्ज जिस महकमे के मंत्री थेउसमें नौकरशाह अशोक जेटली उनके सचिव थे। इसी दौरान अशोक की पत्नी जया से जॉर्ज की नजदीकियां बढ़ने लगीं। जया और अशोक कॉलेज में साथ पढ़े थे। जया के पिता जापान में भारत के पहले राजदूत थे। लैला अस्सी के दशक में जॉर्ज की जिंदगी से निकल गईं। हालांकि कोई औपचारिक तलाक नहीं हुआ। इस खाली जगह को जया ने भरा। वे 2009 तक जॉर्ज के साथ रहीं।
बुढ़ापा और बीमारी – लैला की वापसी
साल 2009 के आसपास 80 साल के जॉर्ज की सेहत काफी खराब रहने लगी। उनका सार्वजनिक जीवन खत्म सा हो गया। उन्हें पार्किसंस जैसी बीमारी होने की खबरें आने लगी थीं। इसका उनकी याददाश्त पर असर पड़ा था। वर्ष 2010 में लैला एक बार फिर अपने बेटे सुशांतो के साथ कृष्णा मेनन मार्ग स्थित जॉर्ज के सरकारी निवास पर पहुंची। आनन फानन में सबकुछ बदल गया। अब जया जेटली इस घर में प्रवेश बंद हो गया। 2009 के बाद से लैला लगातार जॉर्ज की तीमारदारी में जुटी रहीं। हालांकि जॉर्ज की सेहत में सुधार होने की खबरें नहीं आईं।

दस भाषाओं के जानकार - भाषण कला के माहिर
जॉर्ज 10 भाषाओं के जानकार थे। वे कन्नड़मराठीहिंदीअंग्रेजीतमिलउर्दूमलयालीतुलुकोंकणी और लैटिन बोल लेते थे। चुनावी सभाओं में वे हिंदीमराठीकन्नड़ या अंग्रेजी में तो धाराप्रवाह बोलते हुए सुने जाते थे। बिना किसी ठहराव के घंटों भाषण देने की क्षमता रखते थे। अपने भाषणों में सही तथ्य पेश करने के लिए भी वे जाने जाते थे।
-     कथन -
अगर कोई बागी नहीं होता तो देश को आजादी नहीं मिली होती। जॉर्ज जैसे बागी नेताओं को आते रहना चाहिए ताकि देश प्रगति और विकास कर सके।
-     लालकृष्ण आडवाणीवरिष्ठ भाजपा नेता ( 88वें जन्म दिन पर )


जीवन यात्रा ( 1930- 2019 ) 
1949 में नौकरी की तलाश में बॉम्बे आए और सामाजिक व्यापार संघ में शामिल हो गए।
1950 और 1960 के दशक में बॉम्बे में कई हड़तालों का नेतृत्व किया।
1967 में जॉर्ज ने मुंबई लोकसभा सीट के चुनाव में कांग्रेसी दिग्गज एसके पाटिल को हराया।
1971 में लैला कबीर से विवाह किया।
1974 में सबसे बड़ी रेलवे हड़ताल के मुख्य नेता।
1980 में मुजफ्फरपुर से फिर लोकसभा का चुनाव जीता
1984 में जॉर्ज और लीला कबीर एक दूसरे से अलग हो गए और जया जेटली उनकी साथी बन गईं।
1989 में जनता दल में शामिल हुए और मुजफ्फरपुर से फिर लोकसभा चुनाव जीता।
1994  में समता पार्टी की स्थापना की।
1998 में भाजपा की अगुवाई में बने कई दलों के गठबंधन एनडीए के संयोजक बने जॉर्ज।
2001 में रक्षा घोटाला सामने आने पर जॉर्ज ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
2009 में आखिरी बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए।
2010 में वे बाबा रामदेव के पतंजलि आश्रम हरिद्वार में उपचार के लिए गएपर खास लाभ नहीं हुआ। 
2019 – 29 जनवरी की सुबह दिल्ली में निधन।



Tuesday, 1 January 2019

साल 2019 में तकनीक - 5जी इंटरनेट से बढ़ेगी रफ्तार, बदल जाएगी मोबाइल की दुनिया

नई तकनीक से लैस कई उत्पाद 2019 में आपकी जिंदगी की आसान बनाने के लिए दस्तक देने वाले हैं। जहां 5जी इंटरनेट स्पीड से आप हाईडेफनिशन वीडियो मिनटों में डाउनलोड कर सकेंगे वहीं 5जी स्पीड वाले लैपटॉप भी बाजार में दस्तक देंगे। मोबाइल फोन की दुनिया में 3डी तस्वीरें इस्तेमाल का अनुभव बदल देंगी। इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर के बाजार में नए मॉडल की धूम रहेगी।

5जी से बढ़ेगी 20 गुना तक स्पीड
साल 2019 में इंटरनेट डाटा की दुनिया में 5G दस्तक देने वाला है। कई देशों में 5जी हाई स्पीड इंटरनेट सेवा की शुरुआत की जा सकती है।  इस सेवा के आ जाने के बाद इंटरनेट की स्पीड दस से बीस गुना तक बढ़ जाएगी।
फिलहाल 4जी पर सर्वाधिक स्पीड 45 एमबीपीएस तक की मिल सकती है। चिप बनाने वाली कंपनी क्वालकॉम का अनुमान है कि 5जी तकनीक इससे 10 से 20 गुना तक अधिक स्पीड हासिल कर सकती है। आप एक हाई डेफनिशन फिल्म को एक या दो मिनट में पूरा डाउनलोड करने की कल्पना कर सकते हैं। चीन भी 2019 में 5G लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

5जी लैपटॉप भी –
इंटरनेट की स्पीड में इजाफा होने के साथ ही लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां 5जी कंपिटेबल लैपटॉप बाजार में लांच करेंगी। इसके लिए एचपी, डेल, लेनेवो जैसी कंपनियों ने प्रोसेसर बनाने वाली कंपनी इंटेल के साथ साझेदारी की है।
रोलेबल टीवी
आप कल्पना कर सकते हैं कि एक छोटे से डिब्बे में पूरा टेलीविजन समा जाए। कोरिया की कंपनी एलजी ऐसा टीवी स्क्रीन बाजार में पेश करने जा रही है जिसकी स्क्रीन कागज की तरह गोल मुड़ जाती है। रोलेबल टीवी को कंपनी 2019 में लॉन्च कर देगी। कंपनी ने मोबाइल के लिए भी इस स्क्रीन का पेटेंट फाइल कर दिया है।
फोल्डेबल स्क्रीन मोबाइल -  सैमसंग मोबाइल कंपनी 2019 में फोल्डेबल स्क्री न वाला फोन गैलेक्सी एफ के नाम से पेश कर सकत है। फोल्डिंग स्क्रीन एक ऐसा डिस्प्ले है, जिसे कागज या कपड़े की तरह दो-तीन तह में मोड़कर रखा जा सकता है। सैमसंग, हुवाई और एलजी जैसी कंपनियां इस तरह की स्क्रीन बना रही हैं। सैमसंग ने तो फोल्डेबल फोन का दीदार भी करा दिया है।

नए इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर
प्रदूषण से जंग लड़ने के लिए दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों में इजाफा होगा। कार कंपनी हूंडई 2019 में भारत में पहला इलेक्ट्रिक वाहन लांच कर देगी। वहीं मारूति की 2020 में इलेक्ट्रिक कार लांच करने की तैयारी में है। पहले से ही इलेक्ट्रिक कार बना रही कंपनी महिंद्रा इलेक्ट्रिक कार के दो नए वर्जन 2019 में बाजार में पेश करेगी। इसके साथ ही कंपनी अपनी निर्माण क्षमता बढ़ाकर हर महीने 5000 इलेक्ट्रिक कारों तक ले जाएगी। स्कूटर कंपनी लंब्रेटा एक बार फिर भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ दस्तक देने की तैयारी में है।
मोबाइल फोन की दुनिया में यह भी -
आई ट्रैकिंग टेक्लोनोलाजी वाला होलोग्राफिक स्मार्ट फोन लांच करने की तैयारी है। इस तरह का फोन आपके नजर डालने से ही खुल जाएगा।
मोबाइल फोन में होलोग्राफिक एप्लिकेशन आएगा। इससे आप ऑनलाइन शॉपिंग और गेम्स आदि को ज्यादा जीवंतता से महसूस कर सकेंगे। उत्पादों की 3डी छवि देख सकेंगे।
स्मार्ट बिम नामक छोटा सा डिवाइस लांच होगा जिसे स्मार्ट फोन के साथ जोड़कर कहीं भी प्रोजेक्टर चलाया जा सकता है। इससे दीवार पर 100 इंच की साफ तस्वीर देखी जा सकेगी। इससे फिल्में देखना और कक्षा में पढ़ाना आसान हो जाएगा।
नन्हा अल्ट्रासोनिक यंत्र साफ करेगा कपड़े
डॉल्फी नामक साबुन की टिकिया के आकार का छोटा सा वाशिंग डिवाइस लांच होगा। इससे अल्ट्रासोनिक तंरगों की मदद से कपड़ों को साफ किया जा सकेगा। इससे न कपड़ों रगड़ने न निचोड़ने की जरूरत होगी। कपड़ों रंग भी नहीं उतरेगा। इस तकनीक से साफ हुए कपड़ों में आप तरोताजा महसूस करेंगे। कई धुलिया के बाद भी कपड़े नए जैसे रहेंगे। स्विटजरलैंड की कंपनी इस यंत्र का सफल परीक्षण कर चुकी है। यह वाशिंग मशीन की जरूरत को खत्म कर देगा।
एक नजर इधर भी
-   दुनिया भर में आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस और ब्लॉक चेन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा।
-   नासा आसमान में उड़ने वाले ड्रोन के प्रबंधन के लिए एरियल सिस्टम ऑफ ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू करेगा।
अमेजन हॉस्पिटली सेक्टर में-
ऑनलाइन रिटेलिंग में अग्रणी कंपनी अमेजन अब हॉस्पिटलिटी सेक्टर में उतरने की तैयारी में है। कंपनी हाउसक्लिनिंग और हैंडीमैन सेवाएं देने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही वह पर्यटन और रेस्टोरेंट सेवाओं में भी उतर सकती है।


Sunday, 9 December 2018

गुरु नानकदेव की पवित्र धरती पर उमड़ा लघु भारत


देश के 30 से ज्यादा राज्यों से 4000 से ज्यादा नौजवान जुटे पंजाब की पवित्र धरती सुल्तानपुर लोधी में 3 से 10 दिसंबर के बीच। सुल्तानपुर लोधी की वह पवित्र धरती जहां पहले गुरु गुरुनानक देव जी ने अपने जीवन के 15 साल गुजारे।

श्री गुरुनानक देव जी के 550 वें प्रकाश पर्व को समर्पित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर द्वारा राष्ट्रीय युवा योजना के सहयोग से गुरु नानक स्टेडियम में सात दिवसीय अंतर राष्ट्रीय सद्भावना और प्रगतियोगिता शिविर तीन दिसंबर को उत्साह के साथ आरंभ हुआ। शिविर में नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया सहित देश के 30 राज्यों से लगभग 4000 के करीब युवा शामिल हुए। वैसे तो शिविर की तारीख 3 से 10 दिसंबर है पर युवाओं के आने का सिलसिला तीन दिन पहले से ही जारी हो गया।

देश के कोने कोने से आए युवा गुरुद्वारा बेर साहिब, गुरुद्वारा बेबे नानकी के कमरे में तंबूओं में और बरामदे में डेरा डाले हैं। पंजाब में दिसंबर की कंपकपाती ठंड में उनमें एक अजब उत्साह नजर आ रहा है। पंजाब के कपूरथला जिले के छोटे से इस शहर में एक सप्ताह तक लघु भारत के दर्शन होते रहे।

गुरु साहिब की शिक्षाओं को आत्मसात करें
शिविर के उद्घाटन समारोह दौरान राष्ट्रीय युवा योजना के संस्थापक डॉक्टर एसएन सुब्बाराव ने संबोधित करते कहा कि पहले पातशाही श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं से प्रेरित होकर यह शिविर लगाया जा रहा है ताकि देश ही नही दुनिया के अन्य लोग भी गुरु साहिब की शिक्षाओं से अवगत हो सकें। सुब्बाराव ने कहा बुनियाद में सभी धर्मों का संदेश एक है। हिंदू, मुसलमान, ईसाई सहित सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं। हमारे लिए जीवन में सच्चा इंसान बनाना महत्वपूर्ण है। गुरु नानक देव जी ने कहा था- एक नूर ते सब जग उपजया, कौन भले कौन मंदे। यानी दुनिया के सभी धर्मों के लोग एक समान हैं।

इस सात दिवसीय अंतराष्ट्रीय सदभावना शिविर में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि दुनिया में सद्भावना, समरसता और समता की जरूरत है। सभी लोग विश्व शांति की परिकल्पना करते हैं लेकिन अपने विचारों को उस तरफ अग्रसर नहीं रहते। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार है जिसके हम सदस्य हैं। सभी को अपने कर्तव्यों को लेकर सजग होना चाहिए तभी देश तरक्की कर बुलंदियों को छू सकेगा।

इस मौके पर केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला ने कहा कि युवा शक्ति देश में परिवर्तन ला सकती है और युवाओं को पहले अपना कर्तव्य समझना होगा और फिर उसे निभाना होगा। 
अंतरराष्ट्रीय सदभावना कैंप के छठे दिन वालंटियरों की ओर से चेतना रैली निकाली गई। इस रैली को विधायक नवतेज सिंह चीमा की ओर से रैली को हरी झंडी देकर रवाना किया गया। इस चेतना रैली की शुरुआत गुरु नानक स्टेडियम से की गई जो गुरुद्वारा बेर साहिब से होती हुई निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी में खत्म हुई।

काली बेई नदी को साफ करने वाले चर्चित संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने वालंटियरों का स्वागत किया व उनको आशीर्वाद किया। संत सीचेवाल ने वालंटियरों को संबोधित करते कहा कि युवा पीढ़ी वातावरण संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अधिक से अधिक पौधे लगा कर उसकी संभाल करनी चाहिए।

प्लास्टिक फ्री सुल्तानपुर लोधी -  राष्ट्रीय युवा योजना के शिविरों में श्रमदान महत्वपूर्ण होता है। इस शिविर के दौरान युवाओं ने प्लास्टिक मुक्त सुल्तानपुर लोधी अभियान चलाया। पूरे शहर को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने के लिए हजारों हाथ उठ पड़े। इस दौरान स्वच्छ्ता अभियान, गुरुद्वारा साफ सफाई, रक्तदान शिविर, शासकीय अस्पताल की सफाई, रेलवे स्टेशन सफाई,  भाषा ज्ञान, सांस्कृतिक ज्ञान, जोड़ो भारत अभियान के बारे में भी सीखने का अवसर युवाओं को प्राप्त हुआ।

शिविर के आयोजन से जुड़े गुरुदेव सिंह सिद्धू कहते हैं कि पंजाब में इससे पहले 2500 युवाओं का शिविर आनंदपुर साहिब में लगा था। चार हजार से अधिक युवाओं का शिविर इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि देश भर से आए युवा जाति धर्म के नाम पर झगड़े खत्म करने का संदेश लेकर जा रहे हैं।
 - vidyutp@gmail.com  
( NYP, SULTANPUR LODHI ) 


Saturday, 24 November 2018

और अंडमान के लोगों ने उसे मार डाला...


अंडमान निकोबार में कई ऐसे प्रतिबंधित द्वीप हैं जहां भारतीय या विदेशी नागरिकों को जाने से मनाही है। ऐसा उन आदिम जातियों के संरक्षण के ख्याल से किया गया है। उनकी कम होती संख्या चिंता का विषय बन चुकी है। पर साल 2018 के अक्तूबर नवंबर महीने में एक अमेरिकी नागरिक ने सेंटनिलीज लोगों के द्वीप पर जाने की कोशिश की और वह मारा गया।

अंडमान के सेंटिनल द्वीप में नवंबर 2018 में मारे गए 27 साल के अमेरिकी नागरिक जॉन ऐलन चाऊ का मकसद इन अनजान आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म का प्रचार करना था। चाऊ ने दो बार इस द्वीप पर पहुंचने की कोशिश की थी। 14 नवंबर को उसकी पहली कोशिश नाकाम रही थी। इसके बाद 16 नवंबर को वह पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था। पर गुस्साए आदिवासियों ने उस पर तीर से मार डाला। चाऊ इससे पहले पांच बार अंडमान आ चुका था।
जॉन ऐलन चाऊ सात मछुआरों के साथ बिना इजाजत एडवेंचर ट्रिप पर नॉर्थ सेंटिनल द्वीप गया था। वह सेंटिनेलीज जनजाति के लोगों के साथ मित्रता की कोशिश कर रहा था। पर कहा जा रहा है कि जनजातीय लोगों ने उसकी हत्या कर उसके शव को रेत में ही गाड़ दिया।

अंडमान में सेंटनिलीज के हमले में नवंबर 2018 में मारे गए अमेरिकी युवक पर पहले दिन जनजातीय लोगों ने तीर से हमला किया था। पर छाती पर रखे बाइबिल के कारण उसकी तब जान बच गई। नाव वापस लौटने के बाद उसने नोट्स में लिखा-  हे पिता उन्हें क्षमा कर देना।

दरअसल स्थानीय मछुआरों की सहायता से छोटी सी नाव में उत्तर सेंटनील द्वीप पर जाकर जॉनने 16 नवंबर जनजातीय लोगों के मिलने की कोशिश की थी। उसके हाथ में एक फुटबॉल औरबाइबिल था। उसने द्वीप पर जनजातीय लोगों से बात करने की कोशिश की। पर तब एक दससाल की आसपास के उम्र के सेंटनिलीज ने जॉन एलन पर तीर चलाकर हमला किया था। पर तबउसने अपने सीने पर बाइबिल रखा हुआ था। उसकी जान बच गई। इसके बाद जॉन अपनी नाव परलौट आया। रात को उसने अपने पहले दिन के संस्मरण के नोट्स लिखे थे। इसमें जॉन ने लिखा है- मैंने उनसे कहा, मेरा नाम जॉन है। मैं आपको प्यार करता हूं। जीसस भी आपको प्यार करते हैं।मैं आपके लिए फुटबॉल और मछलियां लाया हूं। पर उसका संवाद सफल नहीं हुआ। हमले सेबचकर वह पहले दिन अपनी नाव पर लौट आया। अगले दिन वह दोबारा द्वीप पर पहुंचा। पर इसबार वह वापस नहीं लौट सका।

अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाउ पिछले माह  16 अक्टूबर को अंडमान निकोबार पहुंचा था।अपने एक दोस्त के घर रुकने बाद उसने सेंटेनिलीज आदिवासियों से मिलने की इच्छा जाहिर कीथी। अंडमान के सीआईडी के अधिकारी ने बाया कि जॉन एलन चाऊ एक ईसाई मिशनरी से जुड़ाथा और वो इन आदिवासियों के बीच धर्म प्रचार करना चाहता था।
 चाउ के परिवार ने भी माफ किया
चाऊ के परिवार ने इंस्टाग्राम पर बयान जारी कर उसके निधन पर दुख जताया है। परिवार नेलिखा है कि वह एक प्यारा पुत्र, भाई, अंकल था। उसके दिल में सेंटनिलीज के प्रति प्यार था। हमउन लोगों को माफ करते हैं जो उसकी मौत के लिए जिम्मेवार हैं। साथ ही हम चाहते हैं कि उसकेउन दोस्तों रिहा कर दिया जाए जिन्होंने अंडमान में उसकी मदद की। परिवार ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसका बेटा ईसाई मिशनरी था। लेकिन वह एक फुटबॉल कोच और पर्वतारोहीभी था। वह दूसरों की मदद करने को तत्पर रहता था।
अंडमान के डीजीपी दीपेंद्र पाठक ने मीडिया को बताया चाऊ छठी बार पोर्ट ब्लेयर की यात्रा कर रहा था। उसने मछुआरों को उत्तरी सेंटिनल द्वीप जाने में मदद के लिए25 हजार रुपये दिए। मछुआरे 15 नवंबर की रात उन्हें आइलैंड के पश्चिमी सीमा तक एक छोटी नाव से ले गए। वहां से अगले दिन चाऊ एक नाव लेकर अकेले ही आइलैंड तक गए। पुलिस ने 13 पन्नों का नोट अपने कब्जे में ले लिया है जिसे चाऊ ने लिखा था और द्वीप पर जाने से पहले मछुआरों को सौंप दिया था।
60 हजार पुराना आदिवासियों का कबीला
पोर्ट ब्लेयर से 50  किमी दूर सेंटिनेल द्वीप पर दुनिया से कटे आदिवासियों की तादाद बेहद कम है। इस द्वीप पर आदिवासियों का यह बेहद विलुप्तप्राय समुदाय रहता है। अंडमान निकोबार के नॉर्थ सेंटिनल द्वीप में 60 हजार साल पुराना आदिवासियों का कबीला है। इस समूह से मिलने की इजाजत किसी को नहीं है। साल 2006 में रास्ता भटकर सेंटिनेल द्वीप पर पहुंचे दो नाविकों को भी सेंटिनेलीज ने मार डाला था।
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