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Thursday, 19 November 2020

डॉक्टर राधाकृष्ण सिंह - फ्रेंड, फिलास्फर और गाइड का चले जाना

 एक दिन अचानक वे इस तरह चले जाएंगे इसका अंदेशा न था। डॉक्टर राधाकृष्ण सिंह पटना से साहित्य, पत्रकारिता और राजनीति के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर थे। मेरे लिए वे फ्रेंड, फिलास्फर गाइड जैसे थे। बड़े भाई भी, प्रशिक्षक भी मार्गदर्शक भी। पर कितना दुखद रहा कि उनके न रहने की खबर मुझे देर से मिली। 23 अगस्त 2020 रविवार को दिन बड़ा मनहूस था, 58 साल की उम्र में उनका अचानक हृदय गति रुकने से निधन हो गया। कुछ दिन पहले ही तो उन्होंने फोन करके मेरा हाल चाल पूछा था। 

राधाकृष्ण सिंह की शुरुआत पटना विश्वविद्यालय के जुझारू छात्र नेता के तौर पर हुई। उन्होंने पटना नवभारत टाइम्स में शिक्षा प्रतिनिधि के तौर पर काम किया। उन्होंने हिंदी के प्रकांड विद्वान प्रोफेसर निशांतकेतु के अधीन हिंदी भाषा में ओशो साहित्य पर शोध किया था। 

मेरा उनसे परिचय कुछ यूं हुआ कि वे तीसरी आंख नामक पत्रिका का संपादन करते थे। मैं उस पत्रिका में डाक से अपनी रचनाएं भेजता था। तब मैं कविताएँ लिखता था। पत्र व्यवहार के बाद उनसे मिलना हुआ। तब पटना के महेंद्रू मुहल्ले में पीडी लेन में एक मकान में वे रहते थे। वहीं पहली बार उनसे मिलना हुआ था। उनसे एक परिचय के बाद तमाम लोगों से उनके कारण परिचय हुआ। उनके पड़ोसी प्रकाश चंद्र ठाकुर, प्रकाश पंचम, डॉक्टर सचिदानंद सिंह साथी, डॉक्टर ध्रुव कुमार। जब मैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययन रत था तो एक दिन राधाजी का पत्र लेकर मेरे कमरे में राघवेंद्र सिंह आए। उनकी कोई परीक्षा थी बनारस में। बाद में राघवेंद्र जी भी बिहार की राजनीति में सक्रिय हो गए। 

राधाकृष्ण शुरुआत के दौर में कांग्रेस में सक्रिय थे। एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। बाद में राष्ट्रीय जनता दल में आए। साल 2005 में राजद के टिकट पर चेरिया बरियारपुर से चुनाव लड़े। अच्छी चुनौती दी पर जीत नहीं सके। कभी वे लालू परिवार के बहुत करीबी थे, उन्होंने एक किताब लिखी थी - राबड़ी देवी का राज्यारोहण। काफी समय वे राजद के प्रवक्ता भी रहे। वे प्रोफेसर रामबचन राय के साथ हुआ करते थे। 

नव भारत टाइम्स, आज, प्रभात खबर,  राष्ट्रीय नवीन मेल जैसे अखबारों में संवाददाता के तौर पर काम करने के बाद वे अध्यापन के क्षेत्र में आ गए। मतलब वे पत्रकार, साहित्यकार, राजनेता और शिक्षाविद सब कुछ थे।  बाद में पटना ट्रेनिंग कॉलेज में शिक्षक हो गए। वहां बीएड के छात्र पढ़ते थे। उसके बाद वे पावापुरी में वीरायतन बीएड कॉलेज में प्राचार्य हो गए। इसके बाद पटना के मुंडेश्वरी बीएड कॉलेज के प्राचार्य हुए। आखिरी दिनों में आरएल महतो ट्रेनिंग कॉलेज दलसिंहसराय के प्राचार्य थे। राधाकृष्ण मंच के अच्छे वक्ता होने के साथ कलम के धनी थे। उनकी लेखनी बड़ी सुंदर थी। शब्द विन्यास के धनी थे। पटना के तमाम नवोदित पत्रकारों को वे प्रेस रिलीज बनाना सिखाते थे।   

संयोग से पटना में ही 2003 फरवरी में मेरा विवाह हुआ तब वे मेरी शादी में अपनी पत्नी के साथ आए थे। हर साल कुछ मौकों पर उनसे मिलना हो जाता था। अपने जीवन के आखिरी  दिनों में पटना के कांटी फैक्टरी रोड में बुद्धा डेंटल कॉलेज के पास रहते थे। वे मूल रूप से बेगुसराय जिले के वीरपुर प्रखंड का गाड़ा गांव के निवासी थे। 

जब मैं पटना में हूं तो उनके साथ किसी न किसी साहित्यिक या राजनीतिक आयोजन में जाने का मौका जरूर मिलता था। भले वे विधानसभा या विधान परिषद में नहीं जा सके, पर राजनीति के गलियारे में उनका काफी सम्मान था। जाने के लिए 58 साल की उम्र ज्यादा नहीं होती, पर ईश्वर को यही मंजूर था। कुछ साल पहले उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। उसके बाद वे थोड़े कमजोर जरूर हो गए थे पर जिजीविषा में कोई कमी नहीं थी। एक दिन उनके नंबर फोन किया। छोटे भाई प्रफुल्ल ने फोन उठाया, बोेल भैया तो नहीं रहे। जिससे आपने लिखने, बोलने के तरीके सीखे हों उसका यूं चले जाना सुनकर बड़ा झटका लगा। पर सिर्फ शरीर साथ छोड़ जाता है। आत्मा तो अमर है ना। वे अच्छी आत्माएं अपनों को प्रेरित करती रहती हैं। तो उनका भी मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा। ऐसा प्रतीत होता है। हम आपको अलविदा नहीं कह सकते। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 


 


Thursday, 12 November 2020

बिहार विधान सभा चुनाव 2020 के नतीजों के निहातार्थ

बिहार विधान सभा चुनाव 2020 के नतीजे बड़े रोचक रहे। दस नवंबर को हुई मतगणना में पहले पोस्टल बैलेट में राजेडी नीत महागठबंधन आगे जाता दिखा। पर दोपहर के बाद एनडीए की सीटें बढ़ने लगी। शाम को कुछ घंटे ऐसा वक्त रहा कि कौन जीतेगा कहना मुश्किल था। पर अंतिम नतीजों में एनडीए को 125 और महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं। अंतिम नतीजे कुछ ऐसे रहे -

राजद - 75

कांग्रेस 19 

सीपीआई एमएल - 12

सीपीआई - 02 

सीपीएम - 02  महागठबंधन कुल - 110

एनडीए खेमे के दल 

भाजपा - 74 

जदयू 43

हम -04

वीआईपी 04

दूसरे दल 

एमआईएम - 05

लोजपा -01

बसपा 01

स्वतंत्र 01

कुल 125 सीटें जीतकर एनडीए सरकार बनाने की स्थिति में है। पर ये सरकार पूर्ण बहुमत में ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। वीआईपी की 4 और हम की 4 सीटें हैं। इनमें से कोई भी एक दल नाराज हुआ तो सरकार अल्पमत में आ सकती है। बिहार विधान सभा की कुल 243 सीट में से बहुमत के लिए 122 सीटों का होना जरूरी है। वहीं इस बार के नतीजो में सत्तारुढ़ जदयू की सीटें 71 के मुकाबले घट कर 43 पर आ गई हैं। इसलिए इस बार बिहार को लंबे समय से सेवाएं दे रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा, हम, वीआईपी के दबाव में काम करने को मजबूर होंगे। 

उधर महागठबंधन के पास 110 सीटें हैं। अगर ओवैसी की पार्टी एमआईएम उनके साथ जाती है तो वे 115 पर आ जाएंगे। कभी हम और वीआईपी भाजपा से नाराज हो गए तो महागठबंधन के पास 123 का आंकड़ा हो जाएगा फिर पासा पलट सकता है।

अब बात एक-एक उम्मीदवार के जीत की। बिहार में बसपा ने एक सीट जीती है। भभुआ जिले के चैनपुर से बसपा के मोहम्मद आजम खान जीते हैं। वे किधर जाएंगे वे खुद तय करेंगे। अकेले उम्मीदवार के लिए जरूरी नहीं कि वह पार्टी लाइन को माने। वह चाहे तो किसी भी दल में विलय कर सकता है। 

वहीं राम विलास पासवान के निधन के बाद चिराग पासवान की पार्टी लोजपा अकेले लड़ी थी। उसके एक उम्मीदवार राज कुमार सिंह बेगुसराय के मटिहानी से जीते हैं। वे बिहार के बाहुबली रहे कामदेव सिंह के बेटे हैं। उन्होंने जदयू के बाहुबली नेता बोगो सिंह को हराया है। राजकुमार काफी पढ़े लिखे पर दबंग नेता हैं। वे किसको समर्थन देंगे यह भी वे भविष्य में खुद तय कर सकते हैं।  

जमुई जिले के आदिवासी बहुल चकाई से सुमित कुमार सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की है। हालांकि वे जदयू से टिकट की इच्छा रखते थे। अब वे अपना समर्थन किसे देंगे, यह वे खुद तय करेंगे। उनके दादा कृष्णानंद सिंह दो बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से विधायक रह चुके हैं। उनके भाई अभय सिंह भी विधायक रह चुके हैं। बिहार विधानसभा में एमआईएम के पांच और तीन अकेले जीत दर्ज करने वाले विधायकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। 

बिहार चुनाव के 2020 के नतीजों की बात करें तो दर्जनों ऐसी सीट हैं जहां जीत हार 1000 से भी कम मतों से हुई है। ये काफी स्पष्ट है कि 31 साल तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन ने काफी आक्रमकता से चुनाव लड़ा। ज्यादातर एग्जिट पोल ने राज्य में महागठबंधन की सरकार बनने की भविष्यवाणी की थी। पर मतगणना में देर शाम नतीजे पलटते नजर आए। जीत का मामूली अंतर बिहार की राजनीति में उथलपुथल का माहौल बनाए रखेगा। 


बिहार 2015 के नतीजे

 राजद  80  जदयू 71  कांग्रेस – 27 ( गठबंधन था ) 

भाजपा – 53 लोजपा – 02 (43 ) रालोसपा – 02 (23)

हम 01 ( 21) 

सीपीआई एमएल – 03


बिहार – 2010 के नतीजे

जदयू 115 भाजपा 91  (गठबंधन ) 

राजद 22 एलजेपी 03  ( गठबंधन ) 

कांग्रेस – 04  ( अकेले लड़ी थी ) 

सीपीआई 01

जेएमएम 01

स्वतंत्र  06 


Thursday, 1 October 2020

लालकृष्ण आडवाणी की हाजीपुर शहर में वह आखिरी सभा

वह 22 अक्तूबर 1990 की रात थी। हाजीपुर शहर का कलेक्ट्रेयेट मैदान। हजारों लोग जमा थे। इंतजार था भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का। वे सोमनाथ से अय़ोध्या की यात्रा लेकर चल रहे थे। उनके पहुंचने का समय रात के नौ बजे का था। एक घंटे देर से उनका रथ पहुंचा। साथ में उनके सारथि प्रमोद महाजन भी थे। लाल कुरता पहने हुए। भीड़ आडवाणी को सुनने के लिए बेताब थी। जैेसे ही आडवाणी जी मंच पर चढ़े भीड़ ने नारा लगाया - सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे... आडवाणी जी ने बोलना शुरू किया - बिल्कुल सही नारा है ये। मुझे सुनकर अच्छा लगता है जब लोग ये नारा लगाते हैं। मुझे अच्छा नही लगता है जब कुछ नौजवान मोटर बाइक पर चलते हुए कंधे उचकाकर नारा लगाते हैं - एक धक्का और दो...बाबरी मसजिद तोड़ दो... 

आडवाणी जी बोले, भला तोड़ने की क्या जरूरत है। वहां तो कोई मस्जिद है ही नहीं। वहां कभी नमाज नहीं पढी जाती। वहां राम लला विराजमान हैं। हमें अयोध्या में मंदिर बनाना है। प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनाना है। पर यह हाजीपुर शहर में आडवाणी जी का रथयात्रा के दौरान आखिरी भाषण साबित हुआ। अगले दिन सुबह रेडियो पर हमने समाचार सुना। 23 अक्तूबर 1990 की सुबह आडवाणी जो समस्तीपुर शहर में गेस्ट हाउस में सुबह सुबह सोते हुए ही  गिरफ्तार कर लिया गया। तब बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। लालू प्रसाद ने आडवाणी की अयोध्या तक रथयात्रा पूरी नहीं होने दी। रथ रुक गया। यात्रा अधूरी रही। आडवाणी को गिरफ्तार करने वाले समस्तीपुर के कलेक्टर थे राज कुमार सिंह। जो बाद में भाजपा से सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री बने। ईश्वर ने आडवाणी जो अच्छी सेहत लंबी जिंदगी दी है। नब्बे के पार में भी वे दमखम रखते हैं। पर आडवाणी अयोध्या के हीरो नहीं बन पाए। देश के प्रधानमंत्री भी नहीं बन पाए। राष्ट्रपति भी नहीं बन पाए। समस्तीपुर में आडवाणी जो गिरफ्तार करने के बाद दुमका ले जाकर सरकारी गेस्ट हाउस में रखा गया। तब झारखंड नहीं बना था। दुमका बिहार का हिस्सा था। 

राम मंदिर आंदोलन समय ये नारे देश भर में खूब लगते थे। एक धक्का और दो बाबरी मस्जिद तोड़ दो। छह दिसंबर 1992 को जो हुआ उसे पूरे देश ने देखा। 


30 सितंबर 2020 को लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, कल्याण सिंह, विनय कटियार जैसे तमाम नेता मस्जिद गिराए जाने के आरोप से बरी कर दिए गए। सीबीआई अदालत में इन नेताओं के खिलाफ मजबूत सबूत नहीं पेश कर पाई। 

पर आखिर बाबरी मसजिद गिराई किसने। देश भर से हजारों कारसेवक जमा थे। जो लोग मसजिद की छत पर चढ़ गए थे, जाहिर है कि वे लोग भी कारसेवक ही थे। दुनिया ने इबादत घर को गिरते हुए देखा। पर अदालत में किसी पर दोष साबित नहीं हो सका। 6 दिसंबर 1992 को मसजिद गिराए जाने के बाद संघ भाजपा के बड़े नेता गिरफ्तार किए गए। लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर गिरफ्तार हुए। इस बार उन्हें ललितपुर जिले के तालबेहट के पास माताटीला गेस्ट हाउस में नजरबंद करके रखा गया। यह संयोग ही रहा कि मुझे कई साल बाद उस शानदार गेस्ट हाउस में भी एक दिन रहने का मौका मिला। 

कहा जाता है कि राम मंदिर आंदोलन के सबसे बड़े नेता अशोक सिंघल भी मस्जिद की इमारत गिराने के पक्ष में नहीं थे। पर देश भर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के आम कार्यकर्ताओं में ये विचार प्रमुखता से भर दिया गया था  कि अयोध्या में बाबर के नाम पर कही जाने वाली किसी इमारत का अस्तित्व नहीं रहना चाहिए। इस इबादत घर के गिराए जाने के बाद देश भर में गर्व से नारे लगते थे - जय श्रीराम...हो गया काम...। पर क्या सचमुच काम हो गया। 

हम एक भव्य राम मंदिर अयोध्या में बना रहे हैं। यह देश का दूसरा सबसे विशाल मंदिर होगा। पर यह राम मंदिर हिंदू आस्था का एक प्रतीक मात्र ही होगा। जरूरत है तो है पूरे देश में राम राज्य लाने की। एक ऐसे न्यायप्रिय देश की जहां बाघ और बकरी एक घाट पर पानी पी सकें। एक ऐसे समाज के निर्माण की जहां कोई खुद को दलित, शोषित या पिछड़ा न समझ सके, तभी सच्चे अर्थों में राम राज्य आ सकेगा। 

रथयात्रा की कुछ और बातें यहां पढ़ें -  https://www.news18.com/news/politics/wont-spare-you-when-lalu-got-advani-arrested-in-1990-for-taking-out-rath-yatra-in-bihar-2092239.html

- विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com - ( 30 सितंबर 2020 ) 


 



Tuesday, 21 July 2020

सामाजिक न्याय के एक पुरोधा का चले जाना

रामअवधेश सिंह ( 1937-2020 )

पूर्व सांसद तथा पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य राम अवधेश सिंह का 20 जुलाई 2020 निधन हो गया। उन्होंने 83 वर्ष की अवस्था में पटना के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। भोजपुरिया माटी लाल राम अवधेश सिंह बिहार के चंद पढ़े लिखे नेताओं में से एक थे। 

मंडल कमीशन लागू करवाने में उनका सर्वाधिक योगदान था। वे डॉ. राममनोहर लोहिया के प्रबल समर्थकों में गिने जाते थे। उन्हें नमन , विनम्र श्रद्धांजलि।

उनका जन्म 18 जून 1937 को हुआ था। वे 1969 में बिहार विधानसभा के सदस्य और 1977 से 1979 तक लोकसभा के सदस्य रहे। वे 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा का चुनाव जीते। उन्होंने 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर बिक्रमगंज से चुनाव जीता था। बाद में एक बार राज्यसभा के भी सदस्य रहे। उन्हे गॉड फादर ऑफ मंडल कमिशन और पेरियार ऑफ नार्थ इंडिया भी कहा जाता था। वे बिहार के भोजपुर जिले के पीपरा (दुलारपुर) गांव के रहने वाले थे।
उनके निधन पर राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा - वयोवृद्ध लोकसमतावादी पूर्व सांसद श्री रामअवधेश सिंह जी के निधन की खबर दुखदायी है। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिजनों को संबल की कामना करता हूं। आज सड़क से सदन तक पिछड़ो, शोषितों, वंचितों व दलितों के हक में आवाज बुलंद करने वाला सामाजिक न्याय का मसीहा खो गया !
- vidyutp@gmail.com 

Friday, 8 May 2020

लॉकडाउन डायरी - गुलमोहर के संग जिंदगी

पटना में खिले गुलमोहर ।  फोटो - अनादि अनत
बेटे अनादि ने पटना से गुलमोहर के फूलों की तस्वीर भेजी है। हमारे मुहल्ले में गुलमोहर खिल उठे हैं। वे उम्मीद जगा रहे हैं। आने वाले दिन बेहतर होंगे।  लॉकडाउन में रहते हुए मार्च, अप्रैल के बाद अब मई का महीना शुरू हो गया है। तमाम लोग दावे कर रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण देश में कम मामले बढ़े हैं। पर अर्थशास्त्री रघुराम राजन का कहना है कि इस तरह की बंदी ज्यादा देर तक नहीं चलाई जा सकती। इसका बुरा असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ेगा साथ ही निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग की हालत बहुत खराब हो जाएगी। 

01 मई शुक्रवार 38वां  दिन - आज मजदूर दिवस है। पर मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। इधर उधर फंसे हुए लाखों मजदूर अपने घर जाने की राह देख रहे हैं। हमारे रोहतास जिले में 51 मरीज हो गए हैं। सासाराम में 6 नए केस मिले हैं शुक्रवार को। जिले में मुरादाबाद, नोखा, बभनौल, उसरी, परमेश्वरपुर, हरकमल गांव में कोरोना के नए मरीज मिले हैं। कपसिया सोहवलिया से राममूर्ति फूंफा का फोन आया, उनके गांव के बगल मे हटना से भी केस मिल गया है। 
मजदूरों को अपने गृह राज्य में भेजने के लिए सरकार स्पेशल ट्रेन चलाने लगी है। 
लॉकडाउन में दो हफ्ते का और विस्तार देकर इसे 17 मई तक बढ़ा दिया गया। देश के रेड, आरेंज, ग्रीन तीन हिस्सों में बांटा गया है। ग्रीन और आरेंज जोन में 4 मई से कुछ सेवाएं शुरू की जाएंगी। गाजियाबाद अभी आरेंज जोन में है। यहां पर लोग अपने जिले में निजी वाहन या कैब से सफर कर सकेंगे। 
02 मई शनिवार - 39वां दिन - सरकार ने रेड जोन में भी कुछ रियायतों का ऐलान किया है। वैसे दुनिया के आधे देश 4 मई से कई तरह की कारोबार शुरू करने जा रहे हैं। कई देश अब कोरोना के संग जीने की बात कर रहे हैं। दिल्ली में कोरोना से तीन लोगों की मौत हुई तो महाराष्ट्र में 36 देश भर में 71 लोग काल के गाल में समा गए। दिल्ली में लोकपाल सदस्य जस्टिस एके त्रिपाठी का कोरोना से निधन हो गया। एक दिन में देश आज ढाई हजार मामले आए। दिल्ली में सीआरपीएफ के एक कैंप के 135 जवान संक्रमित हैं तो कापसहेड़ा बार्डर में एक ही बड़े घर में रहने वाले सारे लोग। 
दरअसल सेंपल लेने के बाद जांच की रिपोर्ट आने में कई कई दिन लग जा रहे हैं। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंसन में केवी सृष्टि में एक केस आने के बाद सोसाइटी सील कर दी गई है। रोहतास जिले में रोज कुछ नए मामले बढ़ रहे हैं। 

03 मई रविवार 40वां दिन - ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में आज से कुछ छूट की शुरुआत हो रही है। पर गाजिबाद जिले में अभी कोई छूट नहीं होगी। देश में कोरोना से आज 83 लोगों की मौत हुई। मरने वालों का आंकड़ा 1306 हो गया। दिल्ली में आज सुबह और शाम मे ंफिर बारिश हुई। इससे मौसम ठंडा रहा। हमारे घर के आसपास दिलशाद गार्डन और शालीमार गार्डन में कोराना के मामले ठीक हो गए हैं। जो ब्लॉक सील हुए थे उन्हें खोल दिया गया है।  मैं आज दो दिन बाद नीचे उतरा सब्जियां लेने के लिए। बेटा वंश से बात हुई वह मजे में है। 
04 मई सोमवार, 41वां दिन - दिल्ली रेड जोन में है पर आज से कई तरह की रियायतें शुरू हो रही हैं। दिल्ली में शराब की दुकानें खुलते ही लोगों की लंबी लाईनें लग गई। कई और शहरों में ऐसा ही हुई। इससे सोशल डिस्टेंसिंग धज्जियां उड़ी। उधर आज 83 लोगो ंकी मौत हो गई कोरोना से। यह अब तक सबसे ज्यादा है। पिछले तीन दिन में देश में नए मामलों की संख्या भी बढ़ गई है। इधर कोरोना का कहर उधर सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं। कल पांच और आज तीन जवान शहीद हो गए। 

05 मई मंगलवार, 42 वां दिन - कई जगह फैक्टिरयों में उत्पादन शुरू हो रहा है। पर सार्वजनिक परिवहन नहीं शुरू होने के कारण लोगों को दिक्कत हो रही है। देश में कोरोना से 194 लोगों की मृत्यु हो गई। एक दिन यह सर्वाधिक है। आज सबसे ज्यादा केस भी सामने आए। तीन हजार से ज्यादा। इस बीच कई और राज्यों में शराब की दुकानें खोले जाने की तैयारी है। हमारी कालोनी में दवा राशन के अलावा हार्डवेयर, बरतन, स्टेशनरी की दुकानें भी खुलने लगी हैं। दुकानों का समय शाम सात बजे तक कर दिया गया है। 

06 मई बुधवार, 43वां दिन - पानीपत में तीन पत्रकार भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वे दो हिंदी समाचार पत्रों से हैं। वहीं नोएडा फिल्म सिटी में नेटवर्क 18 चैनल के एक न्यूजरूम के पत्रकार का भी कोरोना पॉजीटिव हो गया है। देश में आज भी 101 लोगों की मौत हो गई। सासाराम में परमेश्वर प्रताप से बात हुई। राहत है कि जिले में दो दिन से केस नहीं बढ़ रहे। पहले से पीड़ित में से भी कई लोग ठीक हो गए हैं। 
परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में सार्वजनिक आवागमन के साधन जल्द खोले जाएंगे। हां उनमें भी सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुए सफर हो सकेगा। 
07 मई, गुरुवार 44 वां दिन -  दिल्ली के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 10 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश की घोषणा कर दी गई है। आज कई दिनों बाद मैं साप्ताहिक अवकाश पर रहा। मुंबई में वरिष्ठ पत्रकार आनंद भारती जी से बात हुई। बातों बातों में उनसे पता चला कि आलोक रंजन नहीं रहे। आलोक रंजन हाजीपुर में लंबे समय तक रहे भोजपुरी फिल्मों के गीतकार डॉक्टर उमाकांत वर्मा के बेटे थे। आलोक भैया मुंबई में हिंदी फिल्मों के वरिष्ठ पत्रकार थे। हालांकि उनका निधन दो साल पहले हुआ पर कोई संपर्क नहीं होने के कारण मुझे ये खबर इतनी देर से मिली। 
कई दिनों बाद आज मां से बात हुई। रोहतास जिले में दो नए केस आए हैं। वहां अब 54 संक्रमित हैं। हालांकि इसमें से काफी लोग ठीक भी हो रहे हैं। लॉकडाउन के 40 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी मजदूरों का पैदल पैदल चलकर अपने गांव से जाने का सिलसिला जारी है। स्वराज एक्सप्रेस चैनल पर गुरमीत सप्पल की रिपोर्ट में देख रहा हूं कि पुलिस हाईवे पर चलने वालों की पिटाई कर रही है तो मजदूर सड़क के किनारे खेतों से रास्ता तय कर रहे हैं। 



कई राज्यों को लगने लगा है कि ये बाहरी राज्यों के मजदूर हमारे लिए बहुत पड़ा श्रम साधन है इसलिए वे उन्हें घर जाने से रोक रहे हैं। कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार मजदूरों को अपने राज्य जाने से मना कर रही है।
08 मई, शुक्रवार - 45 वां दिन -  रोहतास जिले में एक 70 साल के बुजुर्ग की कोरोना से मौत हुई है। वहीं आगरा में पंकज कुलश्रेष्ठ नामक दैनिक जागरण के युवा पत्रकार ने भी इस बीमारी से दम तोड़ दिया।   
महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश के शहडोल जा रहे 16 मजदूरों की जलगांव में ट्रेन से कटकर मौत हो गई। वे लोग पैदल घर जा रहे थे। रात में थककर ट्रेन की पटरी पर ही सो गए थे। देश में आज कोरोना से 103 लोगों की मौत हुई। बिहार के 38 में से 35 जिलों में संक्रमण पहुंच गया है। पटना में आज 45 दिन बाद समान्य दुकाने खुली तो भीड़ उमड़ पड़ी। देश के कई हिस्सों में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। 
अहमदाबाद शहर की हालत काफी खराब हो गई है। वहां दवा और दूध को छोड़कर सारी दुकानें बंद कर दी गई हैं। लोग घर में ही रहें इसके लिए अर्ध सैनिक बलों की तैनाती शहर में की गई है। मुंबई में रह रहे घुमक्कड़ी दिल से समूह से जुड़े साथी प्रतीक गांधी से फोन पर लंबी बात हुई। 

09 मई शनिवार, 46वां दिन - केनरा बैंक के वाशिंगटन डीसी शाखा में कार्यरत बचपन के दोस्त अभय से बात हुई। वे न्यूयार्क में क्वींस इलाके फ्ससिंग में रहते हैं। वे बताते हैं कि किस तरह दुनिया के सबसे संपन्न और विकसित समझे जाने वाले राज्य में भी कोरोना का खौफ बरकरार है। 
देश में आज कोरोना से 95 लोगों की जान गई। मौत का कुल आंकड़ा दो हजार के करीब पहुंच गया है। इस बीच दुनिया के अलग अलग देशों में फंसे लाखों भारतीय लोगों को स्वदेश लाने का सिलसिला शुरू हो गया है। पर ऐसे आने वाले लोगों को 14 दिन तक क्वारंटाइन किया जा रहा है। 
10 मई रविवार, 47वां दिन - इस कोरोना काल में कई पुराने दोस्तों से बात करके अच्छा लगता है। हर रोज दिन में किसी पुराने दोस्त की आवाज उर्जा देती है। कई पुराने रिश्तेदार भी ढूंढते हुए फोन कर देते हैं तो बड़ी खुशी होती है। आज 128 लोगों ने देश में जान गंवाई। हैदराबाद से यूपी आ रहे पांच मजदूरों की मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में दर्दनाक मौत हो गई। दो दिन पहले जलगांव में 16 मजदूरों की मौत के बाद फिर ये हादसा। इस बीच केंद्र सरकार 12 मई से 15 जोड़ी ट्रेनें रोज चलाने का फैसला लिया है। ये दिल्ली से प्रमुख 15 शहरों के लिए चलाई जाएंगी। 
11 मई सोमवार, 48वां दिन -  जिस मात्रा में रेलगाडियां और बसें चलाई जा रही हैं उससे कई गुना संख्या में लोग अपने घर जाना चाहते हैं। वहीं यात्रा करने वालों से संक्रमण फैलने का खतरा भी है। आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शाम चार बजे की जगह छह बजे के बाद टिकट बुकिंग शुरू हुई। पटना के लिए दो रेलगाडियां हैं। कुछ घंटे में अगले पांच दिन की टिकटें फुल हो गईं। मैंने अभी माधवी और वंश को बुलाने पर कोई निर्णय नहीं लिया है। 
उधर देश में आज कोरोना से 97 लोगों की जान गई। प्रधानमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ हालात की समीक्षा के लिए बैठक की। अब धीरे धीरे कारोबार खोलने पर विचार हो रहा है।
12 मई मंगलवार, 49वां दिन - आज से आंशिक यातायात शुरू हो रहा है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तीन गाड़ियां रवाना हुईं। सभी एसी हैं। डायनामिक फेयर लागू है।पर इन ट्रेनो में बैठने के लिए लोग 30-40 किलोमीटर से पैदल चलकर स्टेशन पहुंच रहे हैं, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन नहीं चालू हुआ है। इन ट्रेनों में छह दिन बाद तक का ही टिकट बुक हुआ है। कोरोना ने आज 87 जान ली। दिल्ली में एक दिन में 13 लोगों की मौत हो गई है। 
रात आठ बजे मोदी जी लाॉकडाउन 4 की स्क्रिप्ट लेकर हाजिर हुए। कहा 18 तारीख से नए रंग रूप में होगा लॉकडाउन। उन्होंने उद्योग धंधों के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज देने की बात भी कही। 
हमारे संघर्ष के दिनों के साथी पंकज कुमार पप्पू का हाजीपुर से फोन आया। उन्होंने फेसबुक पर एक पुरानी तस्वीर साझा की है। संभवतः 1992 की है जब आरएन कॉलेज में हमने एक दिवसीय शिविर आयोजित कराया था राष्ट्रीय युवा योजना की ओर से। 
बाएं से - विद्युत प्रकाश, रामचंद्र सिंह, प्रो. नवल किशोर प्र श्रीवास्तव, पंकज पप्पू और साथी। 

13 मई, बुधवार 50वां दिन - ट्रेन चलनी शुरू हो गई है। पर अभी मैंने माधवी और वंश को बुलाने पर कोई निर्णय नहीं कर पा रहा हूं। क्योंकि इस माहौल में यात्रा करना सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। हर ट्रेन में पूरी सीट पर लोग यात्रा कर रहे हैं ऐसे भला फिजिकल डिस्टेंसिंग कैसे लागू हो सकती है। आज कोरोना ने देश में 128 लोगों को लील लिया। 
अवकाश होने के कारण देर तक सोता रहा। पर अलसाई दोपहरिया में नींद खुली बीएचयू के एमए के एक साथी के फोन पर। फिर तो हम 25 साल पीछे पहुंच गए और ढेर सारी बातें कॉलेज के जमाने की। और शाम को फिर एक और दोस्त से लंबी गप। भविष्य कैसा होगा नहीं पता पर सुनहरी यादों के अतीत को कुरेदने में क्या दिक्कत है। हिंदी के जाने माने आलोचक नंद किशोर नवल का पटना में निधन हो गया। कोरोना काल में अंतिम यात्रा में भी बहुत कम लोग शरीक हो पा रहे हैं। 

सरकार भी समझ गई है कि बहुत दिनों तो लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता। इसका असर देश में उत्पादन पर पड़ रहा है। साथ ही बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ रही है। इसलिए अब लॉकडाउन में धीरे धीरे ढील देने पर विचार हो रहा है। तो क्या इसका मतलब कि हमें कोरोना वायरस के साथ ही जीना सीखना पड़ेगा।   

14 मई गुरुवार, 51वां दिन - सरकार सभी मेल एक्सप्रेस रेलगाड़ियां भी चलाने पर विचार कर रही है। बहुत संभावना है कि 18 मई से लॉकडाउन के चौथे चरण में कई तरह की रियायतों दी जाएं। 

   

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( LOCKDOWN DAYS, CORONA, COVID 19 ) 

Sunday, 26 April 2020

लॉकडाउन डायरी - शुरू हो गया दूसरा महीना... ((04 ))


एक महीने पूरे हो गए देश में बंदी के। देश ही क्या दुनिया के तमाम शहरों में बंदी है। कई जिलों में मामले बढ़ रहे हैं तो कुछ जिले कोरोना मुक्त भी हो रहे हैं।अब लॉकडाउन का दूसरा महीना शुरू हो गया है।  इस बीच सरकार कुछ कड़े आर्थिक फैसले ले रही है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को जून 2021 तक बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा। 

25 अप्रैल, शनिवार - 32वां दिन - आज से रमजान का महीना शुरू हो गया है। गाजियाबाद मेें सख्ती बढ़ाई जा रही है। अब दोपहर दो बजे के बाद दुकाने नहीं खुलेंगी। आज देेेश मेंं सबसे ज्यादा 57 लोगों की मौत हुई । बिहार मेें कई नए जिलों में केस बढ़़े़े हैं। अनादि की कक्षाएं अब जूम एप से अलग हटकर माइक्रोसाफ्ट टीम्स पर लग रही हैं। उसने बताया कि उसकी तीन कक्षाएं ही रोज हो पा रही हैं। ऑनलाइन क्लास में 30 में से 25 छात्र रोज ऑनलाइन मौजूद होते हैं।

26 अप्रैल रविवार , 33वां दिन : सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में छूट बढ़ाई है। वहां सारी दुकानें खोली जा सकती हैं। सिर्फ शॉपिंग मॉल को छोड़कर। रविवार को दोपहर में दिल्ली एनसीआर में आंधी आई तो बिहार में अच्छी बारिश हुई। प्रधानमंत्री मोदी मन की बात में अवतरित हुए। उन्होंने कहा, रमजान में पहले ज्यादा इबादत करें ताकि दुनिया ईद से पहले कोरोना मुक्त हो सके। आज देश भर में 47 लोगों की मौत हुई उसमें सर्वाधिक 18 अहमदाबाद शहर में लोगों ने दम तोड़ा।  लंबे समय बाद आज मैंने लिट्टी बनाकर खाया। पर चोखा नहीं बनाया। लिट्टी के साथ चटनी और घुघनी। 
27 अप्रैल, सोमवार,  34 वां दिन ः देश में कोरोना के सर्वाधिक मरीज महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में सामने आए हैं। इसमें मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल बड़े केंद्र बने हैं। आज देश में कुल 60 लोगों की मौत हुई जो अब तक एक दिन में सर्वाधिक है। प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। 
28 अप्रैल, मंगलवार, 35 वां दिन- तीन मई की तारीख नजदीक आ रही है पर लॉकडाउन खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। हो सकता है उन राज्यों में ढील मिले जहां मामले कम हैं। 
हमारे गृह जिले रोहतास में कोराना के मामले कई नई जगहों पर बढ़ गए हैं। शहर के बारादरी के बाद करपुरवा, अड्डा रोड, जक्की शहीद, गौरक्षिणी में संक्रमण मिला है। जिले के राजपुर बाजार, आलमपुर और कोचस में भी कोरोना के नए केस मिल गए हैं। यह दुखद है जिले के कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना वायरस का पहुंच गया है। रोहतास में केस की संख्या 30 से ज्यादा है। बिहार के 29 जिले में संक्रमण पहुंच गया है। 



29 अप्रैल, बुधवार - 36वां दिन - दिल्ली में हॉटस्पॉट की संख्या 100 हो गई है। बस राहत की बात है कि लोग ठीक भी हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में किसी की मौत भी नहीं हुई है, पर आज दो लोगों की मौत हो गई। देश में कुल मौत की संख्या 1000 के पार हो गई। देश भर में 71 मौत हुई जो अब तक का एक दिन में सर्वाधिक है। हमारे रोहतास जिले के कई गांवों तक संक्रमण पहुंच गया है। करगहर प्रखंड के बड़हरी गांव में एक छह साल का बच्चा संक्रमित मिला है। मतलब मेरे पुश्तैनी गांव के आसपास भी कोरोना का संक्रमण पहुंच चुका है। आज मेरा दफ्तर के काम से अवकाश था। सरकार अब अलग अलग राज्यों में फंसे मजदूरों, पर्यटकों और दूसरे लोगों को उनके घर पहुंचाने का इंतजाम कर रही है। लोगों को बसों से उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। 

हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता इरफान की 54 साल की उम्र में आज मृत्यु हो गई। वे कैंसर से पीड़ित थे। वे शानदार अभिनेता थे, उनके निधन से समाज के हर वर्ग के लोग दुखी हैं। पान सिंह तोमर, लाइफ ऑफ ए पाई, लंच बॉक्स जैसी तमाम फिल्मोें में उन्होंने शानदार अभिनय किया था। कल और आज में मैंने तीन फिल्में देखीं। यू ट्यूब पर। बेमिसाल, खामोशी और सफर। इन तीनों फिल्मों के कहानी बांग्ला के लोकप्रिय लेखक आशुतोष मुखर्जी की है। तीनो फिल्में कहानी और संगीत के स्तर पर उम्दा हैं। संयोग है कि तीनो फिल्मों की कहानी डॉक्टरों के इर्दगिर्द घूमती है। 
30 अप्रैल, गुरुवार, 37वां दिन - तीन मई के बाद सरकार ग्रीन जोन वाले इलाकों में थोड़ी छूट दे सकती है। देश में एक दिन पहले 71 तो आज 67 लोगों को कोरोना ने ग्रस लिया। रुस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन भी कोरोना ग्रस्त हो गए हैं। बिहार में सीतामढ़ी जिले में भी कोरना पहुंच गया है। रोहतास जिले में भी आज नए केस आए हैं। सरकार अलग अलग राज्यों में फंसे लोगों को लाने की तैयारी कर रही है। 
एक दिन पहले इरफान के बाद आज लोकप्रिय अभिनेता ऋषि कपूर का 67 साल की उम्र में निधन हो गया। दोनों ही कैंसर से पीड़ित थे। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

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Monday, 20 April 2020

लॉकडाउन डायरी - शुरू हो गया दूसरा चरण ((03 ))


देश भर में लॉकडाउन का दूसरा चरण 16 अप्रैल से शुरू हो चुका है। हमारी कालोनी डीएलएफ दिलशाद में बीच चौराहे पर एक डीकांटामिनेशन टनेल लगाया गया है। कई लोग इससे होकर गुजर रहे हैं। अच्छी बात है कि कालोनी के लोग काफी अभी भी अनुशासित हैं। कई राज्यों ने लॉकडाउन को बढ़ाने की हिमायत की थी। अब मुझे अकेले रहने की आदत सी पड़ने लगी है। 15 अप्रैल को मेरा अवकाश था। ऐसा कई दिन बाद हुआ कि मैं रात 12 बजे से सुबह 10 बजे तक सोता रहा। अच्छी नींद आई। वरना शुरुआत में रात को नींद नहीं आती थी।

कोरोना से बचने के लिए बार बार हाथ धोने और सेनेटाइजर का इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है। बाजार में मिल रहे तमाम महंगे सेनेटाइजर का विकल्प है। पतंजलि का आयुर्वेदिक सेनेटाइजर, नीम, तुलसी एलोवेरा से बना, सिर्फ 55 रुपये में 120 एमएल....

16 अप्रैल, गुरुवार  23 वां दिन - आज कई दिनों बाद विवेक विश्वकर्मा से मुलाकात की, नीचे सड़क पर शाम को सब्जी खरीदने के दौरान। डीएलएफ कालोनी में अब हमारा कोई मित्र नहीं रहता। फूल लाल मौर्य और आरपी मौर्य कालोनी छोड़कर नई जगहों पर जा चुके हैं। मां और पिताजी के साथ भाई तड़ित से लंबी बातचीत हुई। इस लॉकडाउन में कई दोस्त जिनके बाल बढ़ रहे हैं खुद ही बाल काटना सीख रहे हैं। दिन में कर्ड राइस बनाकर खाया तो शाम को नास्ते में भेलपुरी खुद तैयार किया। 

17 अप्रैल, शुक्रवार, 24 वां दिन - पिछले दो दिन में देश में संक्रमण बढ़ने की गति में कमी आई है। कई चिकित्सकों का कहना है कि इस बीमारी को लेकर जितना परेशान हुआ जा रहा है वास्तव में यह उतना खतरनाक नहीं है। देश में हर रोज अभी भी टीबी से 1000 से ज्यादा लोगों की मौत होती है, जबकि टीबी का इलाज उपलब्ध है। कई लोग पूछ रहे हैं कि इन दिनों क्या बना रहे हो और क्या खा रहे हो तो कुछ खाने-पीने की तस्वीरें भी संजो रहा हूं। 

इस बार घर से लौटा था तो मां ने तीसी ( अलसी) की तिसौरी बनाकर दी थी। उसे भी तल कर खा रहा हूं। तो इस तिसौरी में मां का प्यार शामिल है। वैसे आजकल तीसी को सुपर फूड की संज्ञा दी जाने लगी है। हमारे गांव में बचपन में खेतों तीसी के नीले फूल खिलते थे। पर हमलोग इसे तब खाने में कोई खास महत्व नहीं देते थे। 
शुक्रवार 17 अप्रैल को कुछ सुखद खबरें हैं कि देश में रोज मरने वालों की संख्या घट रही है। आज 32 लोगों की जान गई। कुल संख्या हुई 452 वहीं अब कुल पीड़ितों में 13 फीसदी ठीक हो चुके हैं। आज बांसुरी वादक राजेंद्र प्रसन्ना जी से लंबे समय बाद बात हुई। उन्होंने बताया कि वे हर रोज दोपहर 12 बजे एक घंटे फेसबुक पर लाइव होकर बांसुरी बजाते हैं। इस समय हजारों लोग उन्हें सुनते हैं।

18 अप्रैल, शनिवार, 25 वां दिन - रात 12 बजे तारीख बदलते ही दिल्ली में जोरदार बारिश शुरू हो गई। बारिश से पहले आंधी भी आई। शाम को फिर दो बार बारिश हुई। कुछ इलाकों में ओले भी पड़े। सुबह की नींद एक फोन से खुली। कुदरा के पास तरहनी गांव से राम प्रवेश मामा का फोन आया। लंबी बात हुई। वे कह रहे थे इस लॉकडाउन में हम गांव के लोगो ंको ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा। अपने खेत की सब्जियां खा रहे हैं। गेहूं की कटाई भी चल रही है। 
हमारे पुराने साथी ओम प्रकाश तिवारी का मानना है कि कोरोना से लड़ने का रास्ता लॉकडाउन नहीं है। इसका मतलब तो दुश्मन से छिपकर घर में बैठ जाना है। जबकि जब दुश्मन हमला करे तो हमें युद्ध के मैदान में उतरना पड़ता है। 

बहुत दिनों बाद मुझे अपनी कालोनी में कौवा की कांव कांव सुनाई दी। वरना दिल्ली में तो तभी कौवा नजर ही नहीं आता था। लॉकडाउन में आसमान भी बिल्कुल साफ नजर आ रहा है। 

19 अप्रैल, रविवार - 26वां दिन -  देर रात हल्की बारिश और आंधी का माहोल बना रहा। आमतौर पर अप्रैल में ऐसा मौसम नहीं होता। सदभावना रेल यात्रा के दौरान 1993 में लंबे समय तक साथ रहे रामाकृष्णा ( बेंगलुरु) से बात हुई। वह बातें करते हुए बड़ा भावुक हो गया। शाम को सुरेश चाचा के बेटे सौम्य का पुणे से फोन आया। मेरे गांव से वह एक और युवक है जो पत्रकार बन गया है। वह पुणे के एक अंग्रेजी अखबार में काम करता है। आज रात फिर हल्की बारिश हुई। 
देश भर में कोराना से मरने वालों की संख्या 500के पार हो गई। वहीं 16 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। प्रधानमंत्री ने लिंक्डइन पर लेख लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि ये बीमारी, जाति,धर्म, नस्ल देखकर हमला नहीं करती। पेरिस में पानी में भी कोरोना वायरस मिले हैं। हालांकि वह पेयजल सप्लाई का नेटवर्क नहीं है।

20 अप्रैल , सोमवार, 27वां दिन - अमेरिका में तो सारे स्कूल कॉलेज एक साल के लिए बंद कर दिए गए हैं।मेरे कॉलेज के दिनों के साथ अभय कुमार इन दिनों केनरा बैंक में वाशिंगटन डीसी शाखा में पदस्थापित हैं। उनसे रात को बात होती है, तब अमेरिका में कोरोना को लेकर व्याप्त भय के बारे में पता चलता है। इस बीच देश में अच्छी खबर है कि गोवा और मणिपुर जैसे राज्य संक्रमण मुक्त हो गए हैं।

21 अप्रैल, मंगलवार  28वां दिन - आज मैंने तय किया की रसोई में खाना नहीं बनाउंगा। बिना पकाए हुए भोजन पर रहूंगा। तो सत्तू पीया, फिर कुछ फल खाए और शाम को भेलपुरी बनाकर खाया। बनारस के पुराने साथी हेमंत कुशवाहा और प्रेमन कुमार मौर्य से बात हुई। आज देश में मरने वालों की संख्या 600 के पार हो गई। दिल्ली नोएडा और दिल्ली गाजियाबाद की सीमा पूरी तरह सील कर दी गई है। बिहार के रोहतास, बक्सर और भोजपुर जिले में भी कोरोना के नए केस निकल आए हैं। मुंबई में 53 पत्रकार भी संक्रमित हो गए हैं। वहीं तमिलनाडु में भी 20 से ज्यादा पत्रकारों को संक्रमण हुआ है। 

22 अप्रैल, बुधवार 29वां दिन - आज मेरा अवकाश नहीं है। कोरोना महामारी के कारण कच्चे तेल की वायदा बाजार मे ंअमेरिका में कीमत शून्य के नीचे चली गई है। जैसे हालात बन रहे हैं तीन मई के बाद देश में समान्य परिवहन के आसार नहीं लगते। लॉकडाउन का सख्ती से पालन हो इसके लिए दिल्ली नोएडा, दिल्ली गाजियाबाद बार्डर अच्छी तरह सील कर दिए गए हैं। केंद्र सरकार डाक्टरों और चिकित्साकर्मियों पर हमले रोकने के लिए सख्त सजा का प्रावधान कर रही है। उधर अमेरिका कोरोना को लेकर चीन को धमकी दे रहा है। 
23 अप्रैल, गुरुवार - 30वां दिन - आज मैं अवकाश पर हूं। रोहतास जिले के बाद आज बिहार के कैमूर जिले में भी कोरोना के आठ संक्रमित मिले हैं। वे लोग चैनपुर के गांव में मिले हैं। देश में आज कुल 34 लोगों की मौत हुई। छुट्टी का दिन पाकिस्तानी तबला वादक ताफू खान का तबला सुनने और कुछ पुराने दोस्तों से संवाद करने में बीता। 
24 अप्रैल, शुक्रवार 31वां दिन- बड़ा सवाल कि कोरोना का संक्रमण कैसे फैलता है। अब तक से शोध के मुताबिक संक्रमण फैलने की सबसे ज्यादा संभावना तब है जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींके या खांसे और कोई अन्य शख्स उन नम बूंदों के संपर्क में आए। ऐसा 6 फीट की दूरी तक हो सकता है। यह संभव है कि आप किसी ऐसी वस्तु के संपर्क में आएं जहां किसी संक्रमित व्यक्ति की छींक या खांसी से नम बूंदें गिरी हों। ऐसे केस में वायरस से संक्रमण की संभावना पहले दस मिनट से  लेकर तकरीबन दो घंटे तक रहती है। मगर याद रखें वायरस को छू  लेने से यह आपकी बॉडी में नहीं जाता। यह तभी आपकी बॉडी में जाता है, जब उन्हीं हाथों से अपनी नाक, मुंह या आंखों को छूते हैं।  इंसानी शरीर के बाहर बहुत तेजी से मरने लगता है, क्योंकि उसे जिंदा रहने के लिए वाहक चाहिए।
प्रधानमंत्री ने आज देश के ग्राम पंचायतों के सरपंचों को संबोधित किया। कल से रमजान का महीना शुरू हो रहा है। पर इस बार बाजार नहीं सजेंगे। कोरोना से आज देश में 37 लोगों की मौत हुई। आज में अपने फ्लैट से बाहर नहीं निकला। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com  ( LOCKDOWN DAYS, CORONA, COVID 19 ) 


Saturday, 18 April 2020

कोरोना से ज्यादा जानलेवा हैं ये परंपरागत बीमारियां


आप कोरोना वायरस यानी कोविड 19 से होने वाले संक्रमण और मौत से इतने परेशान न हों। अपने देश में हर साल इन बीमारियों से होने वाली मौत पर भी जरा गौर फरमाएं फिर देखें कि कोरोना कितना बड़ा खतरा है...पर हम इन बीमारियों लेकर ज्यादा सावधान नहीं होते।

04 लाख से ज्यादा भारत में हर साल औसत टीबी से मौत, 2016 में 4.23 लाख। यानी हर महीने औसतन 35 हजार, हर रोज एक हजार से ज्यादा

08 लाख लोगों की मौत होती है कैंसर से अपने देश में, औसतन हर दिन 1300 लोगों की मौत कैंसर से होती है। हर साल 12 लाख नए मामले सामने आते हैं। हर साल 70 हजार महिलाएं तो स्तन कैंसर से मर जाती हैं। इसका बड़ा कारण हमारा गंदा खानपान है।

01 लाख से ज्यादा न्यूमोनिया से हर साल बच्चों की मौत होती है। 2018 में 1.27 लाख बच्चों की मौत हुई।

2.05 लाख लोगों की हर साल देश में मौत होती है मलेरिया बुखार से। द लंसेट की रिपोर्ट है ये। यानी 18 से 20 हजार लोग हर माह मलेरिया से मर जाते हैं।

1.61 लाख तक लोगों की हर मौत हो जाती है टायफायड से, जो दूषित पानी से फैलता है। ये विश्व स्वास्थ्य संगठन का आकलन है। टायफायड से पीडित मरीजों में से 20 से 25 फीसदी की मौत हो जाती है।

7.83 लाख लोगों की मौत देश में हर साल दूषित पानी और खराब साफ सफाई के कारण होती है। इसमें आंत्रशोथ, हैजा बड़ा घटक है जो बच्चों और बूढ़ों के लिए जानलेवा साबित होता है।

60 हजार लोगों की भारत में हर साल मौत होती है खाने में ट्रांसफैट लेने से होने वाले हृदय रोग से । यानी हर माह पांच हजार लोग गंदे खान के आदत से मर जाते हैं। ( मतलब वनस्पति तेल, नकली मक्खन, मैदे के बने हलवाई उत्पाद, बेकरी उत्पाद का सेवन करना )

अब जरा इधर भी गौर फरमाइए

1.5 लाख लोगों की मौत होती है हर साल देश में होने वाले पांच लाख सड़क हादसों में। यानी हर महीने 12 हजार मौत सड़क हादसे में। ये जानकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जनवरी में दी थी।

तो इसका मतलब की कोविड 19 उतना खतरनाक नहीं है, जितना कि ये पुरानी बीमारियां। आप सावधान रहें, बचाव अच्छी बात है पर सिर्फ कोराना से ही नहीं उन तमाम बीमारियों को लेकर जागरूक रहें, जो आपकी अलग-अलग तरह की गलतियों से फैलती है।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

Tuesday, 14 April 2020

लॉकडाउन डायरी- एक सौ तीस करोड़ लोगों को घर में बंद किया (( 02 ))

लॉकडाउन के दौरान मेरे घर की छत से यूं दिखाई दे रहा आसमान 

कोरोना से जंग के बीच 25 मार्च से देश में लॉकडाउन की शुरुआत हुई। इससे पहले पंजाब समेत कई राज्य अपने यहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा चुके हैं। वहां सिर्फ सुबह 6 से 9 बजे तक जरूरी चीजों की आपूर्ति के  लिए बाजार खुलता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी 130 करोड़ आबादी वाले देश में बंदी की शुरुआत हो चुकी है। ऐसी बंदी जो एक अदृश्य वायरस से फैलने वाले बीमारी से लड़ने के लिए है। 

25 मार्च, पहला दिन  - आज से दफ्तर नहीं जाना है। हिन्दुस्तान हिंदी दैनिक में वर्क फ्रॉम होम की शुरुआत हो रही है। हमने अपनी कॉलोनी के केबल वाले से आग्रह करके ब्राडबैंड कनेक्शन लगवा लिया है। हालांकि ज्यादा दबाव के कारण वह पूरी गति से नहीं चल पा रहा है। हमारी कॉलोनी में लोग अनुशासन से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। देश भर में पैसेंजर ट्रेन, मेट्रो ट्रेन आदि का परिचालन 14 अप्रैल तक के लिए बंद हो चुका है।


26 मार्च, दूसरा दिन सरकार ने शहर और गांव के गरीबों के लिए कुछ राहतों का ऐलान किया। इस बीच देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 16 हुई जबकि 600 से ज्यादा संक्रमित हैं। प्रसार की गति धीमी है। हमें आशावादी रहना चाहिए। गांव में चाचा से बात हुई। लॉकडाउन में उन लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं है।

27 मार्च,  तीसरा दिन दिल्ली समेत महानगरो से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन जारी है। ये लोग पैदल ही अपने घरों को चल पड़े हैं। दिल्ली के यूपी गेट पर रात को भारी भीड़ जमा हो गई। बिहार सूचना केंद्र ने बिहार के लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 

 28 मार्च, चौथा दिन -आनंद विहार और यूपी गेट पर दस हजार से ज्यादा लोग इकट्ठे हो गए। बिहार और यूपी जाने वाले लोग। एक किलोमीटर के करीब लंबी लाइन लग गई। हालांकि दिल्ली सरकार कह रही है कि दैनिक वेतन वाले मजदूर पलायन न करें उनके रहने के लिए यहां स्कूल और रैन बसेरे खोले जा रहे हैं। हमारे साथ मनोज कुमार बोस बता रहे हैं कि शाहजहांपुर, लखनऊ सीमा पर दिल्ली, पंजाब आदि स्थानों से पैदल चलते हुए लोग अपने घर जाने के लिए पहुंच रहे हैं। 

29 मार्च - पांचवां दिन -  दिल्ली बार्डर से बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के मजदूरों को बसों में भरकर उनके जिले में भेजा गया। पर इसमें खतरा भी है। सरकार ने सभी राज्यों की सीमा सील करने का आदेश दिया। दिल्ली के सभी स्कूल श्रमिकों के रहने के लिए खोल दिए गए हैं। वहां उनके खाने का भी इंतजाम है। रात में 1978 की फिल्म किनारा देखी, जिसका गीत नाम गुम जाएगा... लोकप्रिय हुआ था। 

30 मार्च - छठा दिन - दिल्ली के निजामुदद्दीन में तबलीगी जमात के दफ्तर से 24 कोरोना के संदिग्ध अस्पताल में भर्ती कराए गए। रोज देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है। मैं दिन में रोज अपने विश्वविद्यालय के दिनों के कुछ पुराने दोस्तों से बात करने की कोशिश कर रहा हूं। आज दिग्विजय नाथ सिंह और चकफतह (वैशाली) में पिता जी के बैंक के मित्र सुशील कुमार सिन्हा जी से बात की। 

31 मार्च - सातवां दिन -  मैं कई दिन से अपने फ्लैट से बाहर नहीं निकला हूं। देर रात गए धर्मेंद्र की एक पुरानी फिल्म यूट्यूब पर देखता हूं। के स्कूल ने मोबाइल एप पर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी है। अनादि दसवीं कक्षा में चले गए हैं। सरकार सख्त कदम उठाने की योजना बना रही है। शहरों को सेनेटाइज करने पर काम हो रहा है। आज शाम को दिल्ली में फिर बारिश हुई। दिन में कानपुर वाले एसपी अग्निहोत्री जी बातें हुई वे हमें केदारनाथ यात्रा के दौरान मिले थे।  

एक अप्रैल, आठवां दिन: आज देश में 400 से ज्यादा मामले सामने आए. मेरे कई मित्र आशावादी हैं,  कह रहे हम ये जंग जीत लेंगे। बाजार में सब्जियां सस्ती हो गई हैं। अनादि के स्कूल ने मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं लगानी शुरू कर दी है। 

दो अप्रैल, नौवां दिन: दफ्तर के काम से आज अवकाश,  खाना बनाना,  सफाई और पुरानी फिल्म कटी पतंग देखी। कालोनी में राशन दुकानें सिर्फ सुबह शाम खुल रही हैं। मैं रोज कुछ पुराने दोस्तों से बातें कर रहा हूं। कन्हौली के स्कूली दोस्त ब्रजेंद्र पप्पू से बात हुई। वे अपने गांव के घर में प्रवास कर रहे हैं। रात में देवानंद की हम दोनों फिल्म देखी। 

तीन अप्रैल 10वां दिन - सुबह नौ बजे प्रधानमंत्री ने 10 मिनट का वीडियो संदेश जारी किया। आज कई दिनों बाद मेरे दरवाजे पर अखबार (टाइम्स ऑफ इंडिया) आया हुआ था। वैसे 23 तारीख से ही अखबार के वितरण में बाधा आ रही है। रेलगाड़ियों में 15 अप्रैल और उसके आगे का आरक्षण हो रहा है। पर पता नहीं 15 अप्रैल से रेलों का संचालन शुरू होगा या नहीं। बीएचयू को दोस्त परमेश्वर से बात हुई वे सासाराम के पास अपने गांव में पहुंचे हुए हैं। आशुतोष पाठक से भी बात हुई वे अपने गांव हैदरनगर (पलामू) में अपने परिवार के साथ हैं।
चार अप्रैल  11 दिन : सुबह 11 बजे सोकर उठा । संयोग आज अखबार दरवाजे पर था। खबरों पर नजर डालने के बाद फिर पुराने दोस्तों से बात की। मार्च की 19 तारीख से ही टीवी नहीं खोला। किताबें पढ़ रहा हूं या फिर वेबसाइट पर अपनी पसंद की खबरें देखता हूँ ।  रात को खाने में मटर पनीर बनाया। 

5 अप्रैल 12वां दिन :  दीप से दीप जले - आज प्रधान मंत्री ने रात नौ बजे नौ मिनट दीया जलाने को कहा है । देश भर केलोगों ने ऐसा किया भी। पर कुछ अति उत्साही लोग पटाखे चलाने लगे। हमारी कालोनी में भी लोग नहीं माने। हां लोगों ने इस दौरान घर के अंदर की बत्तियां जरूर बंद की। आज कई दिन बाद रात को लंबी नींद ले पाया। देर रात को काम खत्म करने बाद यूट्यूब पर शास्त्रीय संगीत सुनता हूं। खास तौर पर सामता प्रसाद ( गोदई महाराज ) किशन महाराज, अहमद जान थिरकवा, अल्लारखा खान और उस्ताद जाकिर हुसैन के तबला परफारमेंस के वीडियो। 

06 अप्रैल - 13वां दिन - कोराना से देश में मृतकों की संख्या 100 पार कर गई। वहीं संक्रमित लोगों की संख्या 4000 को पार कर गई। कई राज्यों की स्थित आशाजनक है। जैसे छत्तीसगढ़ में 10 केस मिले थे, जिसमें से लगभग सभी ठीक हो गए। दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में अभी ज्यादा संक्रमित लोग हैं। तीस अप्रैल को गैस सिलेंडर बुक किया था जो आज डिलेवर हुआ।

07 अप्रैल 14वां दिन - इस लॉकडाउन में हमारे दो निकटम लोगों की सेवाएं जारी है। पत्नी माधवी के बड़े भाई पटना में प्याज का कारोबार करते हैं। वहीं जालंधर के मेरे मित्र डिंपी सचदेवा सब्जियों के आढती हैं। दोनों का कारोबार जरूरी सेवाओं में आता है। तीन  दिन बाद फ्लैट से बाहर निकल कर गया। हमारी कालोनी में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। पार्क के गेट पर पुराने साथ तारकेश्वर गिरी से मुलाकात हुई। गिरी भाई चिंतित हैं कि इस लॉकडाउन का असर रोजी रोजगार पर आने वाले दिनों में काफी गहरा पड़ने वाला है।
तीन दिन बाद मां से बात हुई। मां पिता जी सासाराम में हैं। पत्नी बेटे पटना में। जबकि हवाई रेल सेवा और बस सेवा बंद है, इन सब लोगों की दूरी बहुत ज्यादा लगती है। 

08 अप्रैल 15वां दिन - दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मामले बढ़े हैं। मैं आज दफ्तर के काम से अवकाश पर हूं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 15 जिलों के कई हॉटस्पाट को सील कर दिया गया है। इसमें गाजियाबाद के भी कुछ इलाके शामिल हैं। दिन में अफवाह उड़ी अगले कुछ दिन कुछ खाने पीने को नहीं मिलेगा। पर ऐसा नहीं है। दिन में मामाजी के बेटे वीरेंद्र से बात हुई। मेरे भरत मामा 21 मार्च को दिल्ली आकर यहीं फंस गए हैं। 

इन दिनों देर रात यूट्यूब पर शास्त्रीय संगीत के वीडियो देखने लगा हूं। इसमें बड़ा सुकून मिलता है। खास तौर पर तबला के वीडियो। बनारस घराने के सामता प्रसाद (गोदई महाराज) पंडित किशन महाराज, अहमदजान थिरकवा जैसे दिवंगत तबलावादकों के वीडियो देख डाले। कहरवा, तीन ताल और तबले से निकलती कई चमत्कारिक धुनें। उस्ताद जाकिर हुसैन के कई वीडियो, उनके साथ पंडित शिवकुमार शर्मा की संतूर पर जुगलबंदी। 


पर तबले की तलाश में मैं पाकिस्तान के तबला वादक उस्ताद तारी खान तक पहुंच गया। वे जाकिर हुसैन के हम उम्र है। दो दशक से कैलफोर्निया में रहते हैं। वे कमाल के तबला वादक हैं। तबले पर कई किस्म के चमत्कार करते हैं। जब वे कहरवा को कई शैली में बजाते हैं तो उन्हे सुनकर आनंद आ जाता है। कई लोग उनको जाकिर हुसैन के टक्कर का तो कई उनसे भी बेहतर तबलावादक मानते हैं। तारी खान गजल गायक गुलाम अली, शास्त्रीय साधक सलामत अली खां के साथ संगत कर चुके हैं। वे पाकिस्तान से पंजाब घराने से आते हैं। वे रबाबी मुस्लिम परिवार के हैं। कभी उनके पुरखे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में वाद्य यंत्र बजाते थे।  

09 अप्रैल 16 वां दिन:  गाजियाबाद , नोएडा के जो इलाके पूरी तरह सील हुए हैं वहां के लोगों परेशानी बढ़ी है। हमारे आसपास में ऑक्सी होम्स, शालीमार गार्डन का बी ब्लाक सील किया गया है। आज मैंने पुराने अलबम की तमाम तस्वीरें  देखीं। नास्ते में दही चूड़ा खाया। दोपहर में आलू बैंगन, सोयाबीन की सब्जी बनाई। 

10 अप्रैल 17वां दिन ः देश में कोरोना से एक दिन मे 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली में ज्यादा मामले बढ़े हैं। इसी बीच कुछ अच्छी खबरें भी आ रही हैं। कुछ राज्यों में संक्रमण कम भी हो रहा है। 

11 अप्रैल 18वां दिन - उम्मीद है कि देश व्यापी लॉकडाउन इस महीने के आखिर तक चला जाएगा। पंजाब, ओडिशा समेत कई राज्यों ने 30 अप्रैल तक बढ़ा ही दिया है। आज डॉक्टर सरिता फुआ से बात हुई। वे मेरे गांव के भुवनेश्वर दादा की बेटी हैं। शिक्षिका के तौर पर रिटायर होने के बाद डेहरी ओनसोन में रहती हैं। उनके भाई पुणे से सुरेश चाचा का भी फोन आया। गांव से जुड़े इन दोनों लोगों से पहली बार बात हुई। तीन दिन बाद फ्लैट से बाहर गया, कुछ सब्जियां और पतजंलि स्टोर से कुछ राशन लेकर वापस आ गया। 

12 अप्रैल , 19वां दिन - खाली समय में पुराने फोटो अलबम देखते हुए वक्त कट रहा है। बहुत सालों बाद चंदेश्वर भैया ( गरभे) से बात हुई। वे बौद्ध भिक्षु बन गए हैं। उनके दो बेटे फरीदाबाद में रहते हैं। देश में आज कोरोना से 31 लोगों की मौत हुई। दिल्ली और आसपास में शाम को 5.45 बजे भूकंप के झटके भी आए। 
13 अप्रैल , 20 वां दिन - वैसे तो आज वैशाखी है, पर इस त्योहार को लेकर कोई उत्साह नहीं है। दिल्ली में आज सुबह भी भूकंप के झटके आए। कल मेष संक्रांति होगी, तब कुछ प्राकृतिक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। आज देश भर में 53 लोगों की मौत हुई कोरोना से जो अब तक सबसे ज्यादा है। पीड़ित लोगों की संख्या 9000 पार कर गई है। बीएचयू के पुराने सीनियर अजय सिंह ( द्वाराका, दिल्ली) से बात हुई। 

14 अप्रैल , 21 वां दिन -   सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया। लॉकडाउन बढ़ाकर 3 मई तक कर दिया गया। इस दौरान और सख्ती की जाएगी। रेलगाड़ियां और हवाई जहाज परिवहन आदि भी तीन मई तक बंद रहेंगे। आज मुंबई के बांद्रा जंक्शन में हजारों श्रमिक अचानक स्टेशन पर पहुंच गए और खुद को घर पहुंचवाने की मांग करने लगे। कल की तुलना में देश में आज कोरोना से कम लोगों की मौत हुई। सरकारी आंकड़े में 29 मौत की बात कही गई। 

15 अप्रैल, बुधवार 22वां दिन -  आज मेरा साप्ताहिक अवकाश है। तो ज्यादा समय खाना बनाने में नहीं गुजारा, बल्कि अपनी अलमारी से उन किताबों की तलाश में जो मुझे पढनी है। अलमारी में 20 से ज्यादा ऐसी किताबें पड़ी हैं जिन्हे मैंने नहीं पढ़ा अभी तक। कल दीवान सराय शहरनामा -2 पढ़कर खत्म की। राहुल सांकृत्यायन की कुछ किताबें भी अलमारी में मिलीं। शाम को सब्जी लाने के लिए थोड़ी देर के लिए नीेचे उतरा। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( INDIA LOCKDOWN, CORONA PERIOD, COVID 19 )