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Friday, 5 March 2021

पहाड़ों की सैर कराती पुस्तक - हिमालय की वादियों में

बहुत पहले एक फिल्म आई थी हिमालय की गोद में। मनोज कुमार माला सिन्हा की इस फिल्म की शूटिंग हिमाचल की वादियों में हुई थी। अब एक नई पुस्तक मेरे हाथ में है – हिमालय की वादियों में। यात्रा वृतांत श्रेणी की इस पुस्तक के रचयिता है डॉक्टर सुखनंदन सिंह। आध्यात्मिक पृष्ठभूमि वाले शोधार्थी सुखनंदन सिंह की कलम से हिमालय को महसूस करना करना एक अलग किस्म का आनंदित करने वाला अनुभव है।

कुल 243 पृष्ठों की पुस्तक आपको उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई अनछूए और अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय स्थलों की सैर पर ले जाती है। कोई भी व्यक्ति चाहकर भी सभी स्थलों का भ्रमण तो नहीं कर सकता न। तो कई बार दूसरे लेखकों की यात्राओं को पढ़ना भी बड़ा सुखकर लगता है।

लेखक खुद हिमाचल के रहने वाले हैं। कुल्लू की वादियों में उनका बचपन गुजरा। पर पुस्तक की शुरुआत उत्तराखंड के कुमायूं क्षेत्र की उनकी कुछ यात्राओं से ही होती है।

लेखक ने ऋषिकेश के पास स्थित नीलकंठ की तो कई बार यात्राएं की हैं। वे नीलकंठ के जाने के चार मार्गों के अनुभव साझा करते हैं। आमतौर पर हम दो मार्ग के बारे में ही जानते हैं। श्री हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी की यात्रा का वृतांत काफी सुंदर हैं। ये यात्रा थोड़ी मुश्किल भी है।

पुस्तक को पढ़ते हुए ये पता चलता है कि लेखक ने पहाडों पर ट्रैकिंग करने के लिए बेसिक कोर्स भी किया है। हिमाचल प्रदेश में लेखक पाराशर झील की यात्रा भी काफी रोमांचित करती है। पुस्तक के आखिरी हिस्से में लेखक हमें कुल्लू की हसीन वादियों में ले जाते हैं। यहां वे कुल्ले के चप्पे-चप्पे के बारे में बताते हैं। लेखक डॉक्टर सुखनंदन सिंह देव संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उनकी कई यात्राएं छात्रों के समूह के साथ की गई हैं। वे न सिर्फ खुद अनवरत यात्री हैं बल्कि अपने छात्रों को भी यात्राओं के लिए प्रेरित करते हैं।

पुस्तक – हिमालय की वादियों में

लेखक – डॉक्टर सुखनंदन सिंह

प्रकाशक – ईवीन्सपब पब्लिकेशनंस

मूल्य -   369 रुपये, पृष्ठ – 243

पुस्तक विभिन्न प्लेटफार्म से ऑनलाइन मंगाई जा सकती है।

 

Evincepub: https://evincepub.com/.../himaalay-ki-vaadiyon-mein.../

 Bspkart: https://www.bspkart.com/.../himaalay-ki-vaadiyon-mein.../

Ebook Channels:

 

Thursday, 21 January 2021

नहीं रहे भाषा विज्ञानी डॉक्टर बद्रीनाथ कपूर

विनम्र कपूर ने सूचित किया है कि उनके दादा डॉक्टर बद्रीनाथ कपूर का 21 जनवरी 2021 को 89 साल की अवस्था में निधन हो गया है। वाराणसी में सन 1994-95 के दौर में हिंदी प्रचारक संस्थान में काम करते हुए मेरी डॉक्टर बद्रीनाथ कपूर से कई मुलाकातें थीं। उनके घर जाकर उनका साक्षात्कार करने का भी मौका मिला था।

डॉक्टर बद्रीनाथ कपूर जन्म 16 सितंबर 1932 को अकालगढ़, जिला - गुजरांवाला में (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे देश आजाद होने के बाद मुश्किल परिस्थियों में 14 साल का उम्र में अकेले गुजरांवाला से अमृतसर, दिल्ली होते हुए वाराणसी पहुंचे। माता पिता की हत्या हो चुकी थी। वाराणसी में मामा रामचंद्र वर्मा के सानिध्य में पढ़ाई शुरू की। वे हरिश्चंद्र कॉलेज के छात्र रहे।  उन्होंने एमए और पीएचडी तक शिक्षा प्राप्त की ।

डॉ. कपूर ने अपना सारा जीवन हिंदी भाषा, व्याकरण और कोश प्रणयन के क्षेत्र में लगा दिया। डॉक्टर कपूर 1956 से 1965 तक हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा प्रकाशित मानक हिंदी कोशपर सहायक सम्पादक के रूप में काम करते रहे। डॉ. कपूर ने आचार्य रामचंद्र वर्मा के तीन महत्त्वपूर्ण कोशों का संशोधन-परिवर्द्धन कर उनकी स्मृति और अवदान को अक्षुण्ण बनाए रखने का स्थायी महत्त्व का कार्य किया है। 

कोश कला के आचार्य रामचंद्र वर्मा के सुयोग्य शिष्य डॉक्टर बदरीनाथ कपूर हिंदी की शब्द सामर्थ्य को प्रकट और प्रतिष्‍ठापित करने के अनुष्‍ठान में बड़ा योगदान रहा। उनकी 32 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हुईं। इनसे अधिकांश शब्दकोश,  तीन जीवनियां और पांच अनुवाद ग्रंथ हैं। 

बाद में जापान सरकार के आमंत्रण पर टोक्यो विश्वविद्यालय में 1983 से 1986 तक  अतिथि प्रोफेसर के रूप में सेवा प्रदान की। 

प्रकाशन : प्रभात बृहत् अंग्रेजी-हिंदी कोश, प्रभात व्यावहारिक अंग्रेजी-हिंदी कोश, प्रभात व्यावहारिक हिंदी-अंग्रेजी कोश, प्रभात विद्यार्थी हिंदी-अंग्रेजी कोश, प्रभात विद्यार्थी अंग्रेजी-हिंदी कोश, बेसिक हिंदी, हिंदी पर्यायों का भाषागत अध्ययन, वैज्ञानिक परिभाषा कोश, आजकल की हिंदी, अंग्रेजी-हिंदी पर्यायवाची कोश, शब्द-परिवार कोश, हिंदी अक्षरी, लोकभारती मुहावरा कोश, परिष्कृत हिंदी व्याकरण, सहज हिंदी व्याकरण, नूतन पर्यायवाची कोश, लिपि वर्तनी और भाषा, हिंदी व्याकरण की सरल पद्धति, आधुनिक हिंदी प्रयोग कोश, बृहत् अंग्रेजी-हिंदी कोश, व्यावहारिक अंग्रेजी-हिंदी कोश, मुहावरा तथा लोकोक्ति कोश, व्याकरण- मंजूषा, हिंदी प्रयोग कोश आदि।

सम्मान और अलंकरण : डॉक्टर कपूर की अनेक पुस्तकें उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पुरस्कार मिला। 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश शासन ने हिंदी गौरव सम्मान मिला। इससे पूर्व उन्हें श्री अन्नपूर्णानन्द वर्मा अलंकरण’ 1997, ‘सौहार्द सम्मान’ 1997, ‘काशी रत्न’ 1998, ‘महामना मदनमोहन मालवीय सम्मान’ 1999 एवं विद्या भूषण सम्मान’ 2000  मिल चुके हैं।

Monday, 18 January 2021

मूरतें - माटी और सोने की...

 हिंदी साहित्य में संस्मरण एक विलुप्त होती विधा है। हरसाल बहुत कम किताबें इस विधा पर प्रकाशित होती हैं। पर संस्मरण ऐतिहासिक दस्तावेज होते हैं। ये न सिर्फ आपके ज्ञान में अभिवृद्धि करते हैं बल्कि तमाम महान हस्तियों से जुड़े प्रसंगों और ऐतिहासिक तथ्यों को कई बार रोचक अंदाज में पेश करते हैं।

अभी हाल में मुझे एक पुस्तक पढ़ने को मिली - मूरतें माटी और सोने की... पुस्तक के लेखक हिंदी के जाने माने आलोचक नंद किशोर नवल हैं। अपने जीवन का लंबा समय पटना में गुजारने वाले नवल जी का मूल ग्राम वैशाली जिले का चांदपुरा था। संयोग से मेरा भी बचपन वैशाली जिले में गुजरा है। पुस्तक का शुरुआती हिस्सा उनके गांव और बचपन के पात्रों से होकर गुजरता है जो किसी उपन्यास सदृश प्रतीत होता है। वे अपने बचपन के मित्र सिद्धिनाथ मिश्र को पुस्तक में बार बार याद करते हैं। उन्ही सिद्धिनाथ मिश्र से जिनसे मैं हाजीपुर की सड़कों पर बार बार मिलता था, पर तब मैं उनकी महानता और साहित्य में गहरी अभिरूचि के बारे में नहीं जानता था।

पुस्तक के आगे अध्याय में बाबा नागार्जुन, डॉक्टर रामविलास शर्मा, त्रिलोचन शास्त्री , प्रोफेसर नलिन विलोचन शर्मा और डॉक्टर नामवर सिंह के बारे में लेखक के संस्मरण हैं। ये सभी संस्मरण अनमोल हैं। इनमें ऐसी जानकारियां और लेखकों के व्यक्तित्व के ऐसे पहलुओं के बारे में लिखा गया है जो कोई बहुत करीबी ही जानता होगा। इन तमाम प्रसंगों को लेखक ने सुंदर शब्दों में पिरोया है। हर हिंदी के अध्येता के लिए ये ज्ञान बढ़ाने वाली पुस्तक है। बीच बीच में पुस्तक में कई और साहित्यिक पात्रों से भी आपका मिलना होता है।  लेखक और आलोचक नंद किशोर नवल का 13 मई 2020 को पटना में 83 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। यह संभवतः उनकी अंतिम पुस्तक होगी। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

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पुस्तक - मूरतें - माटी और सोने की 

लेखक - नंद किशोर नवल 

प्रकाशक - राजकमल प्रकाशन , 2017, मूल्य - 495 रु. हार्ड बाउंड




Monday, 10 February 2020

मिट्टी की खुशबू में रची बसी कहानियां

ब्रह्मभोज नाम है इस कथा संग्रह का। इसमें कुल 17 कहानियां हैं। इन सबका परिवेश बिहार झारखंड का गांव गिरांव है। पर लेखक अपनी शैली से आपको बांधे रखते हैं। कहने शैली सहज और चमत्कारी है। पहली कहानी पकड़वा दमदार है। यह बिहार के पकड़वा विवाह पर आधारित है।

पुस्तक के लेखक सचिदानंद सिंह पेशे से बैंकर हैं । सेंट स्टीफेंस में पढ़ाई की है। पर उनकी कहानियों में बिहार झारखंड की मिट्टी की खुशबू रची बसी है। उनकी कहानियों के पात्र आपके अड़ोस पड़ोस में रहने वाले लोग हैं। आप जब कहानियां पढते हैं तो इन पात्रों के संग चलने लगते हैं। कहानियां मौलिकता से रची बसी हैं। वे आपका खूब मनोरंजन भी करती हैं और बिहार झारखंड के लोगों से आपका परिचय भी कराती हैं।

पुस्तक : ब्रह्मभोज
प्रकाशक : अनुज्ञा बुक्स
मूल्य : 200 रुपये

: विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 




Sunday, 10 November 2013

एंड्राएड फोन में सटासट टाइप करें हिंदी में

गो कीबोर्ड से करें हिंदी में तेज टाइपिंग
मोबाइल फोन में हिंदी में टाइप करने के कई विकल्प में से एक अच्छा विकल्प है गो कीबोर्ड से टाइपिंग। यह सबसे सहज है। यह हिंदी के अलावा कई भाषाओं में सपोर्ट करता है। वैसे गूगल के प्ले स्टोर पर कई विकल्प मिलते हैं पर उनमें गो कीबोर्ड सबसे बेहतर है। कई मोबाइल फोन में हिंदी सक्रिय करने का विकल्प नहीं होता। वहां पर आप प्ले स्टोर से जाकर गो कीबोर्ड का एप डाउनलोड करें। इस लिंक पर जाएं ( https://play.google.com/store/apps/details?id=com.jb.emoji.gokeyboard) इसका सिंबल हरे रंग के पत्ते जैसा है। डाउनलोड करने के बाद में लैंगवेज एंड इनपुट में गो कीबोर्ड को सक्रिय करें। इसके साथ ही गो कीबोर्ड की इनपुट लैंगवेज लिस्ट में जाकर हिंदी भाषा को भी चेक कर दें। इसके बाद आपके मोबाइल फोन पर हिंदी भाषा में टाइप करने का विकल्प आ जाएगा। गो कीबोर्ड का डाउनलोड एंड्राएड के हर वर्जन के लिए मौजूद है। आप कीबोर्ड का लेटेस्ट वर्जन ही डाउनलोड करें तो अच्छा रहेगा। गो कीबोर्ड की दूसरी विशेषता है कि ये अंक ( 1, 2,3, 4 ) को रोमन में दिखाता है। 

डिक्सनरी करें ऑन - अगर आप गो कीबोर्ड के साथ हिंदी डिक्सनरी भी डाउनलोड करके ऑन कर लें, तो इसका आपको फायदा होगा। डिक्सनरी की मदद से आप तेजी से संदेश टाइप कर सकेंगे। क्योंकि ये एक दो अक्षर लिखने के बाद पूरे शब्दों का विकल्प दिखाता है। 



ऐसे करें एंड्राएड फोन में हिंदी सक्रिय 
एंड्राएड हिंदी मोबाइल फोन पर सहज ढंग से हिंदी में टाइप किया जा सकता है। हिंदी भाषा सक्रिय होने पर आप एसएमएसफेसबुक चैटट्विटर या नोटपैड या ईमेल बाक्स में हिंदी में टाइप कर सकते हैं। यहां की बोर्ड लेआउट के रूप में इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड का विकल्प मिलता है। ये हिंदी का सबसे आसान कीबोर्ड है। लेकिन जिन्हें कीबोर्ड नहीं आता वे भी मोबाइल पर टैप करके आसानी से अपनी भाषा में टाइप कर सकते हैं। 


एंड्राएड 2.2 और उसके आगे के वर्जन में एक से अधिक भाषाओं के सक्रिय करने का विकल्प मौजूद है। 

ऐसे करें हिंदी भाषा सक्रिय - ( एंड्राएड 4 के वर्जन में ) 
टैप - सेटिंग- 
टैप - लैंगवेज एंड इनपुट 
टैप - कीबोर्ड एंड इनपुट में
डिफाल्ट लैंगवेज ( अंग्रेजी ही रहने दें) 
टैप - एंड्राएड की बोर्ड 
टैप - एंड्राएड कीबोर्ड्स 
कई भाषाओं का विकल्प दिखाएगा
यहां हिंदी भाषा को चुनें। 

एंड्राएड मोबाइल में एक साथ एक से अधिक भाषा जोड़ी जा सकती है। टाइप करते समय भाषा बदलने के लिए कीबोर्ड में स्पेस बार बटन के बगल में विकल्प मौजूद होता है। आप स्पेस बार से भाषा बदलने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

vidyutp@gmail.com

Friday, 8 November 2013

जीमेल में सक्रिय करें कीबोर्ड – अपनी भाषा में लिखें मेल

किसी को अपनी भाषा में ईमेल लिखने का अपना ही आनंद है। ठीक वैसे ही जैसे आप गुजरे जमाने में खत लिखा करते थे। ईमेल का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोगों की आईडी जीमेल पर जरूर है। तो आईए जानते हैं कि आप कैसे जीमेल में अपनी भाषा में लिख सकते हैं। जीमेल न सिर्फ हिंदी बल्कि पंजाबी, गुजराती, मराठी, संस्कृत, बांग्ला जैसी कई भाषाओं में लिखने की सुविधा देता है।


ऐसे जोड़े जीमेल में अपना कीबोर्ड

अपना जीमेल खाता खोलें
ऊपर दायीं तरफ सेटिंग बटन क्लि करें
सेटिंग में लैंगवेज देखें
शो आल लैंगवेज आप्सनस ( इस बटन को क्लिक करें)
-    इनबेल इनपुट टुल्स ( इस बाक्स को चेक करें)
-    भाषाओं की सूची खुल जाएगी।
-    अब इसमें हिंदी की तलाश करें
-     चार तरह की हिंदी दिखाई देगी
-    अ हिंदी देवनागरी , हिंदी देवनागरी फोनेटिक और हिंदी (INSCRIPT) 
-    इनमें हिंदी (INSCRIPT) का चयन करें ।
-    इसके बाद ये आपके कीबोर्ड में जुड़ जाएगा।
-    अब सबसे नीचे जाकर सेंटिंग को सेव कर दें। अब वापस मेल बाक्स पर आ जाएं।

आपके जीमेल में हिंदी भाषा सक्रिय हो चुकी है। जब मेल लिखना या चैट करना हो। सेटिंग के बगल में बनी कीबोर्ड की तस्वीर को क्लिक करें। वहां हिंदी कीबोर्ड दिखाई देगा। इसके बाद आप मेल पर हिंदी इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड ले आउट के मुताबिक मेल पर टाइप कर सकते हैं।

-    जिन लोगों को कीबोर्ड ले आउट याद नहीं वे आनस्क्रीन कीबोर्ड देखकर टाइप कर सकते हैं।

-    जीमेल पर हिंदी सक्रिय हो जाने पर यह किसी भी सिस्टम पर काम करेगा भले ही उस सिस्टम में हिंदी भाषा को सक्रिय नहीं किया गया हो। आप अपना मेल चाहे जहां भी खोलेंगे हिंदी में टाइप कर पाने में सक्षम होंगे।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

-    ( संपर्क – vidyutp@gmail.com M- 9953684150) 

Wednesday, 6 November 2013

यूनिकोड फांट्स ने किया काम आसान

कंप्यूटर पर हिंदी में खास तौर पर हम फांट्स की समस्या से जुझते रहते हैं। कंप्यूटर पर हिंदी के तेजी से लोकप्रिय नहीं हो पाने का बहुत बड़ा कारण कोई सर्व मान्य फांट का नहीं होना है। पर यूनिकोड फांट ने हमारी राहें आसान कर दी हैं। विंडो के एक्सपी वर्जन के साथ किसी भी भाषा के यूनिकोड फांट अच्छी तरह सपोर्ट करते हैं। आप हिंदी के कई सौ फांट www.ildc.in से मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। यह वेबसाइट भारत सरकार की है।

एटीएम और टीटीएफ
जब कंप्यूटर में विंडो 95 का चलन था तब हिंदी के लिए एटीएम (एडोब टाइप मैनेजर) फांट इस्तेमाल किए जाते थे। वहीं कई अखबारों के लिए सम्मिट स्क्रिप्ट मैनेजर ने फांट विकसित किए जो बिना उसके डुंगल के नहीं चलाए जा सकते थे। यह एक महंगी प्रक्रिया थी। न तो हिंदी के पास कोई सर्व मान्य की बोर्ड था न ही निःशुल्क प्राप्त होने वाले फांट्स। उसके बाद दौर या टीटीएफ यानी ट्रू टाइप फांट का। विंडो 98 इस्तेमाल करने वाले लोग टीटीएफ फांट का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये फांट भी आईएलडीसी की साइट पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। टीटीएफ फांट्स को एप्पल कंपनी ने विकसित किया है। बाद में इसे माइक्रोसाफ्ट ने भी अपने साफ्टवेयरों में स्वीकृत किया है। ये फांट बड़े स्पष्ट होते हैं तथा एलसीडी स्क्रीन पर साफ दिखाई देते हैं। विंडो 98 में गूगल की हिंदी वेबसाइट हिंदी में देख सकते हैं इसके लिए आपको आईएलडीसी की वेबसाइट पर जाकर हिंदी का टीटीएफ फांट डाउनलोड करना पड़ेगा।

क्या है यूनिकोड
यूनिकोड प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष नंबर प्रदान करता है,चाहे कोई भी प्लैटफॉर्म हो,चाहे कोई भी प्रोग्राम होचाहे कोई भी भाषा हो। कंप्यूटरमूल रूप सेनंबरों से संबंध रखते हैं। ये प्रत्येक अक्षर और वर्ण के लिए एक नंबर निर्धारित करके अक्षर और वर्ण संग्रहित करते हैं। यूनिकोड का आविष्कार होने से पहलेऐसे नंबर देने के लिए सैंकडों विभिन्न संकेत लिपि प्रणालियां थीं। किसी एक संकेत लिपि में पर्याप्त अक्षर नहीं हो सकते हैं : उदाहरण के लिए,यूरोपीय संघ को अकेले हीअपनी सभी भाषाओं को कवर करने के लिए अनेक विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है। अंग्रेजी जैसी भाषा के लिए भीसभी अक्षरोंविरामचिन्हों और सामान्य प्रयोग के तकनीकी प्रतीकों हेतु एक ही संकेत लिपि पर्याप्त नहीं थी। ये संकेत लिपि प्रणालियां परस्पर विरोधी भी हैं। इसीलिएदो संकेत लिपियां दो विभिन्न अक्षरों के लिएएक ही नंबर प्रयोग कर सकती हैंअथवा समान अक्षर के लिए विभिन्न नंबरों का प्रयोग कर सकती हैं।

अधिकांश साफ्टवेयरों में स्वीकृत
किसी भी कंप्यूटर (विशेष रूप से सर्वरको विभिन्न संकेत लिपियां संभालनी पड़ती है। फिर भी जब दो विभिन्न संकेत लिपियों अथवा प्लैटफॉर्मों के बीच डाटा भेजा जाता है तो उस डाटा के हमेशा खराब होने का जोखिम रहता है। यूनिकोड स्टैंडर्ड को ऐपलएचपीआईबीएमजस्ट सिस्टममाईक्रोसॉफ्ट,औरेकलसैपसनसाईबेसयूनिसिस जैसी उद्योग की प्रमुख कंपनियों ने अपनाया है।
आदान-प्रदान में आसानी
यूनिकोड में डाटा को बिना किसी बाधा के विभिन्न प्रणालियों से होकर ले जाया जा सकता है। इसकी आवश्यकता आधुनिक मानदंडोंजैसे एक्सएमएलजावा,एकमा स्क्रिप्ट (जावा स्क्रिप्ट), एलडीएपीकोर्बा 3.0, डब्ल्यूएमएल के लिए होती है और यह आईएसओ/आईईसी 10646 को लागू करने का अधिकारिक तरीका है। यह कई संचालन प्रणालियोंसभी आधुनिक ब्राउजरों में होता है। यूनिकोड को ग्राहक-सर्वर अथवा बहु-आयामी उपकरणों और वेबसाइटों में शामिल करने सेपरंपरागत उपकरणों के प्रयोग की अपेक्षा खर्च में अत्यधिक बचत होती है। यूनिकोड से एक ऐसा अकेला सॉफ्टवेयर उत्पाद अथवा अकेला वेबसाइट मिल जाता हैजिसे री-इंजीनियरिंग के बिना विभिन्न प्लैटफॉर्मोंभाषाओं और देशों में उपयोग किया जा सकता है। यूनिकोड के बारे में अधिक जानकारी के लिए इसकी वेबसाइटदेंखे (www.unicode.org) यह बिना हानि लाभ के काम करने वाले एक कान्सोर्टियम द्वारा विकसित किया गया है।

फोनेटिक की बोर्ड सीखें
हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के 500 से ज्यादा यूनिकोड फांट्स मुफ्त में प्राप्त करने के लिए आप www.ildc.in पर जाएं। अगर आप कंप्यूटर पर हिंदी में तेजी से काम करना चाहते हैं तो फोनेटिक की बोर्ड सीखें। यह रेमिंगटन से बहुत आसान है। कोई भी नया व्यक्ति महज दो दिन में इसे याद कर सकता है। हिंदी में विंडो एक्सपी का वर्डपैड हो या आफिस 2003 का हिंदी संस्करण,या आईएलडीसी द्वारा विकसित ओपन आफिस साफ्टवेयर सभी फोनेटिक की बोर्ड को सपोर्ट करते हैं। भारत सरकार ने इसे ही वैज्ञानिक और सरकारी की बोर्ड के रुप में मान्यता दे रखी है। आप यूनिकोड फांट की मदद से एमएस आफिस जैसे साफ्टवेयर में भी हिंदी में फोनेटिक की बोर्ड पर बड़े मजे से काम कर सकते हैं। पर अगर आप ओपन आफिस तो फ्री डाउनलोड पर उपलब्ध का इस्तेमाल करते हैं तो आपको कई और सुविधाएं मिल जाती हैं। आप यहां अपनी वेबसाइट हिंदी में भी बना सकते हैं। अपने तैयार किए गए टेक्स्ट को एचटीएमएल फार्मेट में भी सेव एज कर सकते हैं। कंप्यूटर पर हिंदी और फोनेटिक की बोर्ड का लेआउट चार्ट प्राप्त करने के लिएWWW.bhashaindia.com भी देखें।

-विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( ये आलेख 2007 में लिखा गया) 

Monday, 4 November 2013

सर्च करें हिंदी में

कंप्यूटर हिंदी का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अब आप अपनी भाषा में भी सर्च कर सकते हैं। गूगल डाट काम ने हिंदी में भी सर्च करने की सुविधा उपलब्ध करा दी है। वहां हिंदी के अलावा कुछ अन्य भारतीय भाषाएं भी हैं। सिर्फ हिंदी ही नहीं अब आप बांग्लामराटी , तमिल और तेलगू भाषाओं मे भी सर्च कर सकते हैं। यानी कि वे वेबसाइटें जो इन भाषाओं में आनलाइन सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। उन वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री में से कुछ भी आप ढूंढ सकते हैं। इंटरनेट पर सभी लोकप्रिय हिंदी समचार पत्रों की वेबसाइटें हैं जहां आप उनकी खबरें उनक आरकाईव में जाकर उनके पिछले पेज देख सकते हैं। इन अखबारों के राज्यवार संस्करणों को भी आप देख सकते हैं। इसके अलावा कुछ प्रमुख सरकारी और गैर सरकारी संगठन भी अब हिंदी में वेबसाइट बना रहे हैं। बीबीसी की हिंदी वेबसाइट बहुत अच्छी है। इस पर आप ताजी खबरें और सुरूचिपूर्ण फीचर सामग्री देख सकते हैं।

हिंदी में ही वेब का पता ठिकाना
पर गूगल जो आपको सुविधा देता है वह अपने आप मे अद्भूत है। आपको अपनी भाषा में किसी विषय पर उपलब्ध सामग्री अथवा तस्वीरों को अपनी ही भाषा में सर्च करने का। अब इंटरनेट पर सिर्फ अंग्रेजी भाषा की बपौती नहीं रह गई है। यह दुनिया की कई भाषाओं में उपलब्ध है। चीन में बड़ी संख्या में इंटरनेट के उपयोक्ता अपनी भाषा मैंडेरियन का इस्तेमाल करते हैं। दुनिया की कई भाषाओं में वेब पते भी रजिस्टर किए जा रहे हैं। यानी आपको इंटरनेट के एड्रेस बार में जाकर भी डब्लू डब्लू डब्लू अंग्रेजी में करने की कोई जरूरत नहीं है। आप अपने कंप्यूटर की डिफाल्ट भाषा में ही वेब एड्रेस टाइप कर सकते हैं। भारत में अभी हिंदी में ही वेब पता बनाने का चलन नहीं बढ़ा है। पर वह दिन अब दूर नहीं है जब सब कुछ हिंदी में ही होगा।

हिंदी में ही मेल करें और प्राप्त करें
अगर आपके पास विंडो एक्सपी संस्करण का पीसी है तो आप उसमें हिंदी भाषा को एक्टिवेट करवा लें। उसके बाद जब अपना गूगल की ईमेल सेवा जीमेल. काम खोलेंगे तो यह अपने आप आपसे हिंदी में ही वार्तालाप करेगा। आप इसकी संपूर्ण विंडो (खिड़की) हिंदी में ही देखेंगे। साथ ही इसमें आप फोनेटिक की बोर्ड पर हिंदी में पत्र लिख सकते हैं। अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को ईमेल कर रहे हैं जिसके पीसी पर हिंदी भाषा सक्रिय कर दी गई है तो वहां पर आपका मेल हिंदी में ही दिखाई देगा। इसके साथ ही सभी जीमेल के यूजर को भी यह हिंदी में ही दिखाई देगा। हां दूसरे किसी वेबसाइट पर ईमेल पता रखने वालों को हिंदी में पढ़ने में असुविधा होगी। यानी जीमेल के उपयोक्ता बड़ी आसानी से हिंदी में ही वार्तालाप कर सकते हैं।

हिंदी के लोग सक्रिय हों
कंप्यूटर पर हिंदी के लोकप्रिय नहीं होने का बड़ा कारण है कि हिंदी के लोगों ने इस तकनीक ज्यादा सहारा नहीं दिया है। देश के सभी हिंदी लेखकों हिंदी के शिक्षकों और हिंदी भाषा से एमए या शोध करने वाले लोगों को चाहिए कि वे हिंदी भाषा को इंटरनेट पर ज्यादा लोकप्रिय बनान में सहयोग करें। सभी नए कंप्यूटर सीखने वालो को भी चाहिए कि वे फोनेटिक की बोर्ड सीखें। यह वैज्ञानिक है तथा इसे महज कुछ घंटों में ही याद किया जा सकता है। 
-         विद्युत प्रकाश मौर्य 
( ये लेख 2005 में लिखा गया था )