Wednesday, 30 May 2007

चुनरी संभाल गोरी....

चुनरी संभाल गोरी उड़ी चली जाए रे...। कवि ने जब ये पंक्तियां लिखी होंगी तो इसके कुछ अच्छे मतलब रहे होंगे। पर आजकल जब फैशन शो के रैंप पर देखें तो चुनरी तो गायब हो ही गई है बाकी कपड़े संभालने को लेकर भी डिजाइनरों में कोई सावधानी नहीं दिखाई देती। इस बार तो इंडिया फैशन वीक के दौरान अजीब घटनाएं देखने को मिलीं। एक माडल जो रैंप पर आई उसका आगे का वस्त्र सरक कर गिर गया। उस माडल ने रैंप पर चलते हुए ही अपने कपड़े को संभाला और वापस चली गई। उसके दो दिन दाबद एक दूसरी माडल जो स्कर्ट पहन कर रैंप पर आई वह पीछे से फटी हुई थी।
मीडिया में इस घटना के बाद अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं हुई। कई लोगों ने उस माडल के आत्मविश्वास की तारीफ की। साथ ही वे माडल और डिजाइनर रातों रात चर्चा में आ गए। 

वहीं लोगों ने फैशन के नाम पर परोसे जा रहे इस नंगापन की भी आलोचना की। कुछ माडलों ने बताया कि फैशन शो के दौरान जो आउटफिट ( कपड़े) उन्हें दिए जाते हैं उन्हें पहन कर चेक करने का वक्त नहीं होता कि वे ठीक से सिले हुए हैं या नहीं। इसलिए कई बार इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। कुछ साल पहले दिल्ली के एक फैशन शो में भी रैंप पर एक माडल का स्कर्ट खुल गया था। इस आधुनिक तकनीक के दौर में ऐसी घटना होने पर फोटोग्राफरों के कैमरे के फ्लैश धड़ाधड़ चमकने लगते हैं। लोग अपने मोबाइल फोन से वीडियो फिल्म बनाने लगते हैं। इस बार भी इन घटनाओं को वीडियो क्लिपों को ट्रांसफर किया गया। यहां तक कि इंटरनेट की कुछ वेबसाइटों पर भी जारी कर दिया गया। भले ही ये घटनाएं लोगों के मजे लेने की चीज हो पर क्या हमारे नामी गिरामी डिजाइनर अपने कपड़ों को लेकर इतनी सावधानी भी नहीं बरत सकते हैं कि वे ठीक से सिले हुए हैं या नहीं। जब हम दर्जी से भी समान्य कपड़े सिलवाते हैं तो इतनी लापरवाही की उम्मीद नहीं करते। फिर नामी गिरामी डिजाइनर क्या अपने बनाए कपड़ों को क्रास चेक नहीं करते। लिहाजा यह उनकी लापरवाही तो है ही पर इसका दूसरा पहलू भी है कि उन्हें इन घटनाओं से काफी पब्लिसिटी मिल जाती है। भले ही यह निगेटिव प्रचार है पर कहते हैं कि बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा वाली कहावत यहां लागू होती है। इन घटनाओं में माडल व डिजाइनर दोनों ही मीडिया की सुर्खियों में छाए रहे। तो क्या कुछ माडल व डिजाइनर जानबूझ कर इस तरह के काम कर रहे हैं।
सोचने वाली बात है कि ये घटनाएं स्पांटेनियस थीं या प्री प्लान्ड। और जैसे भी ये घटनाएं हों इससे देश के जाने माने फैशन शो की बदनामी तो होती ही है। ऐसे डिजाइनरों को इस तरह की घटनाओं को के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। साथ ही फैशन शो के आयोजकों को इस तरह के डिजाइनरों का अगले शो के लिए बहिष्कार करना चाहिए। ऐसी घटनाओं की जांच भी कराई जानी चाहिए जिससे ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। वैसे भी भारतीय डिजाइनरों को फैशन शो फैशन टीवी के उस दौर की ओर ही बढ़ रहे हैं जिसमें फैशन कम बदन दिखाने का शो ज्यादा होता है। अगर डिजाइनरों को खुल कर बदन दिखाने का मौका नहीं मिलता है तो वे दूसरे तरीके अपनाते हैं। आखिर किस ओर जा रहे हैं ये फैशन शो। यह सवाल अनुत्तरित है। इसका हमें जवाब ढूंढना होगा।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


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