Sunday, 12 January 2014

अब आ गया हाई डेफनिशन टीवी का दौर

दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेलों की शुरूआत के साथ ही एक और इतिहास रचा जा चुका है। टेलीविजन प्रसारण के क्षेत्र में हमने हाईडेफनिशन यानी एचडी टीवी के दौर में कदम रख दिया है। 1982 में जब भारत में एशियाई खेलों की शुरूआत हुई थी तब पहली बार देश में रंगीन प्रसारण की शुरूआत हुई थी। अब साल 2010 में डीडी एचडी टीवी नामक नया चैनल शुरू कर चुका है। हाई डेफनिशन टीवी पर तस्वीरें परंपरागत टीवी की तुलना में पांच गुनी ज्यादा साफ दिखाई देती हैं। हालांकि अभी देश में हाई डेफनिशन टीवी देखने वालों की संख्या महज तीन लाख के आसपास है, लेकिन जल्द ही इस संख्या में इजाफा होगा। अगर दुनिया की बात करें 2003 में पहली बार अमेरिकन फुटबाल का प्रसारण हाई डेफनिशन टीवी पर हुआ था। तो डिश टीवी, रिलायंस बिग, सन डाइरेक्ट समेत कई डीटीएच आपरेटरों ने हाई डेफनिशन टीवी का प्रसारण अपने नेटवर्क पर शुरू कर दिया है।लेकिन हाई डेफनिशन टीवी का मजा लेने के लिए आपके डीटीएच का सेट टाप बाक्स भी हाई डेफनिशन रेडी होना चाहिए। यानी पुराने सेट टाप बाक्स को बदलना पड़ेगा। साथ ही अगर आपके पास परंपरागत सीआरटी यानी कैथोड रे ट्यूब वाला टीवी सेट है तो उस टीवी सेट को भी बदलना पड़ेगा। आजकल बाजार में जितने भी एलसीडी,एलईडी या प्लाज्मा स्क्रीन मिल रहे हैं, सभी हाई डेफनिशन रेडी हैं।


क्या है अंतर-
हाई डेफनिशन टीवी की स्क्रीन का अनुपात 16:9 का होता है। जबकि परंपरागत सीआरटी टीवी का 4:3 का। यानी हाई डेफनिशन टीवी में स्क्रीन की चौड़ाई अधिक होती है, जैसा कि आप बाजार में मिलने वाले नए टीवी स्क्रीन और लैपटॉप आदि के स्क्रीन को देखते होंगे।समान्य टीवी एनलाग टेक्नोलाजी पर काम करता है जबकि एचडीटीवी डिजिटल तकनीक पर काम करता है।रिजोल्यूशन ज्यादा होने के कारण इस तरह के टीवी पर आपको तस्वीर बिल्कुल साफ दिखाई देगी। काफी हद तक वैसे जैसै घटनाएं आपकी आंखों के सामने घट रही हों। समान्य भाषा में हम कह सकते हैं कि एचडीटीवी में तस्वीर की स्पष्टता समान्यटीवी से पांच गुनी ज्यादा होगी।

परंपरागत टेलीविजन में जो तस्वीरें आपदेखते हैं वह कई सौ ब्राइटनेस लाइनों से मिलकर बनती हैं। इन लाइनों में छोटे-छोटे डाट्स (बिंदु) होते हैं जिन्हें हम पिक्सेल कहते हैं। आमतौर पर एनलाग रंगीन टीवी में 525 ब्राइटनेस लाइन होती हैं जबकि हर लाइनमें 500 डाट्स होते हैं। इनसे मिलकर ही बनती है आपके टीवी की मुकम्मल तस्वीर। एनलॉग टीवी एनटीएससी ( नेशनल टेलीविजन स्टैंडर्ड कमिटी) तकनीक पर काम करता है। इसमें अधिकतम 525 लाइनें होती हैं जिनमें 480 ही दिखाई देती हैं। समान्यतः टीवी की तस्वीर कुल 2.10 लाख पिक्सेल से बनती है। जबकि एचडीटीवी में तस्वीर 20 लाख पिक्सेल से बनती है। यानी एनलाग टीवी से तस्वीर 10 गुनी साफ दिखाई देगी।

एचडीटीवी की विशेषताएं

1.तस्वीरों की जीवंतता, उच्चरिजोल्यूसन।

2 डाल्बीडिजिटल क्वालिटी की आवाज।

3.कंप्यूटरसे सीधे जोड़ने रिकार्ड करनेकी सुविधा


4. वाइडतस्वीर यानी अतिरक्त इमेज एरिया,स्क्रीन के चौड़ा होने के कारण एचडीटीवी में वाइड उपस्थिति होती है।टीवी स्क्रीन का अनुपात 16- 9 काहोता है। 


वैसी ही जैसी कीसिनेमास्कोप फिल्म देखतेसमय महसूस होता है। यानी प्रसारण में आप अतिरिक्त इमेज एरिया देख सकते हैं।

 5. एचडीटीवीमें 5.1 चैनलसीडी प्लेयर जैसी क्वालिटीकी आवाजहोती है। यानी आप घरमें होम थियेटर लगा सकते हैं।साथ ही डाल्बी डिजिटल क्वालिटीकी आवाज सुनी जा सकती है।

 6. एचडीटीवीमें तस्वीर का प्रसारण एमपीईजी-2 या एमईपीजी-4 तकनीकका इस्तेमाल होता है। वहीतकनीक जिसका इस्तेमाल कंप्यूटरोंमें तस्वीरें के लिए हो रहाहै। इसलिए एचडीटीवी की तस्वीरों को कंप्यूटर या मल्टी मीडियापीसी पर सीधे रिकार्ड कियाजा सकता है। 



अगर आप एचडीटीवी खरीद भी लेते हैंतो सिर्फ इतने से बात नहीं बनती। बेहतर क्वालिटी कीतस्वीर प्राप्त करने के लिएजरूरी है कि प्रसारक भी एचडीटीवीकी क्वालिटी पर ही प्रसारणकरें। अमेरिका और जापान केकई टेलीविजन प्रसारक अब इसतकनीक पर प्रसारण कर रहे हैं।यानी टेलीविजन स्टेशन के लिएतकनीक में अपग्रेडेशन जरूरीहोगा। भारत में भी डीडी एचडी के अलावा डिस्कवरी और नेशनल ज्योग्राफिक जैसे चैनलों ने एचडी प्रसारण शुरू कर दिया है। 

आने वाले दिनों में कई और ब्राडकास्टर इसतरह का बदलाव करने की तैयारी कर रहे हैं। टेलीविजनबनाने वाली कंपनियां धीरे-धीरेएचडीटीवी पर शिफ्ट कर रहीहैं। दुनिया भर के टीवी कंपनियोंने अब नए एनलॉग कलर टीवी का निर्माणपर रोक लगा दी है।

माधवी रंजना


Wednesday, 1 January 2014

हर मोड़ पर प्रेरणा देती है मानसप्रिया

कोच्चि- चाइनीज फिशिंग नेट। 
जब कभी आप दुखी और निराश होते हैं तो कई बार आपन महसूस किया है कोई आपको चुपके से आकर आपको कह जाता है उठो जागो और दुबारा कोशिश करो। आप अपनी विफलता का शोक मना रहे होतें पर आपके अंदर से एक आवाज आती है नहीं लंबी जिंदगी पड़ी है चलो इसका साथ निभाओ। वह मानसप्रिया ही तो है जो आपको हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

यह निर्विवाद सी बात है कि हर सफल आदमी अक्सर भावुक होता है। पर उसकी सफलता में किसी न किसी की प्रेरणा का योगदान होता है। यह प्रेरणा ही आपकी मानसप्रिया है। मानसप्रिया यानी जो मन को प्रिय लगे जो मन को भाती हो। यह मूर्त भी हो सकती है। अमूर्त भी। यह आपकी दोस्त भी हो सकती है। आपकी प्रेमिका भी। यह आपके मानस पटल में आपकी कल्पना भी हो सकती है। पर मानसप्रिया हमेशा आपको संघर्ष करने के लिए प्रेरित करती रहती है। यहां तक की दुनिया के अधिनायक स्वभाव के व्यक्ति भी कहीं न कहीं भावुक होते हैं। वे भी किसी न किसी से प्रेरणा प्राप्त कर रहे होते हैं। जैसे हिटलर और ओसामा बिन लादेन के प्रेम के बारे में भी हमें सुनने को मिलता है।

दुनिया के हर कोने में प्रेरित होने के उदाहरण मिलते हैं। कई वैज्ञानिकों ने किसी से प्रेरित होकर अविष्कार किए। एक खेत मजदूर को उसकी पत्नी रोज दोपहर का खाना देने आती थी। उसे लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। बीच में पहाड़ पड़ता था। उस मजदूर ने पहाड़ को खोदना शुरू किया। कुछ दिनों में सुरंग बना दिया। कई महान लोगों को जीवन में किसी मोड़ पर किसी के द्वारा कही बात इस तरह दिल को छू जाती है कि उसे पूरा करने के लिए वे सालों लगा देते हैं। वह मानसप्रिया ही तो है जिसकी बातें आपके मानस पटल के किसी कोने में सालों तक बैठी रहती है। आपको ऐसा लगता है मानो कोई आपको अभी अभी आपको आकर कह रहा हो। हां हां तुम्हे ऐसा ही करना है। आप महसूस करके देखिए। आपके अंदर भी एक मानसप्रिया रहती है जो आपको प्रेरित करती रहती है।

मानसप्रिया कई बार आपको कोई गलत कदम उठाने से रोक लेती है। कई बार अपराध करने की प्रवृति को दबा देती है। हो सकता है कि किसी की मानसप्रिया किसी को गलत काम करने को भी प्रवृत करती हो पर ऐसा बहुत कम ही होता है। सच्चे अर्थों में मानसप्रिया की परिकल्पना ऐसी ही है जो विपरीत परिस्थितियों में आपके व्यक्तित्व को विघटित होने से बचा ले। जब आप अनिर्णय की स्थिति में होते हैं। आपको समझ में नहीं आता कि कौन सा रास्ता चुनना उचित होगा। ऐसे में मानसप्रिया आपको सही रास्ता बताती है। वह एक अंतःप्रेरणा की तरह है। बस आपको महसूस करने की बात है।

अगर आपकी मानसप्रिया की परिकल्पना मूर्त रूप में है तो वह आपकी पत्नी आपकी बहन, आपकी प्रेमिका या और भी कोई हो सकती है। आप रिश्तों के प्रति इमानदार रहें तो आपको कोई न कोई मिल जाएगा जो आपको हमेशा सही सलाह देता हो। याद रखिए मानसप्रिया आपकी पत्नी की सौतन या आपकी कोई रखैल या अवैध संबंध नहीं हो सकती। वह आपकी अच्छी दोस्त हो सकती है जो आपको हमेशा सही कदम उठाने को ही सलाह देती हो।
-विद्युत प्रकाश मौर्य

Sunday, 10 November 2013

एंड्राएड फोन में सटासट टाइप करें हिंदी में

गो कीबोर्ड से करें हिंदी में तेज टाइपिंग
मोबाइल फोन में हिंदी में टाइप करने के कई विकल्प में से एक अच्छा विकल्प है गो कीबोर्ड से टाइपिंग। यह सबसे सहज है। यह हिंदी के अलावा कई भाषाओं में सपोर्ट करता है। वैसे गूगल के प्ले स्टोर पर कई विकल्प मिलते हैं पर उनमें गो कीबोर्ड सबसे बेहतर है। कई मोबाइल फोन में हिंदी सक्रिय करने का विकल्प नहीं होता। वहां पर आप प्ले स्टोर से जाकर गो कीबोर्ड का एप डाउनलोड करें। इस लिंक पर जाएं ( https://play.google.com/store/apps/details?id=com.jb.emoji.gokeyboard) इसका सिंबल हरे रंग के पत्ते जैसा है। डाउनलोड करने के बाद में लैंगवेज एंड इनपुट में गो कीबोर्ड को सक्रिय करें। इसके साथ ही गो कीबोर्ड की इनपुट लैंगवेज लिस्ट में जाकर हिंदी भाषा को भी चेक कर दें। इसके बाद आपके मोबाइल फोन पर हिंदी भाषा में टाइप करने का विकल्प आ जाएगा। गो कीबोर्ड का डाउनलोड एंड्राएड के हर वर्जन के लिए मौजूद है। आप कीबोर्ड का लेटेस्ट वर्जन ही डाउनलोड करें तो अच्छा रहेगा। गो कीबोर्ड की दूसरी विशेषता है कि ये अंक ( 1, 2,3, 4 ) को रोमन में दिखाता है। 

डिक्सनरी करें ऑन - अगर आप गो कीबोर्ड के साथ हिंदी डिक्सनरी भी डाउनलोड करके ऑन कर लें, तो इसका आपको फायदा होगा। डिक्सनरी की मदद से आप तेजी से संदेश टाइप कर सकेंगे। क्योंकि ये एक दो अक्षर लिखने के बाद पूरे शब्दों का विकल्प दिखाता है। 



ऐसे करें एंड्राएड फोन में हिंदी सक्रिय 
एंड्राएड हिंदी मोबाइल फोन पर सहज ढंग से हिंदी में टाइप किया जा सकता है। हिंदी भाषा सक्रिय होने पर आप एसएमएसफेसबुक चैटट्विटर या नोटपैड या ईमेल बाक्स में हिंदी में टाइप कर सकते हैं। यहां की बोर्ड लेआउट के रूप में इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड का विकल्प मिलता है। ये हिंदी का सबसे आसान कीबोर्ड है। लेकिन जिन्हें कीबोर्ड नहीं आता वे भी मोबाइल पर टैप करके आसानी से अपनी भाषा में टाइप कर सकते हैं। 


एंड्राएड 2.2 और उसके आगे के वर्जन में एक से अधिक भाषाओं के सक्रिय करने का विकल्प मौजूद है। 

ऐसे करें हिंदी भाषा सक्रिय - ( एंड्राएड 4 के वर्जन में ) 
टैप - सेटिंग- 
टैप - लैंगवेज एंड इनपुट 
टैप - कीबोर्ड एंड इनपुट में
डिफाल्ट लैंगवेज ( अंग्रेजी ही रहने दें) 
टैप - एंड्राएड की बोर्ड 
टैप - एंड्राएड कीबोर्ड्स 
कई भाषाओं का विकल्प दिखाएगा
यहां हिंदी भाषा को चुनें। 

एंड्राएड मोबाइल में एक साथ एक से अधिक भाषा जोड़ी जा सकती है। टाइप करते समय भाषा बदलने के लिए कीबोर्ड में स्पेस बार बटन के बगल में विकल्प मौजूद होता है। आप स्पेस बार से भाषा बदलने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

vidyutp@gmail.com

Friday, 8 November 2013

जीमेल में सक्रिय करें कीबोर्ड – अपनी भाषा में लिखें मेल

किसी को अपनी भाषा में ईमेल लिखने का अपना ही आनंद है। ठीक वैसे ही जैसे आप गुजरे जमाने में खत लिखा करते थे। ईमेल का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोगों की आईडी जीमेल पर जरूर है। तो आईए जानते हैं कि आप कैसे जीमेल में अपनी भाषा में लिख सकते हैं। जीमेल न सिर्फ हिंदी बल्कि पंजाबी, गुजराती, मराठी, संस्कृत, बांग्ला जैसी कई भाषाओं में लिखने की सुविधा देता है।


ऐसे जोड़े जीमेल में अपना कीबोर्ड

अपना जीमेल खाता खोलें
ऊपर दायीं तरफ सेटिंग बटन क्लि करें
सेटिंग में लैंगवेज देखें
शो आल लैंगवेज आप्सनस ( इस बटन को क्लिक करें)
-    इनबेल इनपुट टुल्स ( इस बाक्स को चेक करें)
-    भाषाओं की सूची खुल जाएगी।
-    अब इसमें हिंदी की तलाश करें
-     चार तरह की हिंदी दिखाई देगी
-    अ हिंदी देवनागरी , हिंदी देवनागरी फोनेटिक और हिंदी (INSCRIPT) 
-    इनमें हिंदी (INSCRIPT) का चयन करें ।
-    इसके बाद ये आपके कीबोर्ड में जुड़ जाएगा।
-    अब सबसे नीचे जाकर सेंटिंग को सेव कर दें। अब वापस मेल बाक्स पर आ जाएं।

आपके जीमेल में हिंदी भाषा सक्रिय हो चुकी है। जब मेल लिखना या चैट करना हो। सेटिंग के बगल में बनी कीबोर्ड की तस्वीर को क्लिक करें। वहां हिंदी कीबोर्ड दिखाई देगा। इसके बाद आप मेल पर हिंदी इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड ले आउट के मुताबिक मेल पर टाइप कर सकते हैं।

-    जिन लोगों को कीबोर्ड ले आउट याद नहीं वे आनस्क्रीन कीबोर्ड देखकर टाइप कर सकते हैं।

-    जीमेल पर हिंदी सक्रिय हो जाने पर यह किसी भी सिस्टम पर काम करेगा भले ही उस सिस्टम में हिंदी भाषा को सक्रिय नहीं किया गया हो। आप अपना मेल चाहे जहां भी खोलेंगे हिंदी में टाइप कर पाने में सक्षम होंगे।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

-    ( संपर्क – vidyutp@gmail.com M- 9953684150) 

Wednesday, 6 November 2013

यूनिकोड फांट्स ने किया काम आसान

कंप्यूटर पर हिंदी में खास तौर पर हम फांट्स की समस्या से जुझते रहते हैं। कंप्यूटर पर हिंदी के तेजी से लोकप्रिय नहीं हो पाने का बहुत बड़ा कारण कोई सर्व मान्य फांट का नहीं होना है। पर यूनिकोड फांट ने हमारी राहें आसान कर दी हैं। विंडो के एक्सपी वर्जन के साथ किसी भी भाषा के यूनिकोड फांट अच्छी तरह सपोर्ट करते हैं। आप हिंदी के कई सौ फांट www.ildc.in से मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। यह वेबसाइट भारत सरकार की है।

एटीएम और टीटीएफ
जब कंप्यूटर में विंडो 95 का चलन था तब हिंदी के लिए एटीएम (एडोब टाइप मैनेजर) फांट इस्तेमाल किए जाते थे। वहीं कई अखबारों के लिए सम्मिट स्क्रिप्ट मैनेजर ने फांट विकसित किए जो बिना उसके डुंगल के नहीं चलाए जा सकते थे। यह एक महंगी प्रक्रिया थी। न तो हिंदी के पास कोई सर्व मान्य की बोर्ड था न ही निःशुल्क प्राप्त होने वाले फांट्स। उसके बाद दौर या टीटीएफ यानी ट्रू टाइप फांट का। विंडो 98 इस्तेमाल करने वाले लोग टीटीएफ फांट का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये फांट भी आईएलडीसी की साइट पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। टीटीएफ फांट्स को एप्पल कंपनी ने विकसित किया है। बाद में इसे माइक्रोसाफ्ट ने भी अपने साफ्टवेयरों में स्वीकृत किया है। ये फांट बड़े स्पष्ट होते हैं तथा एलसीडी स्क्रीन पर साफ दिखाई देते हैं। विंडो 98 में गूगल की हिंदी वेबसाइट हिंदी में देख सकते हैं इसके लिए आपको आईएलडीसी की वेबसाइट पर जाकर हिंदी का टीटीएफ फांट डाउनलोड करना पड़ेगा।

क्या है यूनिकोड
यूनिकोड प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष नंबर प्रदान करता है,चाहे कोई भी प्लैटफॉर्म हो,चाहे कोई भी प्रोग्राम होचाहे कोई भी भाषा हो। कंप्यूटरमूल रूप सेनंबरों से संबंध रखते हैं। ये प्रत्येक अक्षर और वर्ण के लिए एक नंबर निर्धारित करके अक्षर और वर्ण संग्रहित करते हैं। यूनिकोड का आविष्कार होने से पहलेऐसे नंबर देने के लिए सैंकडों विभिन्न संकेत लिपि प्रणालियां थीं। किसी एक संकेत लिपि में पर्याप्त अक्षर नहीं हो सकते हैं : उदाहरण के लिए,यूरोपीय संघ को अकेले हीअपनी सभी भाषाओं को कवर करने के लिए अनेक विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है। अंग्रेजी जैसी भाषा के लिए भीसभी अक्षरोंविरामचिन्हों और सामान्य प्रयोग के तकनीकी प्रतीकों हेतु एक ही संकेत लिपि पर्याप्त नहीं थी। ये संकेत लिपि प्रणालियां परस्पर विरोधी भी हैं। इसीलिएदो संकेत लिपियां दो विभिन्न अक्षरों के लिएएक ही नंबर प्रयोग कर सकती हैंअथवा समान अक्षर के लिए विभिन्न नंबरों का प्रयोग कर सकती हैं।

अधिकांश साफ्टवेयरों में स्वीकृत
किसी भी कंप्यूटर (विशेष रूप से सर्वरको विभिन्न संकेत लिपियां संभालनी पड़ती है। फिर भी जब दो विभिन्न संकेत लिपियों अथवा प्लैटफॉर्मों के बीच डाटा भेजा जाता है तो उस डाटा के हमेशा खराब होने का जोखिम रहता है। यूनिकोड स्टैंडर्ड को ऐपलएचपीआईबीएमजस्ट सिस्टममाईक्रोसॉफ्ट,औरेकलसैपसनसाईबेसयूनिसिस जैसी उद्योग की प्रमुख कंपनियों ने अपनाया है।
आदान-प्रदान में आसानी
यूनिकोड में डाटा को बिना किसी बाधा के विभिन्न प्रणालियों से होकर ले जाया जा सकता है। इसकी आवश्यकता आधुनिक मानदंडोंजैसे एक्सएमएलजावा,एकमा स्क्रिप्ट (जावा स्क्रिप्ट), एलडीएपीकोर्बा 3.0, डब्ल्यूएमएल के लिए होती है और यह आईएसओ/आईईसी 10646 को लागू करने का अधिकारिक तरीका है। यह कई संचालन प्रणालियोंसभी आधुनिक ब्राउजरों में होता है। यूनिकोड को ग्राहक-सर्वर अथवा बहु-आयामी उपकरणों और वेबसाइटों में शामिल करने सेपरंपरागत उपकरणों के प्रयोग की अपेक्षा खर्च में अत्यधिक बचत होती है। यूनिकोड से एक ऐसा अकेला सॉफ्टवेयर उत्पाद अथवा अकेला वेबसाइट मिल जाता हैजिसे री-इंजीनियरिंग के बिना विभिन्न प्लैटफॉर्मोंभाषाओं और देशों में उपयोग किया जा सकता है। यूनिकोड के बारे में अधिक जानकारी के लिए इसकी वेबसाइटदेंखे (www.unicode.org) यह बिना हानि लाभ के काम करने वाले एक कान्सोर्टियम द्वारा विकसित किया गया है।

फोनेटिक की बोर्ड सीखें
हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के 500 से ज्यादा यूनिकोड फांट्स मुफ्त में प्राप्त करने के लिए आप www.ildc.in पर जाएं। अगर आप कंप्यूटर पर हिंदी में तेजी से काम करना चाहते हैं तो फोनेटिक की बोर्ड सीखें। यह रेमिंगटन से बहुत आसान है। कोई भी नया व्यक्ति महज दो दिन में इसे याद कर सकता है। हिंदी में विंडो एक्सपी का वर्डपैड हो या आफिस 2003 का हिंदी संस्करण,या आईएलडीसी द्वारा विकसित ओपन आफिस साफ्टवेयर सभी फोनेटिक की बोर्ड को सपोर्ट करते हैं। भारत सरकार ने इसे ही वैज्ञानिक और सरकारी की बोर्ड के रुप में मान्यता दे रखी है। आप यूनिकोड फांट की मदद से एमएस आफिस जैसे साफ्टवेयर में भी हिंदी में फोनेटिक की बोर्ड पर बड़े मजे से काम कर सकते हैं। पर अगर आप ओपन आफिस तो फ्री डाउनलोड पर उपलब्ध का इस्तेमाल करते हैं तो आपको कई और सुविधाएं मिल जाती हैं। आप यहां अपनी वेबसाइट हिंदी में भी बना सकते हैं। अपने तैयार किए गए टेक्स्ट को एचटीएमएल फार्मेट में भी सेव एज कर सकते हैं। कंप्यूटर पर हिंदी और फोनेटिक की बोर्ड का लेआउट चार्ट प्राप्त करने के लिएWWW.bhashaindia.com भी देखें।

-विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( ये आलेख 2007 में लिखा गया) 

Monday, 4 November 2013

सर्च करें हिंदी में

कंप्यूटर हिंदी का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अब आप अपनी भाषा में भी सर्च कर सकते हैं। गूगल डाट काम ने हिंदी में भी सर्च करने की सुविधा उपलब्ध करा दी है। वहां हिंदी के अलावा कुछ अन्य भारतीय भाषाएं भी हैं। सिर्फ हिंदी ही नहीं अब आप बांग्लामराटी , तमिल और तेलगू भाषाओं मे भी सर्च कर सकते हैं। यानी कि वे वेबसाइटें जो इन भाषाओं में आनलाइन सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। उन वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री में से कुछ भी आप ढूंढ सकते हैं। इंटरनेट पर सभी लोकप्रिय हिंदी समचार पत्रों की वेबसाइटें हैं जहां आप उनकी खबरें उनक आरकाईव में जाकर उनके पिछले पेज देख सकते हैं। इन अखबारों के राज्यवार संस्करणों को भी आप देख सकते हैं। इसके अलावा कुछ प्रमुख सरकारी और गैर सरकारी संगठन भी अब हिंदी में वेबसाइट बना रहे हैं। बीबीसी की हिंदी वेबसाइट बहुत अच्छी है। इस पर आप ताजी खबरें और सुरूचिपूर्ण फीचर सामग्री देख सकते हैं।

हिंदी में ही वेब का पता ठिकाना
पर गूगल जो आपको सुविधा देता है वह अपने आप मे अद्भूत है। आपको अपनी भाषा में किसी विषय पर उपलब्ध सामग्री अथवा तस्वीरों को अपनी ही भाषा में सर्च करने का। अब इंटरनेट पर सिर्फ अंग्रेजी भाषा की बपौती नहीं रह गई है। यह दुनिया की कई भाषाओं में उपलब्ध है। चीन में बड़ी संख्या में इंटरनेट के उपयोक्ता अपनी भाषा मैंडेरियन का इस्तेमाल करते हैं। दुनिया की कई भाषाओं में वेब पते भी रजिस्टर किए जा रहे हैं। यानी आपको इंटरनेट के एड्रेस बार में जाकर भी डब्लू डब्लू डब्लू अंग्रेजी में करने की कोई जरूरत नहीं है। आप अपने कंप्यूटर की डिफाल्ट भाषा में ही वेब एड्रेस टाइप कर सकते हैं। भारत में अभी हिंदी में ही वेब पता बनाने का चलन नहीं बढ़ा है। पर वह दिन अब दूर नहीं है जब सब कुछ हिंदी में ही होगा।

हिंदी में ही मेल करें और प्राप्त करें
अगर आपके पास विंडो एक्सपी संस्करण का पीसी है तो आप उसमें हिंदी भाषा को एक्टिवेट करवा लें। उसके बाद जब अपना गूगल की ईमेल सेवा जीमेल. काम खोलेंगे तो यह अपने आप आपसे हिंदी में ही वार्तालाप करेगा। आप इसकी संपूर्ण विंडो (खिड़की) हिंदी में ही देखेंगे। साथ ही इसमें आप फोनेटिक की बोर्ड पर हिंदी में पत्र लिख सकते हैं। अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को ईमेल कर रहे हैं जिसके पीसी पर हिंदी भाषा सक्रिय कर दी गई है तो वहां पर आपका मेल हिंदी में ही दिखाई देगा। इसके साथ ही सभी जीमेल के यूजर को भी यह हिंदी में ही दिखाई देगा। हां दूसरे किसी वेबसाइट पर ईमेल पता रखने वालों को हिंदी में पढ़ने में असुविधा होगी। यानी जीमेल के उपयोक्ता बड़ी आसानी से हिंदी में ही वार्तालाप कर सकते हैं।

हिंदी के लोग सक्रिय हों
कंप्यूटर पर हिंदी के लोकप्रिय नहीं होने का बड़ा कारण है कि हिंदी के लोगों ने इस तकनीक ज्यादा सहारा नहीं दिया है। देश के सभी हिंदी लेखकों हिंदी के शिक्षकों और हिंदी भाषा से एमए या शोध करने वाले लोगों को चाहिए कि वे हिंदी भाषा को इंटरनेट पर ज्यादा लोकप्रिय बनान में सहयोग करें। सभी नए कंप्यूटर सीखने वालो को भी चाहिए कि वे फोनेटिक की बोर्ड सीखें। यह वैज्ञानिक है तथा इसे महज कुछ घंटों में ही याद किया जा सकता है। 
-         विद्युत प्रकाश मौर्य 
( ये लेख 2005 में लिखा गया था ) 

Saturday, 2 November 2013

महज दो घंटे में सीखें हिंदी टाइपिंग


कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग ( इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड से ) महज दो घंटे में सीखी जा सकती है। चार घंटे अभ्यास के बाद बड़े आराम से आप टाइप कर सकते हैं, जी हां तेजी से। एक बाद याद रखें इनस्क्रिपट ले आउट में सारे स्वर बाईं तरफ हैं तो सारे व्यंजन दाहिनी तरफ। जिस की पर स्वर का अक्षर है उसी की पर उसकी मात्रा भी है। 

आइए सीखते हैं ---- 
 ख-ग घ --- सामान्य कुंजी पटल के अंग्रेजी अक्षर K-I की जोड़ी देखें। यहीं क ख और ग घ हैं।
त थ- द ध --- अगली दो कुंजियां L-O हैं जो त थद ध के लिए हैं,
च छ- ज झ --- अगली च छ,ज झ की
ट ठ -ड ढ --- और उससे अगली ट ठ ड ढ की।
र ह --- क के बाँई ओर JU की कुंजी से र-ह लिखते हैं और
प फ -ब भ ---उससे बायें H-Y पर पफबभ हैं।
कुंजियों की ये जगहें समझकर आत्मसात करने के लिए कुछ मिनट का समय काफी हैं। 
कठिन ( भारी) अक्षरके लिये (अर्थात् ख घ,थ ध,छ झ,ठ ढ,फ भ) शिफ्ट के साथ की दबानी होगी।
बांईं ओर की पांच कुंजी-जोडियों बारहखाड़ी के दस स्वरों के लिए हैं। 

अ आ – अंग्रेजी अक्षर DE की जोड़ी
इ ई – FR की जोडी
उ ऊ – GT की जोडी
ए ऐ – SW की जोडी
ओ औ – AQ की जोडी
इनका क्रम ओ औए ऐअ आइ ईउ ऊ रखा गया है क्योंकि इसमें सुविधा है। 
- शिफ्ट कुंजी के साथ लिखने पर स्वतः स्वर लिखा जाता है परन्तु किसी व्यंजन की मात्रा लगाने के लिए शिफ्ट की नहीं लगेगी। इस प्रकार दस मात्राएं तथा उन्हें लगाने का तरीका समझने के लिए कुछ मिनट काफी है।
- किसी भी अक्षर का आधा करने के लिए डी की दबाएं ( जिस पर अ की मात्रा है)