Tuesday, 14 April 2020

लॉकडाउन डायरी- एक सौ तीस करोड़ लोगों को घर में बंद किया (( 02 ))

लॉकडाउन के दौरान मेरे घर की छत से यूं दिखाई दे रहा आसमान 

कोरोना से जंग के बीच 25 मार्च से देश में लॉकडाउन की शुरुआत हुई। इससे पहले पंजाब समेत कई राज्य अपने यहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा चुके हैं। वहां सिर्फ सुबह 6 से 9 बजे तक जरूरी चीजों की आपूर्ति के  लिए बाजार खुलता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी 130 करोड़ आबादी वाले देश में बंदी की शुरुआत हो चुकी है। ऐसी बंदी जो एक अदृश्य वायरस से फैलने वाले बीमारी से लड़ने के लिए है। 

25 मार्च, पहला दिन  - आज से दफ्तर नहीं जाना है। हिन्दुस्तान हिंदी दैनिक में वर्क फ्रॉम होम की शुरुआत हो रही है। हमने अपनी कॉलोनी के केबल वाले से आग्रह करके ब्राडबैंड कनेक्शन लगवा लिया है। हालांकि ज्यादा दबाव के कारण वह पूरी गति से नहीं चल पा रहा है। हमारी कॉलोनी में लोग अनुशासन से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। देश भर में पैसेंजर ट्रेन, मेट्रो ट्रेन आदि का परिचालन 14 अप्रैल तक के लिए बंद हो चुका है।


26 मार्च, दूसरा दिन सरकार ने शहर और गांव के गरीबों के लिए कुछ राहतों का ऐलान किया। इस बीच देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 16 हुई जबकि 600 से ज्यादा संक्रमित हैं। प्रसार की गति धीमी है। हमें आशावादी रहना चाहिए। गांव में चाचा से बात हुई। लॉकडाउन में उन लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं है।

27 मार्च,  तीसरा दिन दिल्ली समेत महानगरो से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन जारी है। ये लोग पैदल ही अपने घरों को चल पड़े हैं। दिल्ली के यूपी गेट पर रात को भारी भीड़ जमा हो गई। बिहार सूचना केंद्र ने बिहार के लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 

 28 मार्च, चौथा दिन -आनंद विहार और यूपी गेट पर दस हजार से ज्यादा लोग इकट्ठे हो गए। बिहार और यूपी जाने वाले लोग। एक किलोमीटर के करीब लंबी लाइन लग गई। हालांकि दिल्ली सरकार कह रही है कि दैनिक वेतन वाले मजदूर पलायन न करें उनके रहने के लिए यहां स्कूल और रैन बसेरे खोले जा रहे हैं। हमारे साथ मनोज कुमार बोस बता रहे हैं कि शाहजहांपुर, लखनऊ सीमा पर दिल्ली, पंजाब आदि स्थानों से पैदल चलते हुए लोग अपने घर जाने के लिए पहुंच रहे हैं। 

29 मार्च - पांचवां दिन -  दिल्ली बार्डर से बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के मजदूरों को बसों में भरकर उनके जिले में भेजा गया। पर इसमें खतरा भी है। सरकार ने सभी राज्यों की सीमा सील करने का आदेश दिया। दिल्ली के सभी स्कूल श्रमिकों के रहने के लिए खोल दिए गए हैं। वहां उनके खाने का भी इंतजाम है। रात में 1978 की फिल्म किनारा देखी, जिसका गीत नाम गुम जाएगा... लोकप्रिय हुआ था। 

30 मार्च - छठा दिन - दिल्ली के निजामुदद्दीन में तबलीगी जमात के दफ्तर से 24 कोरोना के संदिग्ध अस्पताल में भर्ती कराए गए। रोज देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है। मैं दिन में रोज अपने विश्वविद्यालय के दिनों के कुछ पुराने दोस्तों से बात करने की कोशिश कर रहा हूं। आज दिग्विजय नाथ सिंह और चकफतह (वैशाली) में पिता जी के बैंक के मित्र सुशील कुमार सिन्हा जी से बात की। 

31 मार्च - सातवां दिन -  मैं कई दिन से अपने फ्लैट से बाहर नहीं निकला हूं। देर रात गए धर्मेंद्र की एक पुरानी फिल्म यूट्यूब पर देखता हूं। के स्कूल ने मोबाइल एप पर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी है। अनादि दसवीं कक्षा में चले गए हैं। सरकार सख्त कदम उठाने की योजना बना रही है। शहरों को सेनेटाइज करने पर काम हो रहा है। आज शाम को दिल्ली में फिर बारिश हुई। दिन में कानपुर वाले एसपी अग्निहोत्री जी बातें हुई वे हमें केदारनाथ यात्रा के दौरान मिले थे।  

एक अप्रैल, आठवां दिन: आज देश में 400 से ज्यादा मामले सामने आए. मेरे कई मित्र आशावादी हैं,  कह रहे हम ये जंग जीत लेंगे। बाजार में सब्जियां सस्ती हो गई हैं। अनादि के स्कूल ने मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं लगानी शुरू कर दी है। 

दो अप्रैल, नौवां दिन: दफ्तर के काम से आज अवकाश,  खाना बनाना,  सफाई और पुरानी फिल्म कटी पतंग देखी। कालोनी में राशन दुकानें सिर्फ सुबह शाम खुल रही हैं। मैं रोज कुछ पुराने दोस्तों से बातें कर रहा हूं। कन्हौली के स्कूली दोस्त ब्रजेंद्र पप्पू से बात हुई। वे अपने गांव के घर में प्रवास कर रहे हैं। रात में देवानंद की हम दोनों फिल्म देखी। 

तीन अप्रैल 10वां दिन - सुबह नौ बजे प्रधानमंत्री ने 10 मिनट का वीडियो संदेश जारी किया। आज कई दिनों बाद मेरे दरवाजे पर अखबार (टाइम्स ऑफ इंडिया) आया हुआ था। वैसे 23 तारीख से ही अखबार के वितरण में बाधा आ रही है। रेलगाड़ियों में 15 अप्रैल और उसके आगे का आरक्षण हो रहा है। पर पता नहीं 15 अप्रैल से रेलों का संचालन शुरू होगा या नहीं। बीएचयू को दोस्त परमेश्वर से बात हुई वे सासाराम के पास अपने गांव में पहुंचे हुए हैं। आशुतोष पाठक से भी बात हुई वे अपने गांव हैदरनगर (पलामू) में अपने परिवार के साथ हैं।
चार अप्रैल  11 दिन : सुबह 11 बजे सोकर उठा । संयोग आज अखबार दरवाजे पर था। खबरों पर नजर डालने के बाद फिर पुराने दोस्तों से बात की। मार्च की 19 तारीख से ही टीवी नहीं खोला। किताबें पढ़ रहा हूं या फिर वेबसाइट पर अपनी पसंद की खबरें देखता हूँ ।  रात को खाने में मटर पनीर बनाया। 

5 अप्रैल 12वां दिन :  दीप से दीप जले - आज प्रधान मंत्री ने रात नौ बजे नौ मिनट दीया जलाने को कहा है । देश भर केलोगों ने ऐसा किया भी। पर कुछ अति उत्साही लोग पटाखे चलाने लगे। हमारी कालोनी में भी लोग नहीं माने। हां लोगों ने इस दौरान घर के अंदर की बत्तियां जरूर बंद की। आज कई दिन बाद रात को लंबी नींद ले पाया। देर रात को काम खत्म करने बाद यूट्यूब पर शास्त्रीय संगीत सुनता हूं। खास तौर पर सामता प्रसाद ( गोदई महाराज ) किशन महाराज, अहमद जान थिरकवा, अल्लारखा खान और उस्ताद जाकिर हुसैन के तबला परफारमेंस के वीडियो। 

06 अप्रैल - 13वां दिन - कोराना से देश में मृतकों की संख्या 100 पार कर गई। वहीं संक्रमित लोगों की संख्या 4000 को पार कर गई। कई राज्यों की स्थित आशाजनक है। जैसे छत्तीसगढ़ में 10 केस मिले थे, जिसमें से लगभग सभी ठीक हो गए। दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में अभी ज्यादा संक्रमित लोग हैं। तीस अप्रैल को गैस सिलेंडर बुक किया था जो आज डिलेवर हुआ।

07 अप्रैल 14वां दिन - इस लॉकडाउन में हमारे दो निकटम लोगों की सेवाएं जारी है। पत्नी माधवी के बड़े भाई पटना में प्याज का कारोबार करते हैं। वहीं जालंधर के मेरे मित्र डिंपी सचदेवा सब्जियों के आढती हैं। दोनों का कारोबार जरूरी सेवाओं में आता है। तीन  दिन बाद फ्लैट से बाहर निकल कर गया। हमारी कालोनी में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। पार्क के गेट पर पुराने साथ तारकेश्वर गिरी से मुलाकात हुई। गिरी भाई चिंतित हैं कि इस लॉकडाउन का असर रोजी रोजगार पर आने वाले दिनों में काफी गहरा पड़ने वाला है।
तीन दिन बाद मां से बात हुई। मां पिता जी सासाराम में हैं। पत्नी बेटे पटना में। जबकि हवाई रेल सेवा और बस सेवा बंद है, इन सब लोगों की दूरी बहुत ज्यादा लगती है। 

08 अप्रैल 15वां दिन - दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मामले बढ़े हैं। मैं आज दफ्तर के काम से अवकाश पर हूं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 15 जिलों के कई हॉटस्पाट को सील कर दिया गया है। इसमें गाजियाबाद के भी कुछ इलाके शामिल हैं। दिन में अफवाह उड़ी अगले कुछ दिन कुछ खाने पीने को नहीं मिलेगा। पर ऐसा नहीं है। दिन में मामाजी के बेटे वीरेंद्र से बात हुई। मेरे भरत मामा 21 मार्च को दिल्ली आकर यहीं फंस गए हैं। 

इन दिनों देर रात यूट्यूब पर शास्त्रीय संगीत के वीडियो देखने लगा हूं। इसमें बड़ा सुकून मिलता है। खास तौर पर तबला के वीडियो। बनारस घराने के सामता प्रसाद (गोदई महाराज) पंडित किशन महाराज, अहमदजान थिरकवा जैसे दिवंगत तबलावादकों के वीडियो देख डाले। कहरवा, तीन ताल और तबले से निकलती कई चमत्कारिक धुनें। उस्ताद जाकिर हुसैन के कई वीडियो, उनके साथ पंडित शिवकुमार शर्मा की संतूर पर जुगलबंदी। 


पर तबले की तलाश में मैं पाकिस्तान के तबला वादक उस्ताद तारी खान तक पहुंच गया। वे जाकिर हुसैन के हम उम्र है। दो दशक से कैलफोर्निया में रहते हैं। वे कमाल के तबला वादक हैं। तबले पर कई किस्म के चमत्कार करते हैं। जब वे कहरवा को कई शैली में बजाते हैं तो उन्हे सुनकर आनंद आ जाता है। कई लोग उनको जाकिर हुसैन के टक्कर का तो कई उनसे भी बेहतर तबलावादक मानते हैं। तारी खान गजल गायक गुलाम अली, शास्त्रीय साधक सलामत अली खां के साथ संगत कर चुके हैं। वे पाकिस्तान से पंजाब घराने से आते हैं। वे रबाबी मुस्लिम परिवार के हैं। कभी उनके पुरखे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में वाद्य यंत्र बजाते थे।  

09 अप्रैल 16 वां दिन:  गाजियाबाद , नोएडा के जो इलाके पूरी तरह सील हुए हैं वहां के लोगों परेशानी बढ़ी है। हमारे आसपास में ऑक्सी होम्स, शालीमार गार्डन का बी ब्लाक सील किया गया है। आज मैंने पुराने अलबम की तमाम तस्वीरें  देखीं। नास्ते में दही चूड़ा खाया। दोपहर में आलू बैंगन, सोयाबीन की सब्जी बनाई। 

10 अप्रैल 17वां दिन ः देश में कोरोना से एक दिन मे 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली में ज्यादा मामले बढ़े हैं। इसी बीच कुछ अच्छी खबरें भी आ रही हैं। कुछ राज्यों में संक्रमण कम भी हो रहा है। 

11 अप्रैल 18वां दिन - उम्मीद है कि देश व्यापी लॉकडाउन इस महीने के आखिर तक चला जाएगा। पंजाब, ओडिशा समेत कई राज्यों ने 30 अप्रैल तक बढ़ा ही दिया है। आज डॉक्टर सरिता फुआ से बात हुई। वे मेरे गांव के भुवनेश्वर दादा की बेटी हैं। शिक्षिका के तौर पर रिटायर होने के बाद डेहरी ओनसोन में रहती हैं। उनके भाई पुणे से सुरेश चाचा का भी फोन आया। गांव से जुड़े इन दोनों लोगों से पहली बार बात हुई। तीन दिन बाद फ्लैट से बाहर गया, कुछ सब्जियां और पतजंलि स्टोर से कुछ राशन लेकर वापस आ गया। 

12 अप्रैल , 19वां दिन - खाली समय में पुराने फोटो अलबम देखते हुए वक्त कट रहा है। बहुत सालों बाद चंदेश्वर भैया ( गरभे) से बात हुई। वे बौद्ध भिक्षु बन गए हैं। उनके दो बेटे फरीदाबाद में रहते हैं। देश में आज कोरोना से 31 लोगों की मौत हुई। दिल्ली और आसपास में शाम को 5.45 बजे भूकंप के झटके भी आए। 
13 अप्रैल , 20 वां दिन - वैसे तो आज वैशाखी है, पर इस त्योहार को लेकर कोई उत्साह नहीं है। दिल्ली में आज सुबह भी भूकंप के झटके आए। कल मेष संक्रांति होगी, तब कुछ प्राकृतिक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। आज देश भर में 53 लोगों की मौत हुई कोरोना से जो अब तक सबसे ज्यादा है। पीड़ित लोगों की संख्या 9000 पार कर गई है। बीएचयू के पुराने सीनियर अजय सिंह ( द्वाराका, दिल्ली) से बात हुई। 

14 अप्रैल , 21 वां दिन -   सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया। लॉकडाउन बढ़ाकर 3 मई तक कर दिया गया। इस दौरान और सख्ती की जाएगी। रेलगाड़ियां और हवाई जहाज परिवहन आदि भी तीन मई तक बंद रहेंगे। आज मुंबई के बांद्रा जंक्शन में हजारों श्रमिक अचानक स्टेशन पर पहुंच गए और खुद को घर पहुंचवाने की मांग करने लगे। कल की तुलना में देश में आज कोरोना से कम लोगों की मौत हुई। सरकारी आंकड़े में 29 मौत की बात कही गई। 

15 अप्रैल, बुधवार 22वां दिन -  आज मेरा साप्ताहिक अवकाश है। तो ज्यादा समय खाना बनाने में नहीं गुजारा, बल्कि अपनी अलमारी से उन किताबों की तलाश में जो मुझे पढनी है। अलमारी में 20 से ज्यादा ऐसी किताबें पड़ी हैं जिन्हे मैंने नहीं पढ़ा अभी तक। कल दीवान सराय शहरनामा -2 पढ़कर खत्म की। राहुल सांकृत्यायन की कुछ किताबें भी अलमारी में मिलीं। शाम को सब्जी लाने के लिए थोड़ी देर के लिए नीेचे उतरा। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( INDIA LOCKDOWN, CORONA PERIOD, COVID 19 ) 

Sunday, 12 April 2020

कोरोना के बाद दुनिया (( कविता ))

कैसी होगी कोरोना के बाद दुनिया
क्या फिर हरिद्वार की हर की पौड़ी
पर संध्या आरती में जुटेगी
हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
क्या वाराणसी के दसाश्वमेध घाट पर
फिर मां गंगा आरती में गूंजेंगे
घंटे और घड़ियाल

क्या फिर अजमेरशरीफ की दरगाह पर
गुलाबों की खुशबू के बीच
हजारों जायरीनों के जमावड़े में
मनाया जाएगा उर्स
क्या महाकुंभ में एक बार फिर
दिखाई देगा
लाखों मानवों के महासमुद्र सा नजारा

क्या पंढरपुर की वारी में
फिर अंतहीन पंक्ति में चलते हुए
लाखों श्रद्धालु  बिठोबा की नगरी की ओर
प्रस्थान करते हुए नजर आएंगे
शिरडी में साईं के दरबार में
गुरुवार की दोपहर को पहुंचेगे फिर
श्रद्धा सबूरी की आस लिए
लाखों आस्थावान

क्या तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए
विशाल हॉल में नजर आएगा
हजारों लोगों का रेला

कोरोना की इन दहशत भरे दिन के बाद
आखिर कितनी बदल जाएगी दुनिया
अदृश्य भय के बीच
बंद दरवाजों के पीछे दुबका है इंसान
सड़के सूनी
गलियां नहीं गुलजार अब
क्या एक बार फिर उसी तरह
लगेंगे जिंदगी मेले...

जैसे बेतकल्लुफ होकर बाबा अमरनाथ
केदारनाथ और माता वैष्णोदेवी की यात्राओं में
चलता था श्रद्धालुओं का रेला

क्या एक बार फिर रसूखदार राजनेता की
शहजादी की शादी में
दावत उड़ाने आएगा पूरा शहर।

क्या एक बार फिर
ढेर सारी उम्मीद पाल कर
बड़े राजनेता की रैली में
भाषण सुनने पहुंच जाएगी
गांव से चलकर पहुंच जाएगी लाखों जनता।

----विद्युत प्रकाश मौर्य - (13 अप्रैल 2020 )

Friday, 10 April 2020

लॉकडाउन डायरी - इमरजेंसी, कर्फ्यू और बेघर लोग (( 01 ))

साल 2020 के फरवरी के आखिरी सप्ताह में दिल्ली दंगों की आग में झुलसी। मुझे बनारस के दंगे याद हैं। तब में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ता था। हालांकि हम बीएचयू कैंपस में सुरक्षित थे। पर शहर जल रहा था। ठीक इसी तरह दिल्ली में मेरे पड़ोस में मेरे घर से चार किलोमीटर आगे का इलाका कई दिन तक झुलसता रहा है। इस असर मेरे बेटे की पढ़ाई पर पड़ा। उसके स्कूल में हो रही सालाना परीक्षाएं स्थगित हो गईं। बाद में ये परीक्षाएं शुरू हुईं। होली 10 मार्च को थी तो नौ मार्च को पहला पेपर। फिर 11 मार्च को दूसरा पेपर। ऐसे में होली कौन मनाए। अनादि की परीक्षा 19 मार्च को खत्म हो रही थी। इसलिए मैंने उनका और उनकी मां का 19 मार्च की शाम हमसफर एक्सप्रेस में पटना जाने का टिकट बना दिया था। स्कूल से संदेश था कि 7 अप्रैल को अगले सत्र में स्कूल खुलेगा।



19 मार्च की शाम को मैं उन्हें आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर हमसफर एक्सप्रेस में विदा कर आया। इस बीच देश में कोरोना को लेकर दहशत बढ़ती जा रही थी। हर रोज कुछ नए संक्रमित मिल रहे थे। बीमारी चीन से आगे बढ़ कर स्पेन, इटली और इरान में कहर ढा रही थी। रेलवे स्टेशन पर यात्रा करने वाले दहशत में थे। होली के बाद काफी लोग अपनी छुट्टियां रद्द करा रहे थे। रेलवे ने 40 फीसदी ट्रेनें यात्री कम होने के कारण रद्द कर दी थीं।

माधवी और वंश सुबह सुबह सकुशल पटना पहुंच गए। इस बीच 19 मार्च को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर प्रकट हुए। राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि 22 मार्च को देश भर में आप लोग जनता कर्फ्यू लगाएं जिससे कोरोना से निपटा जा सके।

मैं 20 और 21 मार्च को अवकाश पर घर में रहा। 22 मार्च को बंद के दिन दफ्तर जाकर काम किया। इन दिनों हिन्दुस्तान हिंदी दैनिक का दफ्तर नोएडा के सेक्टर 63 में है।

आखिरी दिन कड़ी चावल का स्वाद – 21 मार्च की दोपहर में मैं अपनी कालोनी के गेट पर कड़ी चावल वाले के पास गया। ये सोचकर की खाना बनाने से अच्छा है कड़ी चावल खा लें। उससे अपने लिए एक प्लेट पैक कराया। कड़ी चावल वाले ने बताया कि आज से छुट्टी कर रहा हूं। स्टाफ को भी पैसे देकर घर भेज रहा हूं। कल देश भर में जनता कर्फ्यू है। पता नहीं ये कब तक चले। उस दुकानदार को अंदेशा हो गया था कि ये बंदी ज्यादा दिन चलने वाली है। और सचमुच ऐसा ही हुआ। 

22 मार्च जनता कर्फ्यू -  देश भर में लोगों ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू को सफल बनाया। पर कुछ जगह लोग नहीं माने। घंटी शंख बजाते लोगों ने अहमदाबाद, पीलीभीत में रैली निकाल दी। पर कोरोना के अंदेशे से कई राज्यों ने अपने यहां लॉकडाउन का ऐलान शुरू कर दिया। 23 मार्च को पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक आंध्र, तेलंगाना जैसे राज्य सख्त कदम उठा चुके थे।
22 मार्च को देश भर में यात्री रेलगाडियों का संचालन बंद कर दिया गया था। बाद में रेलवे ने 25 मार्च तक रेलबंदी का ऐलान किया। 24 मार्च को रेलबंदी को बढ़ाकर 14 अप्रैल तक कर दिया गया। रेलवे के 160 साल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। तमाम राज्य बसों और टैक्सियों का संचालन रोक चुके हैं।

21 दिनों का लॉकडाउन - 24 मार्च को रात आठ बजे एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए। इस बार उन्होंने आधे घंटे के भाषण में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक देश भर में पूर्ण लॉकडाउन का ऐलान किया। यह कर्फ्यू और इमरजेंसी जैसा होगा।  हमने 1975 की इमरजेंसी नहीं देखी। पर यह इमरजेंसी से कुछ ज्यादा स्वास्थ्य इमरजेंसी। एक अदृश्य वायरस ने पूरी दुनिया को तबाह कर दिया है। मंदिर में रहने वाले भगवान से कोई उम्मीद नहीं। उनके दरवाजे भी बंद चुके हैं। देश के सारे प्रमुख मंदिरों के पट बंद किए जा चुके हैं।
चलों चलें ये शहर हुआ बेगाना...

24 मार्च की रात को दफ्तर से लौटते वक्त एनएच नौ पर देखा बड़ी संख्या में लोग सामान लिए हुए पैदल पैदल अपने घर जा रहे थे। वाहन बंद होने पर लोग कई सौ किलोमीटर दूर अपने घर पैदल चलकर जाने को मजबूर हैं। ये ऐसे लोग हैं जिनका दिल्ली में कोई स्थायी आशियाना नहीं है। काम बंद होने के बाद रोटी के लाले पड़ गए हैं। पीठ पर बैग लादे हाईवे पर चलते हुए कई लोग दिल्ली से बरेली पहुंच गए। कई इससे भी आगे। रास्ते में खाने की दुकाने बंद। पीने का पानी भी मयस्सर नहीं।

देश में 9.38 लाख शहरों में बेघर लोग रहते हैं। ये जानकारी सरकार ने संसद में दी है। पर बेघरों की वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी। आखिर इस बंदी में वे लोग कहां रहेंगे। कैसे बसर करेंगे। 24 मार्च को हमारे दफ्तर ने कोशिश की। लोग घर से काम करें। हमें कंप्यूटर सिस्टम दिए गए हैं, ताकि हम घर से ही काम कर सकें।
 - vidyutp@gmail.com
 ( LOCK DOWN DAYS, DELHI, GAZIABAD ) 

Sunday, 5 April 2020

भाजपा - 40 साल का सफर


भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। वास्तव में यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 1951 में स्थापित भारतीय जन संघ से निकली हुई नई पार्टी थी। 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हो गया था। 
पुराने जनसंघ से नई पार्टी
सन 1980 के शुरुआत में हिंदुवादी विचारों वाले पुराने जनसंघ के नेताओं अटल बिहारी, वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी भैरो सिंह शेखावत आदि ने जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। पार्टी ने गांधीवादी समाजवाद को स्वीकार किया और इसका चुनाव चिन्ह तय हुआ कमल का फूल। पार्टी के मुख पत्र का नाम कमल संदेश है।

वाजपेयी पहले अध्यक्ष
1980 में ही मुंबई में पार्टी का पहला अधिवेशन हुआ। इसमें अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष चुने गए। वे 1986 तक पार्टी के अध्यक्ष बने रहे।

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी
18 करोड़ प्राथमिक सदस्यों के साथ आज भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है।

बड़ी होती गई जीत
02 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की भाजपा ने सन 1984 के लोकसभा चुनाव में। यह पार्टी का पहला लोकसभा चुनाव था।

85 सांसद जीतकर पहुंचे भाजपा के 1989 के चुनाव में। इस बार भाजपा वीपी सिंह की अगुवाई में बने राष्ट्रीय मोर्चा को बाहर से समर्थन दे रही थी।

119 सीटों पर जीत हासिल कर पार्टी 1991 में प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में आ गई। इसी साल पार्टी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में अपनी सरकारें बनाई।

1996 लोकसभा चुनाव में भाजपा 163 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में देश में बीजेपी की सरकार बनी, हालांकि बहुमत नहीं होने की वजह से 13 दिनों में सकार गिर गई

1998 के चुनाव में बार फिर से 182 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। वाजपेयी दोबारा से देश के प्रधानमंत्री बने, हालांकि पूर्ण बहुमत नहीं होने की वजह से एक बार फिर सरकार गिर गई 

1999 के चुनाव में भाजपा ने आम चुनाव घटक दलों के सहयोग से जीता, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी और पांच साल तक सरकार चली।

2004 और 2004 के चुनाव में पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी।

282 सीटों पर जीत हासिल की पार्टी ने साल 2014 के चुनाव में और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनी।

305 सीटें जीतकर भाजपा ने 2019 में एक बार फिर दुनिया के दूसरे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में सरकार बनाई। नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले गैर कांग्रेसी नेता बने।


राम मंदिर आंदोलन और भाजपा
1989 में भाजपा ने देश भर में अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने को लेकर आंदोलन शुरू किया। लालकृष्ण आडवाणी की अगुवाई में 1990 में सोमनाथ से अयोध्या के लिए देशव्यापी रथयात्रा निकाली गई। इससे भाजपा का वोट  बैंक बढ़ा। 1993 से 1998 तक लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में पार्टी का व्यापक जनाधार बढ़ा।
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Monday, 30 March 2020

अंतहीन सड़क पर पैदल (कविता)

छह साल की मुनिया पकड़े हाथ
अंतहीन सड़क पर चला जा रहा
है बृजमोहन
न जाने की कितने दिन में
पहुंचेगा अपने गांव
उस शहर को वह पीछे
छोड़ आया है जहां
दिन भर पसीना बहाकर
जुटाता था अपने घर वालों के लिए
निवाला।

लोगों ने बताया था किसी
अदृश्य बीमारी से दुनिया डरी हुई है
तब बहुत याद आई 
अपने गांव की मिट्टी की
तो निकल पड़ा खुली सड़क पर

नन्ही मुनिया बोल रही
बापू मुझसे और चला नहीं जा रहा
न जाने कितनी दूर है 
अभी हमारा गांव

अपनी पोटली से थोड़ा
चबेना निकालकर मुनिया को देता है
चलते रहो बिटिया
एक दिन जरूर पहुंच जाएंगे
अपने गांव....

-         ------- विद्युत प्रकाश मौर्य


Sunday, 29 March 2020

रोक लो उन्हें... ( कविता)



उन्होंने ही तो
तुम्हारे घर की दीवार जोड़ी थी
जिस आलीशान अपार्टमेट में तुम
आज रहते हो
उसका रंग रोगन
उन्होंने ही तो किया था
तुम्हारे घर की बिजली जब जब
खराब है जाती है
तुम्हारे नालियां जब जब 
जाम हो जाती हैं
वे ही तो ठीक करने आते हैं।

इस महानगर में कदम कदम पर
तुम्हारी सहायता के लिए
वे खड़े मिल जाते थे।
आज उनके लिए ये शहर
बेगाना क्यों हो गया है।

अपनी छह साल की बिटिया
की उंगली पकड़े वे
एक हजार मील की पैदल यात्रा कर
अपने गांव को जाने के लिए
मजबूर क्यों हुए

आखिर उनका देश कहां है...
तुम जो रोटी खाते हो उसमें
उनका भी तो हिस्सा
रोक लो उन्हें
कि उनके बिना तुम्हारा
ये सिस्टम नहीं चल पाएगा।

एक दिन तुम्हें जब फिर
उनकी जरूरत पड़ेगी तो
वे तब बहुत दूर जा चुके होंगे।
हां रोक लो उन्हें

--- विद्युत प्रकाश मौर्य
( 29 मार्च 2020 )

Friday, 27 March 2020

तालाबंदी के बीच गांव की याद (कविता )


देश भर में तालाबंदी के बीच
दिल्ली के बहुमंजिले इमारत के छोटे से
फ्लैट में कैद होना...
ये किसी कारावास की तरह ही तो है...
आप खिड़की से झांक सकते हैं
पर बाहर कदम नहीं रख सकते।

इस अकेलेपन के बीच
बचपन का गांव खूब याद आया
नहर के किनारे का पीपल का पेड़
जेठ की दुपहरी में जिसकी छांव
भली लगती थी
कुएं के किनारे वो नीम का पेड़ भी
अब भी वहीं खड़ा है...

पर हम चाह कर भी
अभी वहां नहीं जा सकते।  

गांव में चाचा से बात हुई फोन पर
उन्होंने कहा, सब ठीक है बबुआ
यहां कोई परेशानी नहीं है
आंगन की धूप में बैठो या फिर खेत खलिहान में
घूम के आ जाओ
अपना हाल सुनाओ
कैसे हाल सुनाऊं
मेरे पास आज शब्दों की दरिद्रता है...
भाव शून्य हैं...
मैं ही बड़ा गरीब हूं
चाचा तुम ही अमीर हो...

-         --- विद्युत प्रकाश मौर्य

Tuesday, 10 March 2020

बाबा साहेब आंबेडर के जीवन पर नई दृष्टि ( पुस्तक )

वैसे तो भीमराव आंबेडकर के जीवन पर कई किताबें लिखी गई हैं। पर क्रिस्तोफ जाफ्रलो द्वारा लिखी गई पुस्तक भीमराव आंबेडकर – एक जीवन एक शोधपरक पुस्तक है। मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद योगेंद्र दत्त ने किया है।

ये पुस्तक कोरी जीवनी नहीं है। लेखक ने खास तौर पर बाबा साहेब के जाति उन्मूलन के संघर्ष पर प्रकाश डाला है। उनके इस पक्ष का अपने तरीके से विश्लेषण किया है। डॉक्टर आंबडेकर हिंदूओं में दलित जाति से आने वाले पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने पश्चिम के देशों में जाकर उच्च अध्ययन किया था। पीएचडी करने के बाद उनका व्यक्ति एक महान अर्थशास्त्री के तौर पर उभरा। पर पश्चिमी देशों में अध्ययन के बावजूद वे अपने जड़ों से जुड़े रहे। देश के दलित समाज के जीवन में बेहतरी लाने के लिए वे ता उम्र लड़ते रहे। लेखक प्रस्तावना में लिखते हैं कि पुस्तक पेश करने का आशय कोरी जीवनी लिखने का नहीं है। वे बाबा साहेब के समाजशास्त्रीय चिंतन को पुस्तक में प्रमुखता से रखते हैं। यह किताब बाबा साहेब के जीवन का कोई क्रमवार ब्योरा नहीं पेश करती है। पर यह एक पठनीय पुस्तक है।

पुस्तक आंबेडकर के व्यक्तित्व की व्यवहार कुशलता पर भी प्रकाश डालती है। उनके गांधी जी और अंग्रेजों से रिश्तों पर भी लेखक ने कलम चलाई है। अंतिम अध्याय उनके सामूहिक धर्मांतरण कर बौद्ध धर्म अपनाने पर प्रकाश डाला गया है।

तकरीबन 200 पृष्ठों की पुस्तक एक शोधपरक अध्ययन है। पुस्तक खासतौर पर आंबेडकर द्वारा समतामूलक समाज बनाने के प्रयासों पर फोकस करती है। लेखक मानते हैं कि भारत में आंबेडकर की लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से उपेक्षा की गई। पाठ्यक्रमों में उनके विचारों को ज्यादा तरजीह कभी नहीं दी गई। अगस्त 1999 में जाकर इतिहास के पुस्तकों में उनके बारे में दो पृष्ठ जोड़े गए। यह बदलाव भी देश में दलित आंदोलन के कारण हो सका।

पुस्तक – भीमराव आंबेडकर एक जीवन
लेखक – क्रिस्तोफ जाफ्रलो
अनुवाद – योगेंद्र दत्त
प्रकाशक -  राजकमल प्रकाशन
मूल्य – 650 रुपये ( हार्ड बाउंड )

-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
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