Thursday, 14 May 2020

लॉकडाउन डायरी - कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

सरकार भी समझ गई है कि बहुत दिनों तो लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता। इसका असर देश में उत्पादन पर पड़ रहा है। साथ ही बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ रही है। इसलिए अब लॉकडाउन में धीरे धीरे ढील देने पर विचार हो रहा है। तो क्या इसका मतलब कि हमें कोरोना वायरस के साथ ही जीना सीखना पड़ेगा।   
14 मई गुरुवार, 51वां दिन - सरकार सभी मेल एक्सप्रेस रेलगाड़ियां भी चलाने पर विचार कर रही है। बहुत संभावना है कि 18 मई से लॉकडाउन के चौथे चरण में कई तरह की रियायतों दी जाएं। तो आज कोरोना से 134 लोगों की मौत के साथ कुल आंकड़ा 2494 पहुंच गया। देश भर में 78 हजार से ज्यादा संक्रमित। इस बीच आज मौसम ने अंगड़ाई ली। दिल्ली में जमकर आंधी चली। 72 किलोमीटर की गति से उसके बाद बारिश हुई। शाम को मेरी बालकोनी में एक कबूतर फड़फड़ाता हुआ आया और गिर गया। थोड़ी देर में उसके प्राण पखेरू उड़ गया। मुझे यह देखकर बड़ा दुख हुआ। आंधी ने और भी सितम ढाया। शाम को पांच बजे इंटरनेट डाउन हो गया। केबल का भी और वाईफाई का भी। रात 10 बजे जाकर डाटा मिल सका। इस दौरान दफ्तर का काम ठप्प हो गया। मतलब हम डाटा के आगे मजबूर हैं। अब तो मानो डाटा ही जिंदगी की धड़कन है।

भले ही आंशिक तौर पर रेलगाड़ियां चलने लगी हों पर इस बीच बड़ी हृदय विदारक खबरें और तस्वीरें आ रही हैं। 
पहली तस्वीर- एक मां स्ट्राली बैग को खिंचते हुए गांव चली जा रही है। उसका नन्हा बच्चा साथ चल रहा है। जब बच्चा थक जाता है तो मां उसे बैग पर सुला लेती है। पर वह स्ट्राली बैग खींचना और अपनी यात्रा जारी रखती है। इस तस्वीर का वीडियो दिन भर सोशल मीडिया पर खूब वायरल होता रहा। पर इससे क्या... उस मां का संघर्ष कम तो नहीं हो गया न। और फिर ये किसी एक मां की कहानी नहीं है। 

दूसरी तस्वीर - एक बच्चा ठेला चला रहा है। बच्चे की उम्र महज 13 साल है। उसने ठेले पर अपने पिता को बिठा रखा है। पिता पुत्र चल पड़े हैं बनारस से दूर अपने उत्तर बिहार के घर की ओर। लोग इस बच्चे को आधुनिक श्रवण कुमार कह रहे हैं। पर यह तो उससे भी कुछ ज्यादा है। ये तो इस नन्हें नागरिक की मजबूरी है। 

सरकार भरोसा दे रही है। रुकने को कह रही है। पर मजदूरों के पलायन का सिलसिला जारी है। दिल्ली यूपी बार्डर पर अब भी दिन रात पलायन करने वालों की भीड़ लगी है। ये लोग कई दिनों से भूखे प्यासे हैं। कुछ संस्थाएं उन्हें जाकर कुछ खाने पीने की सामग्री देने की कोशिश कर रही हैं। पर यही है आजाद भारत की सच्ची तस्वीर जहां कामगारों की कोई पूछ नहीं है। 

तीसरी तस्वीर - एक व्यक्ति यूपी बार्डर पर बैठा अपने छोटे से फोन से बातें करता हुआ रो रहा है। बेगुसराय में उसका इकलौता बेटा मर गया है। पर वह घर चाह कर भी नहीं जा पा रहा है। तीन दिन तक वह यूपी गेट पर बैठा रहा। अंत में हमारे अखबार हिन्दुस्तान के संवाददादाताओं के प्रयास से उस व्यक्ति के गांव जाने का इंतजाम किया जा सका। 

15 मई शुक्रवार - 52वां दिन -  पिछले 19 मार्च से लगातार अपने फ्लैट में अकेला हूं औ खुद खाना बना रहा हूं तो इस दौरान कई बार अपम स्टैंड में लिट्टी भी बनाता हूं। आजकल हर दूसरे दिन कच्चा आम, पुदीना और धनिया की चटनी भी बनाता हूं। और हां रोटियों के साथ भी नए नए प्रयोग जारी है। गेहूं का आटा 50 फीसदी उसके साथ मकई, ज्वार, चने का आटा उसमें काला नमक, आजवाईन और कसूरी मेथी डालकर आटा गूंथ कर रोटियां बना रहा हूं। कई बार बिना चकला और बेलन के थपकी देकर रोटी पकाने का अभ्यास भी कर रहा हूं।


कोरोना से आज 100 लोगों की मौत हो गई। कुल आंकड़ा है 2649 पर वर्ल्ड मीटर में कुल संक्रमित लोगों की संख्या के मामले में हम अब चीन से आगे निकल चुके हैं। भारत 11वां सबसे बड़ासंक्रमित देश बन चुका है। चीन 12वें नंबर पर है। 
16 मई, शनिवार 53वां दिन- सरकार मजदूरों किसानों के लिए रियायतें गिना रही है। पर मजदूरों दर्द कम नहीं हो रहा है। वे देश के अलग अलग राज्यों में पलायन को मजबूर हैं। उधर 18 मई से कई तरह की रियायतों की तैयारी चल रही है।  
देश में आज कोरोना से 102 लोगों की जान गई। कुल मौत 2652 हो गई है। वहीं हमलोग कुल संक्रमण के आंकड़ो में 86 हजार को पार कर चुके हैं। यह कोरोना संक्रमण के पहले देश चीन के आंकड़ों से भी ज्यादा हो चुका है। आज यूपी के औरैया में सड़क हादसे में 26 मजदूरों की तो मध्य प्रदेश में एक और सड़क हादसे में आठ मजदूरों की मौत हो गई। 
17 मई, रविवार - 54वां दिन - सरकार भले ही श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियां चलाने की  बात कर रही हो पर पैदल चलकर अपने देस जाने वाले श्रमिकों का सिलसिला जारी है। आज देश में 120 लोगों की मौत हो गई। कुल संक्रमितों की संख्या 91 हजार पहुंच गई है। आज एक दिन में संक्रमितों की संख्या पांच हजार के करीब बढ़ी। बिहार में भी बड़ी संख्या में नए केस आए हैं। रोहतास जिले में अचानक दर्जन से ज्यादा लोग संक्रमित मिले हैं। 
इस बीच सरकार ने लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाने का फैसला कर लिया है। हां इसमें कहां कैसी ढील देनी है ये राज्य सरकारें तय करेंगी। पर कुछ राज्यों ने पहले से ही 31 मई तक बंद रखने का फैसला लिया है। 
  - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( LOCKDOWN DAYS, CORONA, COVID 19 ) 

Sunday, 10 May 2020

तुमसे दूर रहके हमने जाना प्यार क्या है.. (व्यंग्य )

निकलो न बेनकाब जमाना खराब है... जिस गीतकार ने ये पंक्तियां लिखी होंगी वह बड़ा दूरदर्शी रहा होगा। उसे पता था कि एक दिन कोरोना का कहर दुनिया में छाने वाला है। तब जमाने के सितम से बचने के लिए हर कोई नकाब पहनकर ही घर से निकलेगा।
पर बॉलीवुड के तमाम गीतकार तो सच्चाई से दूर रहे। वे लिखते रहे – जाने दो न, पास आओ न आओ ना... सन 1985 में फिल्म सागर में ये गीत सुनने को मिला था। अब तो ये गीत आप हरगिज मत सुनिएगा। तब उनको नहीं पता था कि पास आने के कितने खतरे हैं। अब तो लोग कह रहे हैं कि कोई कितने भी प्रलोभन देकर बुलाए मगर जाना मत। घर में ही रहना।

थोड़ा पीछे चलते हैं साल 1965 में तो रुश्तमे हिंद फिल्म में एक गीतकार ने लिख मारा – बैठो मेरे पहलू में खुदा के वास्ते। नहीं जनाब  ऐसा न कहो आजकल तो खुदा के वास्ते दूर दूर ही रहो तो अच्छा।
इसके बाद 1976 में आई फिल्म नौनिहाल के लिए कैफी आजमी साहब ने गीत लिखा – तुम्हारे जुल्फों के साए में शाम कर लूंगा. सफर एक उम्र का पल में तमाम कर लूंगा। तब कैफी साहब को गुमां न रहा होगा कि प्रेयसी के जुल्फों के साये में शाम करना कितना महंगा सौदा साबित हो सकता है।

भला पास आने की क्या जरूरत है प्यार का एहसास तो दूर रहकर भी किया जा सकता है। सन 1976 में फिल्म अदालत के गीत के बोल पर गौर फरमाइए तुमसे दूर रहके  हमने जाना की प्यार क्या है...दिल ने माना यार क्या है... तो इन पंक्तियों को लिखने वाले गुलशन बावरा भी बड़े समझदार थे।

कुछ और गीतकारों ने भी समझदारी भरे बोल लिखे – वो पास रहें या दूर नजरों में समाये रहते हैं, इतना तो बता दे कोई, क्या इसी को प्यार कहते हैं। वो गीतकार कमर जलालाबादी थे जो इतनी समझदारी भरी बातें करते थे। उन्होंने 1949 में ही इतनी समझदारी भरी बात कह दी थी।

थोडा आगे बढ़िए तो सन 1985 में फिल्म यादों की कसम में गीत आया। बैठ मेरे पास तुझे देखती रहूं... अब भला देखने के लिए पास जाकर बैठने की क्या जरूरत है। छह फीट की दूरी से भी तो देखा जा सकता है। पर गीतकार ने अगली पंक्ति बड़ी समझदारी पूर्ण लिखी- ना तू कुछ कहे ना मैं कुछ कहूं।

सबसे समझदारी वाला गीत तो था – एक डाल पर तोता बोले, एक डाल पर मैना. दूर दूर तक बैठे हैं दोनों पर प्यार तो बोलो है ना... मतलब दूर दूर रहकर भी प्यार हो सकता है...सन 1974 में आए इस गीत के शब्दकार थे इंद्रजीत सिंह। अब कोरोना काल में में मुहब्बत करने का दस्तूर यही है कि आप अलग अलग डाल पर बैठे रहिए। मतलब फिजिकल डिस्टेंसिंग बनाए रखिए। पर सोशल डिस्टेंसिंग नहीं। ये बड़ा गलत शब्द है। शरीर से शरीर की दूरी बनी रहनी चाहिए। पर दिल से दिल की दूरी तो हरगिज नहीं।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( (CORONA AND SONGS ) 







Friday, 8 May 2020

लॉकडाउन डायरी - गुलमोहर के संग जिंदगी

पटना में खिले गुलमोहर ।  फोटो - अनादि अनत
बेटे अनादि ने पटना से गुलमोहर के फूलों की तस्वीर भेजी है। हमारे मुहल्ले में गुलमोहर खिल उठे हैं। वे उम्मीद जगा रहे हैं। आने वाले दिन बेहतर होंगे।  लॉकडाउन में रहते हुए मार्च, अप्रैल के बाद अब मई का महीना शुरू हो गया है। तमाम लोग दावे कर रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण देश में कम मामले बढ़े हैं। पर अर्थशास्त्री रघुराम राजन का कहना है कि इस तरह की बंदी ज्यादा देर तक नहीं चलाई जा सकती। इसका बुरा असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ेगा साथ ही निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग की हालत बहुत खराब हो जाएगी। 

01 मई शुक्रवार 38वां  दिन - आज मजदूर दिवस है। पर मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। इधर उधर फंसे हुए लाखों मजदूर अपने घर जाने की राह देख रहे हैं। हमारे रोहतास जिले में 51 मरीज हो गए हैं। सासाराम में 6 नए केस मिले हैं शुक्रवार को। जिले में मुरादाबाद, नोखा, बभनौल, उसरी, परमेश्वरपुर, हरकमल गांव में कोरोना के नए मरीज मिले हैं। कपसिया सोहवलिया से राममूर्ति फूंफा का फोन आया, उनके गांव के बगल मे हटना से भी केस मिल गया है। 
मजदूरों को अपने गृह राज्य में भेजने के लिए सरकार स्पेशल ट्रेन चलाने लगी है। 
लॉकडाउन में दो हफ्ते का और विस्तार देकर इसे 17 मई तक बढ़ा दिया गया। देश के रेड, आरेंज, ग्रीन तीन हिस्सों में बांटा गया है। ग्रीन और आरेंज जोन में 4 मई से कुछ सेवाएं शुरू की जाएंगी। गाजियाबाद अभी आरेंज जोन में है। यहां पर लोग अपने जिले में निजी वाहन या कैब से सफर कर सकेंगे। 
02 मई शनिवार - 39वां दिन - सरकार ने रेड जोन में भी कुछ रियायतों का ऐलान किया है। वैसे दुनिया के आधे देश 4 मई से कई तरह की कारोबार शुरू करने जा रहे हैं। कई देश अब कोरोना के संग जीने की बात कर रहे हैं। दिल्ली में कोरोना से तीन लोगों की मौत हुई तो महाराष्ट्र में 36 देश भर में 71 लोग काल के गाल में समा गए। दिल्ली में लोकपाल सदस्य जस्टिस एके त्रिपाठी का कोरोना से निधन हो गया। एक दिन में देश आज ढाई हजार मामले आए। दिल्ली में सीआरपीएफ के एक कैंप के 135 जवान संक्रमित हैं तो कापसहेड़ा बार्डर में एक ही बड़े घर में रहने वाले सारे लोग। 
दरअसल सेंपल लेने के बाद जांच की रिपोर्ट आने में कई कई दिन लग जा रहे हैं। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंसन में केवी सृष्टि में एक केस आने के बाद सोसाइटी सील कर दी गई है। रोहतास जिले में रोज कुछ नए मामले बढ़ रहे हैं। 

03 मई रविवार 40वां दिन - ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में आज से कुछ छूट की शुरुआत हो रही है। पर गाजिबाद जिले में अभी कोई छूट नहीं होगी। देश में कोरोना से आज 83 लोगों की मौत हुई। मरने वालों का आंकड़ा 1306 हो गया। दिल्ली में आज सुबह और शाम मे ंफिर बारिश हुई। इससे मौसम ठंडा रहा। हमारे घर के आसपास दिलशाद गार्डन और शालीमार गार्डन में कोराना के मामले ठीक हो गए हैं। जो ब्लॉक सील हुए थे उन्हें खोल दिया गया है।  मैं आज दो दिन बाद नीचे उतरा सब्जियां लेने के लिए। बेटा वंश से बात हुई वह मजे में है। 
04 मई सोमवार, 41वां दिन - दिल्ली रेड जोन में है पर आज से कई तरह की रियायतें शुरू हो रही हैं। दिल्ली में शराब की दुकानें खुलते ही लोगों की लंबी लाईनें लग गई। कई और शहरों में ऐसा ही हुई। इससे सोशल डिस्टेंसिंग धज्जियां उड़ी। उधर आज 83 लोगो ंकी मौत हो गई कोरोना से। यह अब तक सबसे ज्यादा है। पिछले तीन दिन में देश में नए मामलों की संख्या भी बढ़ गई है। इधर कोरोना का कहर उधर सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं। कल पांच और आज तीन जवान शहीद हो गए। 

05 मई मंगलवार, 42 वां दिन - कई जगह फैक्टिरयों में उत्पादन शुरू हो रहा है। पर सार्वजनिक परिवहन नहीं शुरू होने के कारण लोगों को दिक्कत हो रही है। देश में कोरोना से 194 लोगों की मृत्यु हो गई। एक दिन यह सर्वाधिक है। आज सबसे ज्यादा केस भी सामने आए। तीन हजार से ज्यादा। इस बीच कई और राज्यों में शराब की दुकानें खोले जाने की तैयारी है। हमारी कालोनी में दवा राशन के अलावा हार्डवेयर, बरतन, स्टेशनरी की दुकानें भी खुलने लगी हैं। दुकानों का समय शाम सात बजे तक कर दिया गया है। 

06 मई बुधवार, 43वां दिन - पानीपत में तीन पत्रकार भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वे दो हिंदी समाचार पत्रों से हैं। वहीं नोएडा फिल्म सिटी में नेटवर्क 18 चैनल के एक न्यूजरूम के पत्रकार का भी कोरोना पॉजीटिव हो गया है। देश में आज भी 101 लोगों की मौत हो गई। सासाराम में परमेश्वर प्रताप से बात हुई। राहत है कि जिले में दो दिन से केस नहीं बढ़ रहे। पहले से पीड़ित में से भी कई लोग ठीक हो गए हैं। 
परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में सार्वजनिक आवागमन के साधन जल्द खोले जाएंगे। हां उनमें भी सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुए सफर हो सकेगा। 
07 मई, गुरुवार 44 वां दिन -  दिल्ली के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 10 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश की घोषणा कर दी गई है। आज कई दिनों बाद मैं साप्ताहिक अवकाश पर रहा। मुंबई में वरिष्ठ पत्रकार आनंद भारती जी से बात हुई। बातों बातों में उनसे पता चला कि आलोक रंजन नहीं रहे। आलोक रंजन हाजीपुर में लंबे समय तक रहे भोजपुरी फिल्मों के गीतकार डॉक्टर उमाकांत वर्मा के बेटे थे। आलोक भैया मुंबई में हिंदी फिल्मों के वरिष्ठ पत्रकार थे। हालांकि उनका निधन दो साल पहले हुआ पर कोई संपर्क नहीं होने के कारण मुझे ये खबर इतनी देर से मिली। 
कई दिनों बाद आज मां से बात हुई। रोहतास जिले में दो नए केस आए हैं। वहां अब 54 संक्रमित हैं। हालांकि इसमें से काफी लोग ठीक भी हो रहे हैं। लॉकडाउन के 40 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी मजदूरों का पैदल पैदल चलकर अपने गांव से जाने का सिलसिला जारी है। स्वराज एक्सप्रेस चैनल पर गुरमीत सप्पल की रिपोर्ट में देख रहा हूं कि पुलिस हाईवे पर चलने वालों की पिटाई कर रही है तो मजदूर सड़क के किनारे खेतों से रास्ता तय कर रहे हैं। 



कई राज्यों को लगने लगा है कि ये बाहरी राज्यों के मजदूर हमारे लिए बहुत पड़ा श्रम साधन है इसलिए वे उन्हें घर जाने से रोक रहे हैं। कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार मजदूरों को अपने राज्य जाने से मना कर रही है।
08 मई, शुक्रवार - 45 वां दिन -  रोहतास जिले में एक 70 साल के बुजुर्ग की कोरोना से मौत हुई है। वहीं आगरा में पंकज कुलश्रेष्ठ नामक दैनिक जागरण के युवा पत्रकार ने भी इस बीमारी से दम तोड़ दिया।   
महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश के शहडोल जा रहे 16 मजदूरों की जलगांव में ट्रेन से कटकर मौत हो गई। वे लोग पैदल घर जा रहे थे। रात में थककर ट्रेन की पटरी पर ही सो गए थे। देश में आज कोरोना से 103 लोगों की मौत हुई। बिहार के 38 में से 35 जिलों में संक्रमण पहुंच गया है। पटना में आज 45 दिन बाद समान्य दुकाने खुली तो भीड़ उमड़ पड़ी। देश के कई हिस्सों में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। 
अहमदाबाद शहर की हालत काफी खराब हो गई है। वहां दवा और दूध को छोड़कर सारी दुकानें बंद कर दी गई हैं। लोग घर में ही रहें इसके लिए अर्ध सैनिक बलों की तैनाती शहर में की गई है। मुंबई में रह रहे घुमक्कड़ी दिल से समूह से जुड़े साथी प्रतीक गांधी से फोन पर लंबी बात हुई। 

09 मई शनिवार, 46वां दिन - केनरा बैंक के वाशिंगटन डीसी शाखा में कार्यरत बचपन के दोस्त अभय से बात हुई। वे न्यूयार्क में क्वींस इलाके फ्ससिंग में रहते हैं। वे बताते हैं कि किस तरह दुनिया के सबसे संपन्न और विकसित समझे जाने वाले राज्य में भी कोरोना का खौफ बरकरार है। 
देश में आज कोरोना से 95 लोगों की जान गई। मौत का कुल आंकड़ा दो हजार के करीब पहुंच गया है। इस बीच दुनिया के अलग अलग देशों में फंसे लाखों भारतीय लोगों को स्वदेश लाने का सिलसिला शुरू हो गया है। पर ऐसे आने वाले लोगों को 14 दिन तक क्वारंटाइन किया जा रहा है। 
10 मई रविवार, 47वां दिन - इस कोरोना काल में कई पुराने दोस्तों से बात करके अच्छा लगता है। हर रोज दिन में किसी पुराने दोस्त की आवाज उर्जा देती है। कई पुराने रिश्तेदार भी ढूंढते हुए फोन कर देते हैं तो बड़ी खुशी होती है। आज 128 लोगों ने देश में जान गंवाई। हैदराबाद से यूपी आ रहे पांच मजदूरों की मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में दर्दनाक मौत हो गई। दो दिन पहले जलगांव में 16 मजदूरों की मौत के बाद फिर ये हादसा। इस बीच केंद्र सरकार 12 मई से 15 जोड़ी ट्रेनें रोज चलाने का फैसला लिया है। ये दिल्ली से प्रमुख 15 शहरों के लिए चलाई जाएंगी। 
11 मई सोमवार, 48वां दिन -  जिस मात्रा में रेलगाडियां और बसें चलाई जा रही हैं उससे कई गुना संख्या में लोग अपने घर जाना चाहते हैं। वहीं यात्रा करने वालों से संक्रमण फैलने का खतरा भी है। आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शाम चार बजे की जगह छह बजे के बाद टिकट बुकिंग शुरू हुई। पटना के लिए दो रेलगाडियां हैं। कुछ घंटे में अगले पांच दिन की टिकटें फुल हो गईं। मैंने अभी माधवी और वंश को बुलाने पर कोई निर्णय नहीं लिया है। 
उधर देश में आज कोरोना से 97 लोगों की जान गई। प्रधानमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ हालात की समीक्षा के लिए बैठक की। अब धीरे धीरे कारोबार खोलने पर विचार हो रहा है।
12 मई मंगलवार, 49वां दिन - आज से आंशिक यातायात शुरू हो रहा है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तीन गाड़ियां रवाना हुईं। सभी एसी हैं। डायनामिक फेयर लागू है।पर इन ट्रेनो में बैठने के लिए लोग 30-40 किलोमीटर से पैदल चलकर स्टेशन पहुंच रहे हैं, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन नहीं चालू हुआ है। इन ट्रेनों में छह दिन बाद तक का ही टिकट बुक हुआ है। कोरोना ने आज 87 जान ली। दिल्ली में एक दिन में 13 लोगों की मौत हो गई है। 
रात आठ बजे मोदी जी लाॉकडाउन 4 की स्क्रिप्ट लेकर हाजिर हुए। कहा 18 तारीख से नए रंग रूप में होगा लॉकडाउन। उन्होंने उद्योग धंधों के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज देने की बात भी कही। 
हमारे संघर्ष के दिनों के साथी पंकज कुमार पप्पू का हाजीपुर से फोन आया। उन्होंने फेसबुक पर एक पुरानी तस्वीर साझा की है। संभवतः 1992 की है जब आरएन कॉलेज में हमने एक दिवसीय शिविर आयोजित कराया था राष्ट्रीय युवा योजना की ओर से। 
बाएं से - विद्युत प्रकाश, रामचंद्र सिंह, प्रो. नवल किशोर प्र श्रीवास्तव, पंकज पप्पू और साथी। 

13 मई, बुधवार 50वां दिन - ट्रेन चलनी शुरू हो गई है। पर अभी मैंने माधवी और वंश को बुलाने पर कोई निर्णय नहीं कर पा रहा हूं। क्योंकि इस माहौल में यात्रा करना सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। हर ट्रेन में पूरी सीट पर लोग यात्रा कर रहे हैं ऐसे भला फिजिकल डिस्टेंसिंग कैसे लागू हो सकती है। आज कोरोना ने देश में 128 लोगों को लील लिया। 
अवकाश होने के कारण देर तक सोता रहा। पर अलसाई दोपहरिया में नींद खुली बीएचयू के एमए के एक साथी के फोन पर। फिर तो हम 25 साल पीछे पहुंच गए और ढेर सारी बातें कॉलेज के जमाने की। और शाम को फिर एक और दोस्त से लंबी गप। भविष्य कैसा होगा नहीं पता पर सुनहरी यादों के अतीत को कुरेदने में क्या दिक्कत है। हिंदी के जाने माने आलोचक नंद किशोर नवल का पटना में निधन हो गया। कोरोना काल में अंतिम यात्रा में भी बहुत कम लोग शरीक हो पा रहे हैं। 

सरकार भी समझ गई है कि बहुत दिनों तो लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता। इसका असर देश में उत्पादन पर पड़ रहा है। साथ ही बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ रही है। इसलिए अब लॉकडाउन में धीरे धीरे ढील देने पर विचार हो रहा है। तो क्या इसका मतलब कि हमें कोरोना वायरस के साथ ही जीना सीखना पड़ेगा।   

14 मई गुरुवार, 51वां दिन - सरकार सभी मेल एक्सप्रेस रेलगाड़ियां भी चलाने पर विचार कर रही है। बहुत संभावना है कि 18 मई से लॉकडाउन के चौथे चरण में कई तरह की रियायतों दी जाएं। 

   

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( LOCKDOWN DAYS, CORONA, COVID 19 ) 

Wednesday, 6 May 2020

नहीं रहे चंबल के बागी मोहर सिंह

कभी चंबल घाटी में उनके नाम का आतंक था। मध्य प्रदेश की चंबल घाटी डाकुओं की वजह से ज्यादा पहचानी जाती थी। यहां एक से बढ़कर एक दुर्दांत डाकू हुए हैं। उनमें से एक थे मोहर सिंह। माधो सिंह और मोहर सिंह की जोड़ी थी। लोग उनके नाम से ही दहशत में रहते थे। मह्त्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा, मुरैना साथी प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने खबर दी है कि मोहर सिंह का मंगलवार 5 मई 2020 को निधन हो गया।

मोहर सिंह ने मंगलवार सुबह अपने निवास पर आखिरी सांस ली। वह कई सालों से मधुमेह की बीमारी से पीड़ित थे उनके निधन के वक्त उनकी उम्र करीब 92 साल थी। बताया हैं कि बागी जीवन में उन्होंने करीब 80 से ज्यादा हत्याएं की थीं। उन पर पुलिस रिकॉर्ड में 300 से ज्यादा मामले दर्ज थे। सरकारी दस्तावेजों में उन पर तब दो लाख रुपये का इनाम था। वहीं, उनके गैंग पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

मोहर सिंह जमीनी विवाद के बाद 1958 में चंबल घाटी में बागी बनकर कूद गए थे। जी हां वे लोग डाकू नहीं खुद को बागी कहलाना पसंद करते थे। जब वे बीहड़ में कूदे तो कम उम्र के थे, लिहाजा किसी गुट ने उन्हें गैंग में शामिल नहीं किया। साल 1972 में 14 अप्रैल को जौरा आश्रम में उन्होंने बिनोवा जी और जय प्रकाश नारायण की पहल और गांधीवादी एसएन सुब्बाराव जी के प्रयास से आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी के सामने बड़े समारोह में सरेंडर किया।

आत्मसमर्पण के बाद मोहर सिंह पूरी तरह से सामाजिक कार्यों में लगे रहते थे। मोहर सिंह गांधीजी के विचारों से प्रभावित थे। गरीब लड़कियों की शादी कराने में वे सबसे आगे रहे। उनका आखिरी समय भिंड जिले में गुजरा। 


1982 बनी फिल्म चंबल के डाकू में अभिनय -  महात्मा गांधी सेवा आश्रम के अपने कई दौरे में मुझे मोहर सिंह को करीब से देखने का मौका मिला था। बॉलीवुड की सुपर हिट फिल्म चंबल के डाकू माधो सिंह मोहर सिंह के जीवन पर बनी थी। दरअसल 1982 में बनी इस फिल्म में माधों सिंह और मोहर सिंह ने खुद अभिनय भी किया था। चंबल के डाकू समस्या पर यह कोई पहली फिल्म थी जिसमें रीयल लाइफ के बागियों ने अभिनय किया था।

शांति के सिपाही चले ---- सुब्बाराव जी अपने एक लेख में घाना बर्ड सेंक्चुरी  के गेस्ट हाउस में मोहर सिंह से मुलाकात को याद करते हैं। मोहर सिंह सरेंडर के बाद लंबे समय तक खुली जेल में रखे गए थे। बाद में राजस्थान सरकार ने बाकी बागियों के सरेंडर के लिए भी उनकी सेवाएं ली थी। इसी क्रम में वे राजस्थान भी गए थे। सुब्बाराव जी मोहर सिंह और माधो सिंह को 1970-71 के कालखंड में मोहर सिंह को सरेंडर करवाने के लिए अपने प्रयासों को याद करते हैं। मोहर सिंह उनके द्वारा गाए गए भजन – शांति के सिपाही चले...सुनकर भावुक हो गए थे। बाद में उनके समझाने पर वे जय प्रकाश नारायण से मिलने को तैयार हुए और सरेंडर के लिए हामी भरी थी। मोहर सिंह के लिए जौरा का गांधी आश्रम प्रिय स्थल था। वे अक्सर वहां आते रहते थे। 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( (CHAMBAL KE DAKU, MOHAR SINGH, SN SUBBARAO, JOURA, MORENA ) 

Saturday, 2 May 2020

नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के – बालेश्वर की याद


लॉकडाउन में यूट्यूब पर लोकसंगीत ढूंढते हुए बालेश्वर को सुनने पहुंच गया। भोजपुरी के जाने माने लोकगायक हुआ करते थे बालेश्वर यादव। कई दशक तक उनकी बिरहा शैली में गायकी के लोग दीवाने रहे। सत्तर अस्सी के दशक में बालेश्वर के एलपी रिकार्ड खूब बिकते थे। बालेश्वर खुद गीत लिखते खुद धुन बनाते और गाते। उनका बड़ा प्यारा गीत है - नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के . दरअसल इस गीत में अलग अलग शहरों की बानगी पेश की बालेश्वर ने।
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के
हावड़ा के काजर बरेली के सुरमा
सलवरवा अलीगढ़ के
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के
बलिया के सतुआ
देवरिया के मरीचा
मोटकी मुरइया जौनपुर के
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के

हापुड़ के पापड़ हरियाणा के छोला
नाचेला लौंडा भागलपुर के
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के

सीतापुर के कदुआ रे, फैजाबादी बंडा
गोंडा के घुइयां सरासर सरके
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के

दुनिया में नामी लखनऊवा क रेवड़ी
अरे सुंदर मरदवा गाजीपुर के
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के

झांसी के झूला बनारस के साड़ी
गावेला बलेसर आजमगढ के
नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के


उनका गोरखपुर से खास लगाव था... वे अपने गीतों में गोरखपुर को सबसे ऊपर रखते थे

आरा हिलवलु बलिया हिलवलु त का हिलवलु ,
तनी गोरखपुर हिलाव तक जानी ना...

उनके गीतों में लोगों मनोरंजन होता तो वे सामाजिक कुरीतियों पर भी चोट करते थे। उनका बीए पास घोड़ा गीत खूब चर्चित हुआ था जिसमें उन्होंने दहेज प्रथा पर जोरदार हमला किया था। शब्दों से भी और गायकी के अंदाज से भी।

आज के समाज मे दहेज बना रोडा
बिकाई के ए बाबू बीए पास घोडा
बीबी सोलह साल की तो मरदा पचासा
पइसे के आड़ में बिगड़ गइले जोडा
बिकाइ के ए बाबू बीए पास घोडा

बीबी बीए पास मरदा मिला घसकरा
सीलोन बोले बीबी मरदा जाने सील लोढा
बिकाइ के ए बाबू बीए पास घोडा

बिटिया के खेत बिका बेटहा के बारी
अरे दानो दहेज ने उजाड़ घर छोड़ा
बिकाइ के ए बाबू बीए पास घोडा
राधा जी के प्यार देख... सीताजी की शादी
अरे शिव के धनुषिया बलेसर जो तोड़ा
बिकाइ के ए बाबू बीए पास घोडा

बालेश्वर उत्तर प्रदेश में मउ नाथ भंजन के पास मधुबन के रहने वाले थे। उनके जमाने में उनका गांव आजमगढ़ जिले का हिस्सा था तो अपने को आजमगढ़ वाला कहते थे। अपने आखिरी समय तक वे गायकी में सक्रिय रहे। उनका जन्म एक जनवरी 1942 को हुआ था। नौ जनवरी 2011 को उन्होंने आखिरी सांस ली। साल 2008 से 2010 के बीच महुआ चैनल पर प्रसारित हुए शो बिरहा दंगल में बालेश्वर यादव आए थे। बालेश्वर के गाने की एक खास शैली थी। आ रै रै रै रै रै....की जब वे हेक लगाते तो लोग मुग्ध होकर सुनते।
-         ----विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( BIRHA, BALESWAR YADAV, BHOJPURI ) 

Thursday, 30 April 2020

‘बॉबी’ का ‘राज’ चला गया...

तीन साल की फिल्म और टीवी रिपोर्टिंग के दौरान हालांकि ऋषि कपूर से कभी मिलने का मौका नहीं मिला, पर ऋषि कपूर की फिल्मों से एक भावनात्मक रिश्ता बनता था। जब मैंने फिल्म मेरा नाम जोकर देखी तब फिल्म में जैसा किशोर किरदार ऋषि के हिस्से में था उसी वय से तब मैं गुजर रहा था। हालांकि वह फिल्म राजकपूर की थी पर ऋषि ने उसमें राजकपूर के बचपन की भूमिका निभाई थी।

बाद में उन्हें परिवार की मतलब आरके बैनर की दूसरी फिल्म बॉबी में मौका मिला। बॉबी में वे राजदूत मोटरसाइकिल की छोटी बाइक मिनी राजदूत मतलब राजदूत जीटीएस चलाते नजर आते हैं। संयोग से मैंने भी बचपन में इसी बाइक पर सबसे पहले हाथ साफ किया था। बॉबी सुपर डुपर हिट रही। इसकी अभिनेत्री डिंपल कपाडिया ने बाद में राजेश खन्ना से विवाह किया। पर ऋषि कपूर की आगे जोड़ी बनी नीतू सिंह के साथ। बाद में नीतू सिंह उनकी जीवन संगिनी भी बनीं।

ऋषि कपूर की फिल्म कभी कभी और आरके फिल्म्स की प्रेम रोगी में यादगार भूमिकाएं थीं। अमिताभ बच्चन के साथ वे कुली में नजर आए। कुली का गीत लंबू लंबू जी हां बोलो टींगू जी में उन दोनो की केमिस्ट्री खूब नजर आई। तब उनके निधन पर अमिताभ बच्चन भावुक हो उठे। नब्बे के दशक में फिल्म चांदनी में उनका अभिनय यादगार था।
हालांकि ऋषि कपूर उन अभिनेताओं की फेहरिस्त में थे जिन्हे स्टार संस का साथ मिला। अभिनय उन्हें चांदी की कटोरी में रखकर मिली थी। पर एक समय में वे युवा वर्ग के बीच लोकप्रिय चेहरा बन गए थे। हालांकि एक अभिनेता के तौर पर वे अपने पिता राजकपूर या चाचा शशि कपूर के सामने कहीं नहीं ठहरते। पर इस दुनिया से कूच करने के लिए 67 साल कोई उम्र होती है क्या... नहीं ना। ऋषि कपूर को भावभीनी श्रद्धांजलि।
( ऋषि कपूर - 4 सितंबर 1952 -- 30 अप्रैल 2020 ) 
-         --- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmai.com  
   ( RISHI KAPOOR, 30 APR 2020 ) 



Sunday, 26 April 2020

लॉकडाउन डायरी - शुरू हो गया दूसरा महीना... ((04 ))


एक महीने पूरे हो गए देश में बंदी के। देश ही क्या दुनिया के तमाम शहरों में बंदी है। कई जिलों में मामले बढ़ रहे हैं तो कुछ जिले कोरोना मुक्त भी हो रहे हैं।अब लॉकडाउन का दूसरा महीना शुरू हो गया है।  इस बीच सरकार कुछ कड़े आर्थिक फैसले ले रही है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को जून 2021 तक बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा। 

25 अप्रैल, शनिवार - 32वां दिन - आज से रमजान का महीना शुरू हो गया है। गाजियाबाद मेें सख्ती बढ़ाई जा रही है। अब दोपहर दो बजे के बाद दुकाने नहीं खुलेंगी। आज देेेश मेंं सबसे ज्यादा 57 लोगों की मौत हुई । बिहार मेें कई नए जिलों में केस बढ़़े़े हैं। अनादि की कक्षाएं अब जूम एप से अलग हटकर माइक्रोसाफ्ट टीम्स पर लग रही हैं। उसने बताया कि उसकी तीन कक्षाएं ही रोज हो पा रही हैं। ऑनलाइन क्लास में 30 में से 25 छात्र रोज ऑनलाइन मौजूद होते हैं।

26 अप्रैल रविवार , 33वां दिन : सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में छूट बढ़ाई है। वहां सारी दुकानें खोली जा सकती हैं। सिर्फ शॉपिंग मॉल को छोड़कर। रविवार को दोपहर में दिल्ली एनसीआर में आंधी आई तो बिहार में अच्छी बारिश हुई। प्रधानमंत्री मोदी मन की बात में अवतरित हुए। उन्होंने कहा, रमजान में पहले ज्यादा इबादत करें ताकि दुनिया ईद से पहले कोरोना मुक्त हो सके। आज देश भर में 47 लोगों की मौत हुई उसमें सर्वाधिक 18 अहमदाबाद शहर में लोगों ने दम तोड़ा।  लंबे समय बाद आज मैंने लिट्टी बनाकर खाया। पर चोखा नहीं बनाया। लिट्टी के साथ चटनी और घुघनी। 
27 अप्रैल, सोमवार,  34 वां दिन ः देश में कोरोना के सर्वाधिक मरीज महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में सामने आए हैं। इसमें मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल बड़े केंद्र बने हैं। आज देश में कुल 60 लोगों की मौत हुई जो अब तक एक दिन में सर्वाधिक है। प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। 
28 अप्रैल, मंगलवार, 35 वां दिन- तीन मई की तारीख नजदीक आ रही है पर लॉकडाउन खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। हो सकता है उन राज्यों में ढील मिले जहां मामले कम हैं। 
हमारे गृह जिले रोहतास में कोराना के मामले कई नई जगहों पर बढ़ गए हैं। शहर के बारादरी के बाद करपुरवा, अड्डा रोड, जक्की शहीद, गौरक्षिणी में संक्रमण मिला है। जिले के राजपुर बाजार, आलमपुर और कोचस में भी कोरोना के नए केस मिल गए हैं। यह दुखद है जिले के कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना वायरस का पहुंच गया है। रोहतास में केस की संख्या 30 से ज्यादा है। बिहार के 29 जिले में संक्रमण पहुंच गया है। 



29 अप्रैल, बुधवार - 36वां दिन - दिल्ली में हॉटस्पॉट की संख्या 100 हो गई है। बस राहत की बात है कि लोग ठीक भी हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में किसी की मौत भी नहीं हुई है, पर आज दो लोगों की मौत हो गई। देश में कुल मौत की संख्या 1000 के पार हो गई। देश भर में 71 मौत हुई जो अब तक का एक दिन में सर्वाधिक है। हमारे रोहतास जिले के कई गांवों तक संक्रमण पहुंच गया है। करगहर प्रखंड के बड़हरी गांव में एक छह साल का बच्चा संक्रमित मिला है। मतलब मेरे पुश्तैनी गांव के आसपास भी कोरोना का संक्रमण पहुंच चुका है। आज मेरा दफ्तर के काम से अवकाश था। सरकार अब अलग अलग राज्यों में फंसे मजदूरों, पर्यटकों और दूसरे लोगों को उनके घर पहुंचाने का इंतजाम कर रही है। लोगों को बसों से उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। 

हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता इरफान की 54 साल की उम्र में आज मृत्यु हो गई। वे कैंसर से पीड़ित थे। वे शानदार अभिनेता थे, उनके निधन से समाज के हर वर्ग के लोग दुखी हैं। पान सिंह तोमर, लाइफ ऑफ ए पाई, लंच बॉक्स जैसी तमाम फिल्मोें में उन्होंने शानदार अभिनय किया था। कल और आज में मैंने तीन फिल्में देखीं। यू ट्यूब पर। बेमिसाल, खामोशी और सफर। इन तीनों फिल्मों के कहानी बांग्ला के लोकप्रिय लेखक आशुतोष मुखर्जी की है। तीनो फिल्में कहानी और संगीत के स्तर पर उम्दा हैं। संयोग है कि तीनो फिल्मों की कहानी डॉक्टरों के इर्दगिर्द घूमती है। 
30 अप्रैल, गुरुवार, 37वां दिन - तीन मई के बाद सरकार ग्रीन जोन वाले इलाकों में थोड़ी छूट दे सकती है। देश में एक दिन पहले 71 तो आज 67 लोगों को कोरोना ने ग्रस लिया। रुस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन भी कोरोना ग्रस्त हो गए हैं। बिहार में सीतामढ़ी जिले में भी कोरना पहुंच गया है। रोहतास जिले में भी आज नए केस आए हैं। सरकार अलग अलग राज्यों में फंसे लोगों को लाने की तैयारी कर रही है। 
एक दिन पहले इरफान के बाद आज लोकप्रिय अभिनेता ऋषि कपूर का 67 साल की उम्र में निधन हो गया। दोनों ही कैंसर से पीड़ित थे। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

 ( LOCKDOWN DAYS, CORONA, COVID 19 ) 

Saturday, 25 April 2020

गुलमोहर एक बार फिर खिल उठे हैं ( कविता )


गुलमोहर एक बार फिर खिल उठे हैं
सड़क के दोनों तरफ
हरियाली अंगड़ाई ले रही है...

गुलमोहर के अनगिनत फूल
अप्रैल की दोपहरी को भी
बना रहे हैं मनभावन

पर इन सड़कों पर आज
तुम भी नहीं हो
और मैं भी नहीं

तुम और मैं ही क्या
कोई भी तो नहीं है
इन गुलमोहर  की छांव तले
चलने के लिए

एक अनजान भय
बनारस की सड़कें हुईं है सुनसान

पता है न तुम्हें
मौलश्री के पेड़ के नीचे की
शाम भी हो गई है सुनसान

मौसम तो आएगा
गुलमोहर भी यूं ही
हर साल खिलेंगे

पर क्या हम तुम
फिर कभी यूं ही
बेतकल्लुफ
होकर मिलेंगे....

-         - विद्युत प्रकाश मौर्य
 ( 25 अप्रैल 2020 ) 

Friday, 24 April 2020

घुमक्कड़ स्वामी और राहुल सांकृत्यायन


लॉकडाउन के दिनों में कुछ पढ़ने के लिए अलमारी खंगाली तो कई किताबें हाथ लगी उसमें राहुल सांकृत्यायन की भी तीन पुस्तकें थीं। इनमें से एक घुमक्कड़ स्वामी को मैं 2003 में ही पढ़ चुका था। पर इसे एक बार और पढ़ने की इच्छा हुई। यह स्वामी हरिशरणानंद की जीवनी है। पर यह जीवनी से ज्यादा कहीं यात्रा वृतांत है। पुस्तक में अदभुत घुमक्कड़ी है। पुस्तक का कथ्य आरंभ होता है कानपुर शहर से। लेखक कानपुर के इतिहास के बारे में कई तरह की जानकारियां देते हैं। ब्रिटिश काल में कानपुर के उत्कर्ष की कथा सुनाते हैं। पुस्तक का काल खंड 1908 से लेकर 1930 के बीच का है।

कुल 117 पृष्ठों की यह पुस्तक आपको लगातार सैर कराती रहती है। पर इस सैर के साथ इतिहास, परंपरा, संस्कृति और आयुर्वेद के ज्ञान से लगातार रुबरू कराती रहती है। स्वामी हरिशरणानंद योग की तलाश में और सच्चे तपस्वी की तलाश में लंबा भटकते हैं। इस दौरान वे साधु बनने के बाद पहले अयोध्या पहुंचते हैं। वहां से हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, यमुनोत्री, त्रियुगीनारायण, केदारनाथ, बदरीनाथ समेत पूरे उत्तराखंड की खाक छानते हैं। वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भी जाते हैं।
उनकी सच्चे योगी से मुलाकात तो नहीं होती है, पर इस दौरान कई साधु मित्र बनते हैं। वे अपना प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद का ज्ञान बढ़ाते हैं। बाद में वे हिमाचल प्रदेश में चंबा, भारमौर आदि स्थलों की यात्रा करते हैं। आगे वे लौहार और उसके आसपास के कई स्थलों में भी काफी वक्त गुजारते हैं। घुमक्कड़ स्वामी का काफी वक्त गुजरता है अमृतसर में। लंबे अनुभव के बाद वे वैद्य बन चुके हैं और यहां पर वे अपनी फार्मेसी की शुरुआत करते हैं। अपनी फार्मेसी से वे देश भर में काफी नाम भी अर्जित करते हैं। ऐसे युवा संन्यासी की कथा है घुमक्कड़ स्वामी। जो लोग यात्रा साहित्य में रुचि रखते हैं उनके लिए पठनीय पुस्तक है।
पुस्तक – घुमक्कड़ स्वामी, लेखक – राहुल सांकृत्यायन,  किताब महल
-         ---  विद्युत प्रकाश मौर्य